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सरकारी में नियम नहीं और प्राइवेट में सुविधा नहीं, कहां लगेगी बूस्टर डोज
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जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाता स्वास्थ्यकर्मी।
- फोटो : BALLIA
कोरोना को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। जिसके चलते 18 साल से ऊपर वालों के लिए प्राइवेट अस्पतालों को बूस्टर डोज लगाने की अनुमति दे दी है। साथ ही कोविन एप से लोगों के पास संदेश भी आ रहा हैं कि पैसे देकर प्राइवेट में बूस्टर डोज लगवा लें, लेकिन जिले में 18 साल से ऊपर वालों को बूस्टर डोज किसी भी प्राइवेट अस्पताल नहीं लगाई जा रही है।
जिले में बूस्टर डोज लगवाने वालों की संख्या कम है और उनमें भी बहुत कम रुचि दिख रही है। कोविन एप दो डोज लगवाने वालों के पास अब बूस्टर डोज लगवाने का मैसेज आ रहा है। जिसमें बताया जा रहा है कि आप प्राइवेट अस्पताल में जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। लेकिन जिले में कोई भी प्राइवेट अस्पताल कोरोना के टीके की बूस्टर डोज नहीं लगा रहा है। 60 साल से ऊपर वालों और फ्रंट लाइन वर्कर्स को सरकारी अस्पताल में बूस्टर डोज लगाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्राइवेट अस्पताल बूस्टर डोज लगाने का एक व्यक्ति से 386 रुपये ले सकते हैं। हालांकि अभी शासन की ओर से 18 साल से ऊपर वालों के लिए सरकारी अस्पतालों में बूस्टर डोज लगाने का निर्देश नहीं दिया गया है।
इसलिए कम रुचि दिखा रहे प्राइवेट अस्पताल
कोरोना काल में जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई थी, तब सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को भी वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी थी। लेकिन उस दौरान लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन न लगवाकर सरकारी अस्पतालों में लगवाया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यही कारण है कि प्राइवेट अस्पताल कम रुचि दिखा रहे हैं। क्योंकि पहले प्राइवेट अस्पतालों में कम वैक्सीन लगने से वैक्सीन की काफी डोज खराब हुई थी।
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अभी 49882 लोगों ने ही लगवाई बूस्टर डोज
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 60 साल से अधिक उम्र के तीन लाख 31 हजार 678 लोगों को बूस्टर डोज लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि अभी 49882 लोगों ने ही कोरोना की बूस्टर डोज लगवाई है। जिसके चलते टीकाकरण बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बूथों की संख्या बढ़ा दी है।
सरकारी अस्पतालों में 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज लगाने का शासन की ओर से कोई निर्देश नहीं आया है। साथ ही जिले में कोई भी प्राइवेट अस्पताल बूस्टर डोज लगाने में रुचि नहीं दिखा रहा है।
डॉ. एके तिवारी, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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जिले में बूस्टर डोज लगवाने वालों की संख्या कम है और उनमें भी बहुत कम रुचि दिख रही है। कोविन एप दो डोज लगवाने वालों के पास अब बूस्टर डोज लगवाने का मैसेज आ रहा है। जिसमें बताया जा रहा है कि आप प्राइवेट अस्पताल में जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। लेकिन जिले में कोई भी प्राइवेट अस्पताल कोरोना के टीके की बूस्टर डोज नहीं लगा रहा है। 60 साल से ऊपर वालों और फ्रंट लाइन वर्कर्स को सरकारी अस्पताल में बूस्टर डोज लगाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्राइवेट अस्पताल बूस्टर डोज लगाने का एक व्यक्ति से 386 रुपये ले सकते हैं। हालांकि अभी शासन की ओर से 18 साल से ऊपर वालों के लिए सरकारी अस्पतालों में बूस्टर डोज लगाने का निर्देश नहीं दिया गया है।
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इसलिए कम रुचि दिखा रहे प्राइवेट अस्पताल
कोरोना काल में जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई थी, तब सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को भी वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी थी। लेकिन उस दौरान लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन न लगवाकर सरकारी अस्पतालों में लगवाया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यही कारण है कि प्राइवेट अस्पताल कम रुचि दिखा रहे हैं। क्योंकि पहले प्राइवेट अस्पतालों में कम वैक्सीन लगने से वैक्सीन की काफी डोज खराब हुई थी।
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अभी 49882 लोगों ने ही लगवाई बूस्टर डोज
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 60 साल से अधिक उम्र के तीन लाख 31 हजार 678 लोगों को बूस्टर डोज लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि अभी 49882 लोगों ने ही कोरोना की बूस्टर डोज लगवाई है। जिसके चलते टीकाकरण बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बूथों की संख्या बढ़ा दी है।
सरकारी अस्पतालों में 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज लगाने का शासन की ओर से कोई निर्देश नहीं आया है। साथ ही जिले में कोई भी प्राइवेट अस्पताल बूस्टर डोज लगाने में रुचि नहीं दिखा रहा है।
डॉ. एके तिवारी, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी