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Ballia News: छह दशक से बह रहा नाला पाटकर प्लाटिंग व भवन निर्माण

Tue, 06 Jan 2026 11:22 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jan 2026 11:22 PM IST
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Plotting and building construction by filling the drain that has been flowing for six decades
नगर के बिचला घाट के समीप नाला के बीचों-बीच निर्माणाधीन मकान।संवाद - फोटो : सांकेतिक
बलिया। शहर के महावीर घाट बिचला घाट होते हुए जमुआ से आगे तक जाने वाले नाले को मिट्टी से भर कर प्लांटिंग किया जा रहा है। प्रशासनिक अनदेखी व राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से चंद पैसों के लालच में छह दशक से ऊपर से बह रहे नाला व उसके आसपास मकान का निर्माण बिना नक्शा व परमिशन के धड्ल्ले से चल रहा है। समय रहते अगर प्रशासन नहीं चेता तो बाढ़ से शहर को फिर नुकसान उठाना पड़ सकता है। आधे नगर के नालों के गंदे पानी की निकासी बंद हो जाएगी। गंगा में बाढ़ आने पर पानी इसी नाले से होकर दुबहड़ की तरफ हजारों एकड़ में फैल जाता है। शहर में बाढ़ के दबाव को कम करता है।
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नगर के महावीर घाट से कदम चौराहा बंधा के दक्षिण तरफ डूब क्षेत्र है। बाढ़ के दिनों पूरा इलाका डूब जाता है। बंधे के नीचे महावीर घाट, निहोरा नगर, बुढ़िया माई, गायत्री मंदिर के पास पिछले एक दशक में चार-पांच सौ से अधिक आवासीय मकान जिम्मेदारों की अनदेखी से बन गए हैं। ऐतिहासिक ददरी मेला का स्वरूप भी इसके कारण बदल गया है। स्थानीय काश्तकार क्षेत्रीय राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से महावीर घाट से बेदुआ तक बह रहे नाले व उसके आसपास की जमीन को आवासीय भवन के लिए प्लाटिंग कर रहे हैं। प्लाटर यहीं नहीं रुके, वे बिचला घाट के पीछे छह दशक से अधिक समय के पूर्व बह रहे नाले को मिट्टी से पाट कर जमीन की खरीद फरोख्त शुरू कर दी है। नाला बंद होने से बेदुआ सहित अन्य जगहों से आने वाला गंदा पानी उल्टे जमुआ की तरफ खेतों में लगी फसलों में पानी जाने लगा और खेतों में आने-जाने में परेशानी होने लगी। पांच छह गांव के लोगों ने डीएम को पत्रक देकर नाले से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
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60 लाख रुपये कट्ठा खरीद रहे जमीन
गायत्री मंदिर निहाेरा नगर व बेदुआ नई बस्ती बाढ़ क्षेत्र होने के बावजूद लोग घर व गोदाम बनाने के लिए 60 लाख से 70 लाख रुपये कट्ठा जमीन खरीद रहे हैं। बाढ़ के दिनों में घरों में पानी घुसने पर प्रशासन पर सुविधा न देने का आरोप लगाते हैं। हर वर्ष बाढ़ के कारण एक से दो माह तक घर जाने वाले रास्ता व घर में पानी रहता है।
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बिचला घाट के पास से बहती थी गंगा नदी
बिचला घाट के पीछे जो नाला बह रहा है, वहां पहले गंगा नदी बहती थी। यही पर पूर्व में तमसा गंगा में आकर मिलती थी। इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि आजादी के समय तक जहाज घाट हुआ करता था। सेनानियों ने अंग्रेजों का जहाज लूटा था। शहर को बाढ़ से बचाने के लिए लाट घाट से बिचला घाट तक सात ठोकर बने हैं। नदी फिर पुरानी धारा में आ सकती है। नदी में पिछले कई वर्षों से कटान तेजी से चल रही है।

डूब क्षेत्र में बिना परमिशन के मकान बनाना व प्लाॅटिंग करना गलत है। वर्षो से बह रहे नाले को मिट्टी से पाटने व भवन निर्माण के बारे में संबंधित राजस्वकर्मी से स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। खुद मौके पर पहुंच स्थलीय निरीक्षण कर गलत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -- आशा राम वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट बलिया।
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