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महंगाई की मार से घर का सपना और दुश्वार हुआ
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बलिया। विधानसभा चुनाव में महंगाई का मुद्दा जोरों से उठ रहा है। निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ने का असर मकान बनवाने पर भी पड़ रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक निर्माण सामग्री की कीमतों 20 से 30 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है। इसके चलते आम लोगों को मकान बनवाना मुश्किल भरा काम हो गया है।
करीब छह माह पहले कोराना संक्रमण में कमी आने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुए तो इसी दौरान निर्माण सामग्रियों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई। इसके बाद करीब तीन माह बाढ़ और बारिश के कारण भी निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते भी निर्माण सामग्रियों की दामों में उछाल आया। इससे अपने घर का सपना देखने वाले लोगों पर आर्थिक भार बढ़ा है। खासकर वर्तमान समय में बालू, गिट्टी, ईंट, सरिया, गार्डर और अन्य निर्माण सामग्री महंगा होने से लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। निर्माण सामग्रियां इस कदर महंगी हैं कि लोग परेशान हो चले हैं। एक साल में निर्माण सामग्रियों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी होने से लोगों को घरों का निर्माण कराना मुश्किल हो रहा है। बताया जाता है कि लाल बालू बिहार प्रांत से आता है जो सोन नदी से निकलता है। बिल्डिंग मैटेरियल दुकानदारों की मानें तो डीजल मूल्य की वृद्धि के चलते भाड़ा में भी इजाफा हो गया है इसके चलते भी सामग्रियों के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
5 लाख तक बढ़ गया हजार वर्गफुट मकान का बजट
मकान बनाना मध्यम वर्ग के लिए ऐसे ही काफी खर्चीला है। वहीं अब सभी चीजों की कीमतें बढ़ जाने से औसतन 5 लाख तक का बजट बढ़ गया है। कोरोेना के दौरान भवन निर्माण से संबंधित सभी सामग्रियों के मूल्य में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर भवन निर्माण कराने वालों पर पड़ रहा है और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आर्किटेक ओपी मिश्रा की माने तो आमतौर पर एक हजार वर्ग फुट में सामान्य घर को बनवाने में एक साल पहले जहां 12 से 13 लाख रुपये खर्च आता था अब इसी घर को बनवाने में 15 से 16 लाख रुपये की लागत आ रही है। यानी करीब 5 लाख तक का बजट बढ़ गया है।
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भवन निर्माण सामग्रियों का भाव एक साल में करीब डेढ़ गुना बढ़ा है। केवल गिट्टी का भाव करीब-करीब स्थिर है। सामानों के दामों में वृद्धि का एक कारण माल भाड़ा बढ़ना भी है।
- मुसीर आलम, निर्माण सामग्री, कारोबारी
एक साल में भवन निर्माण से संबंधित सभी तरह की सामग्रियों में 20 से 30 फीसदी तक इजाफा हुआ है। डीजल का मूल्य बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ने का भी कुछ असर है।
- हिमांशु गुप्ता, पेंट कारोबारी
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करीब छह माह पहले कोराना संक्रमण में कमी आने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुए तो इसी दौरान निर्माण सामग्रियों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई। इसके बाद करीब तीन माह बाढ़ और बारिश के कारण भी निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते भी निर्माण सामग्रियों की दामों में उछाल आया। इससे अपने घर का सपना देखने वाले लोगों पर आर्थिक भार बढ़ा है। खासकर वर्तमान समय में बालू, गिट्टी, ईंट, सरिया, गार्डर और अन्य निर्माण सामग्री महंगा होने से लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। निर्माण सामग्रियां इस कदर महंगी हैं कि लोग परेशान हो चले हैं। एक साल में निर्माण सामग्रियों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी होने से लोगों को घरों का निर्माण कराना मुश्किल हो रहा है। बताया जाता है कि लाल बालू बिहार प्रांत से आता है जो सोन नदी से निकलता है। बिल्डिंग मैटेरियल दुकानदारों की मानें तो डीजल मूल्य की वृद्धि के चलते भाड़ा में भी इजाफा हो गया है इसके चलते भी सामग्रियों के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
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5 लाख तक बढ़ गया हजार वर्गफुट मकान का बजट
मकान बनाना मध्यम वर्ग के लिए ऐसे ही काफी खर्चीला है। वहीं अब सभी चीजों की कीमतें बढ़ जाने से औसतन 5 लाख तक का बजट बढ़ गया है। कोरोेना के दौरान भवन निर्माण से संबंधित सभी सामग्रियों के मूल्य में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर भवन निर्माण कराने वालों पर पड़ रहा है और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आर्किटेक ओपी मिश्रा की माने तो आमतौर पर एक हजार वर्ग फुट में सामान्य घर को बनवाने में एक साल पहले जहां 12 से 13 लाख रुपये खर्च आता था अब इसी घर को बनवाने में 15 से 16 लाख रुपये की लागत आ रही है। यानी करीब 5 लाख तक का बजट बढ़ गया है।
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भवन निर्माण सामग्रियों का भाव एक साल में करीब डेढ़ गुना बढ़ा है। केवल गिट्टी का भाव करीब-करीब स्थिर है। सामानों के दामों में वृद्धि का एक कारण माल भाड़ा बढ़ना भी है।
- मुसीर आलम, निर्माण सामग्री, कारोबारी
एक साल में भवन निर्माण से संबंधित सभी तरह की सामग्रियों में 20 से 30 फीसदी तक इजाफा हुआ है। डीजल का मूल्य बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ने का भी कुछ असर है।
- हिमांशु गुप्ता, पेंट कारोबारी