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मैं एक दीया हूं, अंधेरे पर वार करता हूं..
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
Updated Thu, 14 Apr 2016 10:57 PM IST
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रसड़ा कसबा के गांधी पार्क में आयोजित आल इंडिया मुशायरा का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करते विधायक उमाशंकर सिंह।
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नगर पालिका के गांधी पार्क चौराहे पर 'मोहब्बतों की एक शाम, इंसानियत के नाम' से बुधवार की रात आल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पूरी रात श्रोता मुशायरे का लुत्फ उठाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा कबूतर उड़ाकर किया। मुख्य अतिथि ने शायरों व रचनाकारों को माला व अंगवस्त्रम से सम्मानित किया।
मुशायरे का शुभारंभ जनपद के गयाशंकर प्रेमी की देवी वंदना से किया।
इसके बाद मंजर भोपालपुरी ने सुनाया कि 'तुम समुंद्र को क्या जानो... जो समुंद्र में डूबा है उसे ही गहराई नजर आती है..।' मिशन गोपालपुरी की की रचना तमाम रात यूं ही कारोबार करता हूं, मैं एक दीया हूं, अंधेरे पर वार करता हूं को लोगों ने दादों नवाजा।
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फिराक ने मेरी बातें अम्मा छोड़ दे, मैं जहां हूं वहां छोड़ दे। तथा आदमी हूं फरिश्ता नहीं, तुम्ही व वहमों गुमां छोड़ दे सुनाया तो महफिल तालियों से गूंज उठी। चांदनी शबनम ने सुनाया कि मेरी खुशियां भी लौट आएंगी, अब तुम परदेश से चले आओ।
ऐरम सुल्तानपुरी ने कसीदे सुनाते हुए प़ढ़ा कि 'हर एक चीज है दुनिया के कारखाने में, मगर गरीब का कुछ नहीं है इस जमाने में। बादशाह प्रेमी ने सुनाया कि 'गधे इश्क में सूखी घास खाते हैं, वे पागल लोग हैं, जो प्यार में सल्फास खाते है।
मंजर भोपाली ने सुनाया कि 'हिंद के जवानों की जवानी घर में सो गई, तो...। रातभर लोग गजलों और गीतों से बंधे रहे। इस मौके पर प्रमोद कुमार सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंदौली छत्रबली सिंह, अनिल सिंह, सतीश सिंह, सचिंद्र सिंह, बब्लू सिंह आदि मौजूद रहे। आयोजक जफर अहमद ने आभार जताया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा कबूतर उड़ाकर किया। मुख्य अतिथि ने शायरों व रचनाकारों को माला व अंगवस्त्रम से सम्मानित किया।
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मुशायरे का शुभारंभ जनपद के गयाशंकर प्रेमी की देवी वंदना से किया।
इसके बाद मंजर भोपालपुरी ने सुनाया कि 'तुम समुंद्र को क्या जानो... जो समुंद्र में डूबा है उसे ही गहराई नजर आती है..।' मिशन गोपालपुरी की की रचना तमाम रात यूं ही कारोबार करता हूं, मैं एक दीया हूं, अंधेरे पर वार करता हूं को लोगों ने दादों नवाजा।
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फिराक ने मेरी बातें अम्मा छोड़ दे, मैं जहां हूं वहां छोड़ दे। तथा आदमी हूं फरिश्ता नहीं, तुम्ही व वहमों गुमां छोड़ दे सुनाया तो महफिल तालियों से गूंज उठी। चांदनी शबनम ने सुनाया कि मेरी खुशियां भी लौट आएंगी, अब तुम परदेश से चले आओ।
ऐरम सुल्तानपुरी ने कसीदे सुनाते हुए प़ढ़ा कि 'हर एक चीज है दुनिया के कारखाने में, मगर गरीब का कुछ नहीं है इस जमाने में। बादशाह प्रेमी ने सुनाया कि 'गधे इश्क में सूखी घास खाते हैं, वे पागल लोग हैं, जो प्यार में सल्फास खाते है।
मंजर भोपाली ने सुनाया कि 'हिंद के जवानों की जवानी घर में सो गई, तो...। रातभर लोग गजलों और गीतों से बंधे रहे। इस मौके पर प्रमोद कुमार सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंदौली छत्रबली सिंह, अनिल सिंह, सतीश सिंह, सचिंद्र सिंह, बब्लू सिंह आदि मौजूद रहे। आयोजक जफर अहमद ने आभार जताया।