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सामूहिक विवाह योजना के तहत सामानों की आपूर्ति को संस्था के चयन में भी खेल
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बलिया। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सामूहिक विवाह योजना में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। इस योजना के तहत सरकारी धन के बंदरबांट के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए हैं। सामान की आपूर्ति के लिए संस्था के चयन में ई टेंडरिंग न कर पूर्व की संस्था का नवीनीकरण कर लिया। वर्ष 18-19 में भी संस्था के चयन में भी आरोप लगे थे लेकिन अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
वर्ष 2017-18 में प्रदेश सरकार ने पूर्व से संचालित शादी अनुदान योजना को बंद कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लागू किया। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े की शादी में बेटी के खाते में 20 हजार के साथ जोड़े को 10 हजार रुपये का सामान देने व प्रति जोड़े पांच हजार रुपये टेंट, खाने-पीने पर खर्च करने का प्रावधान किया गया। वर्ष 2018-19 में सरकार ने जहां शादी अनुदान योजना को संचालित कर दिया वहीं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बेटी के खाते में 35 हजार के साथ ही 10 हजार का सामान व खर्च के लिए छह हजार की धनराशि तय की। इस साल निर्धारित लक्ष्य 1500 शादी के लिए कुल डेढ़ करोड़ रुपये के सामानों की आपूर्ति के लिए ई-टेंडरिंग की गई और 60 लाख की हैसियत निर्धारित की गई। इसके चयन में मनमानी की गई और इसे लेकर आरोप भी लगे लेकिन अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। वर्ष 19-20 में भी कुल 1520 जोड़े की शादी के लिए एक करोड़ 57 लाख रुपये मूल्य के सामानों की आपूर्ति की जानी है और इसके लिए ई-टेंडरिंग ने करके पूर्व के चयनित संस्था का ही नवीनीकरण अधिकारियों ने कर दिया। इतना ही नहीं इस संस्था पर अधिकारियों की इस कदर कृपा है कि टेंट, खाने-पाने व अन्य कार्यों के लिए नामित किया गया है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी तिलकधारी ने बताया कि सामूहिक विवाह योजना के तहत नए वित्तीय वर्ष में सामानों के मूल्य में सरकार की ओर से कोई बदलाव नहीं किया गया था और सामानों को लेकर कोई शिकायत भी नहीं थी। इसके कारण पूर्व के साल में चयनित संस्था का ही नवीनीकरण कर दिया गया। तिलकधारी,
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वर्ष 2017-18 में प्रदेश सरकार ने पूर्व से संचालित शादी अनुदान योजना को बंद कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लागू किया। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े की शादी में बेटी के खाते में 20 हजार के साथ जोड़े को 10 हजार रुपये का सामान देने व प्रति जोड़े पांच हजार रुपये टेंट, खाने-पीने पर खर्च करने का प्रावधान किया गया। वर्ष 2018-19 में सरकार ने जहां शादी अनुदान योजना को संचालित कर दिया वहीं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बेटी के खाते में 35 हजार के साथ ही 10 हजार का सामान व खर्च के लिए छह हजार की धनराशि तय की। इस साल निर्धारित लक्ष्य 1500 शादी के लिए कुल डेढ़ करोड़ रुपये के सामानों की आपूर्ति के लिए ई-टेंडरिंग की गई और 60 लाख की हैसियत निर्धारित की गई। इसके चयन में मनमानी की गई और इसे लेकर आरोप भी लगे लेकिन अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। वर्ष 19-20 में भी कुल 1520 जोड़े की शादी के लिए एक करोड़ 57 लाख रुपये मूल्य के सामानों की आपूर्ति की जानी है और इसके लिए ई-टेंडरिंग ने करके पूर्व के चयनित संस्था का ही नवीनीकरण अधिकारियों ने कर दिया। इतना ही नहीं इस संस्था पर अधिकारियों की इस कदर कृपा है कि टेंट, खाने-पाने व अन्य कार्यों के लिए नामित किया गया है।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी तिलकधारी ने बताया कि सामूहिक विवाह योजना के तहत नए वित्तीय वर्ष में सामानों के मूल्य में सरकार की ओर से कोई बदलाव नहीं किया गया था और सामानों को लेकर कोई शिकायत भी नहीं थी। इसके कारण पूर्व के साल में चयनित संस्था का ही नवीनीकरण कर दिया गया। तिलकधारी,
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