UP: बलिया-बक्सर के तीन पुल बने चिंता का सबब, सात महीने में आत्महत्या के लिए कूदे आठ, सुरक्षा के इंतजाम नहीं
बलिया-बक्सर के पुलों से लोगों के छलांग लगाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इन घटनाओं ने तीनों पुलों पर सुरक्षा, निगरानी और आत्महत्या रोकथाम के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बलिया-बक्सर को जोड़ने वाले वीर कुंवर सिंह सेतु, जयप्रभा सेतु और जनेश्वर मिश्र सेतु से नदी में छलांग लगाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। जनवरी से 18 अगस्त 2026 तक इन तीनों पुलों से आठ लोग नदी में कूदे। लगातार हो रही घटनाओं ने तीनों पुलों पर सुरक्षा, निगरानी और आत्महत्या रोकथाम के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीर कुंवर सिंह सेतु से कूदने के तीन मामले हुए हैं। धनजी गुप्ता का अब तक सुराग नहीं लगा है। जनवरी में भरौली निवासी 24 वर्षीय धनजी गुप्ता वीर कुंवर सिंह सेतु पर पहुंचे थे। उनके साथ पड़ोसी का कुत्ता भी था। पुल पर उनकी चप्पल मिलने और कुत्ते के रेलिंग के पास लगातार बैठे रहने से गंगा में छलांग लगाने की आशंका जताई गई। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से तलाश कराई, लेकिन उनका पता नहीं चल सका। ग्रामीणों के अनुसार माता-पिता की मौत के बाद वह मानसिक तनाव में थे।
जुलाई में बक्सर जिले के नवानगर थाना क्षेत्र के आथर गांव निवासी गणेश केशरी की पुत्री पूजा कुमारी पुराने वीर कुंवर सिंह सेतु पर पहुंची। भरौली की ओर से पैदल आई पूजा ने पाया नंबर दो के समीप गंगा में छलांग लगा दी। संयोग से उस समय नदी में मछली पकड़ रहे मछुआरों ने उसे डूबने से बचा लिया। पुलिस ने उसकी पहचान कर परिजनों से संपर्क किया। और उनके सुपुर्द कर दिया।
इसके बाद अगस्त में नरही थाना क्षेत्र के टुटुवारी गांव निवासी श्रीकांत पासवान ने वीर कुंवर सिंह सेतु से गंगा में छलांग लगा दी। वह पिता से पैसे नहीं मिलने के कारण परेशान था। हालांकि इस मामले में पुलिस की विस्तृत पुष्टि और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट हो सकेंगी।
जयप्रभा सेतु से कूदने वाली किशोरी की मौत, दो और घटनाएं हुई थीं
13 वर्षीय खुशी की मौत: मार्च में दोकटी थाना क्षेत्र के सुकरौली गांव निवासी 13 वर्षीय खुशी कुमारी पुत्री सोहन प्रसाद यादव ने स्कूल जाने के बजाय जयप्रभा सेतु के पाया नंबर पांच से सरयू नदी में छलांग लगा दी। तीन दिन बाद उसका शव नदी में उतराया मिला। पुलिस ने पहचान के बाद पोस्टमार्टम कराया। बताया गया कि खुशी कक्षा आठ की छात्रा थी और मां से साइकिल दिलाने की जिद कर रही थी।
दूसरी किशोरी ने भी लगाई छलांग: 19 मार्च को स्कूल ड्रेस और बैग के साथ एक अज्ञात किशोरी जयप्रभा सेतु के पाया नंबर पांच के पास पहुंची और सरयू में छलांग लगा दी। घटना के बाद उसकी तलाश कराई गई।
मछुआरों ने युवती की जान बचाई: 18 अप्रैल को जयप्रभा सेतु से एक युवती ने करीब 50 फीट नीचे सरयू नदी में छलांग लगा दी। नदी में मौजूद मछुआरों ने तत्काल नाव की मदद से उसे बाहर निकाल लिया। बेहोशी की हालत में उसे मांझी सीएचसी पहुंचाया गया।
तनाव के संकेतों को गंभीरता से लेने की जरूरत
मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराग भटनागर के अनुसार आत्महत्या का विचार अक्सर गहरे मानसिक तनाव, निराशा या अचानक पैदा हुए संकट से जुड़ा होता है। ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय परिवार और दोस्तों को उसके साथ रहना चाहिए। उसकी बात बिना टोके और बिना निर्णय किए सुनना भी महत्वपूर्ण है। व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक निराशा, खुद को नुकसान पहुंचाने की बात या लोगों से दूरी बनाने जैसे संकेत दिखाई दें तो गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को तत्काल भावनात्मक सहयोग देने के साथ विशेषज्ञ की मदद उपलब्ध कराना जरूरी है।