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Ballia News: मेले में की मस्ती, सामान की भी खरीदारी की
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ददरी मेला के मीना बाजार में बेडशीट की खरीदारी करती महिलाएं।संवाद
बलिया। महर्षि भृगु की धरती पर ऐतिहासिक ददरी मेले भीड़ बढ़ती जा रही है। रविवार को मेले अच्छी भीड़ रही। परिवार संग लोगों ने मेले में पहुंच कर आनंद उठाया। सामान की खरीदारी की। इससे मेले में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही। मेले में उमड़ी भीड़ को देखते हुए व्यापारी भी खुश दिखे। सीआरओ त्रिभुवन ने बताया कि लगभग 35 हजार से अधिक लोग मेले में पहुंचे।
रविवार को मेले में दुकानें भी सुबह 9 बजे तक सज गई थीं। सुबह लोग जल्द आने लगे। मेले में सुबह ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बस, ट्रेन समेत अन्य साधनों से मुख्यालय पहुंच गए। मेले में सुबह से उमड़ी भीड़ एक छोर से दूसरे छोर तक लोग मेले का आनंद लेने के बाद चाट, गुड़ही जलेबी समेत अन्य व्यंजनों का आनंद लिया। झूला, मौत का कुआं व जलपरी के पास सबसे अधिक भीड़ देखी गई। बच्चों ने छोटे झूले तो बड़ों ने खतरनाक झूले पर आनंद लिया। सुनामी झूला देखने के लिए भीड़ लगी रही लेकिन चढ़ने की हिम्मत हर कोई नहीं दिखा पा रहा था। इधर, महिलाएं शृंगार व घरेलू सामान की खरीदारी में जुटी रही। गर्म कपड़ों की दुकानों पर लोगों ने शाॅल, कंबल, चादर आदि खरीदे। छुट्टी के कारण बच्चों की संख्या मेले में अधिक दिखी। झूला, चर्खी, मौत का कुआं, जलपरी, ड्रैगन ट्रेन का लुत्फ लेने के लिए लोगों को कतार में खड़े होकर टिकट लेना पड़ा। युवा गुब्बारे पर निशाना लगाते रहे।
भूले बिसरे को पुलिस ने मिलाया
भीड़ में अधिकांश परिवार के लोग एक दूसरे से बिछड़ जा रहे थे। वे तत्काल पुलिस की मदद लेते थे। पुलिस इनके परिवार के सदस्यों को मिलाने का काम करती रही, इसमें सबसे अधिक बच्चे थे। इस दौरान 12 परिवार के सदस्यों को मिलाया गया।
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खेती-किसानी के सामान की भी बिक्री
घरेलू उपयोग में आने वाले जरूरत की चीजों के अलावा खेती किसानी से जुड़ा सामान सामान मेले में उपलब्ध है। खुरपी, हसुआ, चौकी, बेलन आदि की दुकानें लगी हैं। एक ओर जहां आकर्षक पंडालों में सजी-धजी दुकानें हैं, वहीं दूसरे हिस्से में पारंपरिक अंदाज में टेंट-तिरपाल लगाकर बिना किसी तामझाम के बिलकुल शांत व गंवई अंदाज में भी बहुत सी दुकानें सजी हुई हैं।
सज गया भारतेंदु कला मंच
ऐतिहासिक ददरी मेले में तीन बड़े चौराहे प्रशासन की तरफ से बनाए गए हैं। मेले में एक लेन से दूसरी लेन में जाने लोग चौराहे से होकर निकलते हैं। प्रशासन व नगर पालिका परिषद की तरफ से बनाए गए तीन चौराहों का नाम भारतेंदु कला मंच, महर्षि भृगुु मुनि चौराहा व दर्दर मुनि चौराहा रखा गया है। इन चौराहों को आकर्षक रूप से सजाया गया है।
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रविवार को मेले में दुकानें भी सुबह 9 बजे तक सज गई थीं। सुबह लोग जल्द आने लगे। मेले में सुबह ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बस, ट्रेन समेत अन्य साधनों से मुख्यालय पहुंच गए। मेले में सुबह से उमड़ी भीड़ एक छोर से दूसरे छोर तक लोग मेले का आनंद लेने के बाद चाट, गुड़ही जलेबी समेत अन्य व्यंजनों का आनंद लिया। झूला, मौत का कुआं व जलपरी के पास सबसे अधिक भीड़ देखी गई। बच्चों ने छोटे झूले तो बड़ों ने खतरनाक झूले पर आनंद लिया। सुनामी झूला देखने के लिए भीड़ लगी रही लेकिन चढ़ने की हिम्मत हर कोई नहीं दिखा पा रहा था। इधर, महिलाएं शृंगार व घरेलू सामान की खरीदारी में जुटी रही। गर्म कपड़ों की दुकानों पर लोगों ने शाॅल, कंबल, चादर आदि खरीदे। छुट्टी के कारण बच्चों की संख्या मेले में अधिक दिखी। झूला, चर्खी, मौत का कुआं, जलपरी, ड्रैगन ट्रेन का लुत्फ लेने के लिए लोगों को कतार में खड़े होकर टिकट लेना पड़ा। युवा गुब्बारे पर निशाना लगाते रहे।
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भूले बिसरे को पुलिस ने मिलाया
भीड़ में अधिकांश परिवार के लोग एक दूसरे से बिछड़ जा रहे थे। वे तत्काल पुलिस की मदद लेते थे। पुलिस इनके परिवार के सदस्यों को मिलाने का काम करती रही, इसमें सबसे अधिक बच्चे थे। इस दौरान 12 परिवार के सदस्यों को मिलाया गया।
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खेती-किसानी के सामान की भी बिक्री
घरेलू उपयोग में आने वाले जरूरत की चीजों के अलावा खेती किसानी से जुड़ा सामान सामान मेले में उपलब्ध है। खुरपी, हसुआ, चौकी, बेलन आदि की दुकानें लगी हैं। एक ओर जहां आकर्षक पंडालों में सजी-धजी दुकानें हैं, वहीं दूसरे हिस्से में पारंपरिक अंदाज में टेंट-तिरपाल लगाकर बिना किसी तामझाम के बिलकुल शांत व गंवई अंदाज में भी बहुत सी दुकानें सजी हुई हैं।
सज गया भारतेंदु कला मंच
ऐतिहासिक ददरी मेले में तीन बड़े चौराहे प्रशासन की तरफ से बनाए गए हैं। मेले में एक लेन से दूसरी लेन में जाने लोग चौराहे से होकर निकलते हैं। प्रशासन व नगर पालिका परिषद की तरफ से बनाए गए तीन चौराहों का नाम भारतेंदु कला मंच, महर्षि भृगुु मुनि चौराहा व दर्दर मुनि चौराहा रखा गया है। इन चौराहों को आकर्षक रूप से सजाया गया है।