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विलय की बात सुन ठंड में भी आया पसीना
अमर उजाला ब्यूरो बलिया
Updated Fri, 22 Jan 2016 11:29 PM IST
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जनपद में पराग डेयरी का विलय आजमगढ़ पराग डेरी में होने की पहल से दुग्ध उत्पादकों की जिंदगी बेपटरी हो सकती है। अमर उजाला में 21 जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर ‘बलिया में पराग डेयरी पर लगा ग्रहण’ शीर्षक से छपी खबर पढ़ने के बाद इन उत्पादकों के माथे पर ठंड में भी पसीना आ गया है। सर्वाधिक चिंता दियरांचल के किसानों को है कि फिर दुधियों की पूरी तरह चांदी कटेगी। वे पशुपालकों का दूध औने-पौने दामों में खरीदेंगे।
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के प्रबंधक डीपी यादव के अनुसार यदि इस इकाई का विलय आजमगढ़ मंडल में हो गया तब किसान दुग्ध संघ से मिलने वाले पशु आहार सहित कई अन्य सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे। यदि वे अपने दूध को सीधे आजमगढ़ भी भेजना चाहेंगे तो इसके लिए उन्हें अधिक परिवहन खर्च वहन करना पड़ेगा।
रसड़ा के राघोपुर कामधेनु डेरी समिति के अध्यक्ष अजय कुमार यादव व संदीप कुमार यादव ने बताया कि उनके पास लगभग 125 गायें हैं। प्रत्येक दिन 1200 से 1300 दूध होता है। पराग कें द्र यहां बंद हो जाने से इससे हम लोगों को बहुत बड़ी क्षति हो रही है।
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क्याेंकि लगभग 50 किमी की दूरी तय कर अपना दूध भेज देते हैं। अब आजमगढ़ में चले जाने से लगभग 90 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। जिससे खर्च बढ़ेगा। बताया कि अब हम लोग पराग डेयरी से मिलने वाले आहार से भी वंचित हो जाएंगे।
नरहीं संवाददाता के मुताबिक इलाके के दुग्ध समिति का मनना है कि हम लोगों पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। भविष्य में क्या समस्याएं आएंगी उसका समाधान तलाशा जाएगा। दूध बलिया जाता है तो समय से भुगतान मिलता था अब आजमगढ़ जाने पर जरूर समस्याएं आएंगी।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अब तो अमूल का प्लांट वाराणसी में लग रहा है, ऐसे में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो इसका लाभ पशुपालकों को मिलेगा। नरहीं दुग्ध समिति के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार राय ने बताया कि सिर्फ नरहीं से 13 गैलन दूध हर रोज निकलता है।
जबकि निकटवर्ती गांव से भी आधा दर्जन गैलन दूध पराग डेरी को जाता है। ऐसे में पराग डेयरी को ही हम लोग दूध देते हैं। अभी तक कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान
देना चाहिए।
सुरेमनपुर संवाददाता की माने तो बैरिया तहसील क्षेत्र के साधन दुग्ध समिति करीब एक दशक पहले सुचारू रूप से चली आ रही है। पशुपालक अपना दूध सुबह और शाम समिति को देते थे और उन्हें पशुओं के खिलाने के लिए आहार भी पराग डेयरी से मिल जाया करता था।
लेकिन इकाई आजमगढ़ में विलय होने की सूचना पर दुग्ध समिति के अध्यक्ष दतहां निवासी रामजी यादव का कहना है कि दूध समिति पहले से ही परेशानियों का सामना झेल रहा है। जिससे दूध समिति बंद होने की कगार पर है। अब आजमगढ़ जब दूध भेजना पड़ेगा तो पूरी तरह समिति बंद हो जाएगी।
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दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के प्रबंधक डीपी यादव के अनुसार यदि इस इकाई का विलय आजमगढ़ मंडल में हो गया तब किसान दुग्ध संघ से मिलने वाले पशु आहार सहित कई अन्य सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे। यदि वे अपने दूध को सीधे आजमगढ़ भी भेजना चाहेंगे तो इसके लिए उन्हें अधिक परिवहन खर्च वहन करना पड़ेगा।
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रसड़ा के राघोपुर कामधेनु डेरी समिति के अध्यक्ष अजय कुमार यादव व संदीप कुमार यादव ने बताया कि उनके पास लगभग 125 गायें हैं। प्रत्येक दिन 1200 से 1300 दूध होता है। पराग कें द्र यहां बंद हो जाने से इससे हम लोगों को बहुत बड़ी क्षति हो रही है।
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क्याेंकि लगभग 50 किमी की दूरी तय कर अपना दूध भेज देते हैं। अब आजमगढ़ में चले जाने से लगभग 90 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। जिससे खर्च बढ़ेगा। बताया कि अब हम लोग पराग डेयरी से मिलने वाले आहार से भी वंचित हो जाएंगे।
नरहीं संवाददाता के मुताबिक इलाके के दुग्ध समिति का मनना है कि हम लोगों पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। भविष्य में क्या समस्याएं आएंगी उसका समाधान तलाशा जाएगा। दूध बलिया जाता है तो समय से भुगतान मिलता था अब आजमगढ़ जाने पर जरूर समस्याएं आएंगी।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अब तो अमूल का प्लांट वाराणसी में लग रहा है, ऐसे में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो इसका लाभ पशुपालकों को मिलेगा। नरहीं दुग्ध समिति के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार राय ने बताया कि सिर्फ नरहीं से 13 गैलन दूध हर रोज निकलता है।
जबकि निकटवर्ती गांव से भी आधा दर्जन गैलन दूध पराग डेरी को जाता है। ऐसे में पराग डेयरी को ही हम लोग दूध देते हैं। अभी तक कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान
देना चाहिए।
सुरेमनपुर संवाददाता की माने तो बैरिया तहसील क्षेत्र के साधन दुग्ध समिति करीब एक दशक पहले सुचारू रूप से चली आ रही है। पशुपालक अपना दूध सुबह और शाम समिति को देते थे और उन्हें पशुओं के खिलाने के लिए आहार भी पराग डेयरी से मिल जाया करता था।
लेकिन इकाई आजमगढ़ में विलय होने की सूचना पर दुग्ध समिति के अध्यक्ष दतहां निवासी रामजी यादव का कहना है कि दूध समिति पहले से ही परेशानियों का सामना झेल रहा है। जिससे दूध समिति बंद होने की कगार पर है। अब आजमगढ़ जब दूध भेजना पड़ेगा तो पूरी तरह समिति बंद हो जाएगी।