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जलवायु परिवर्तन पर दें ध्यान
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 11 Dec 2015 09:59 PM IST
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यदि दुनिया की बड़ी शक्तियां जलवायु परिवर्तन की ओर ध्यान नहीं देंगी तो 2050 तक दुनिया का नक्शा ही बदल जाएगा। यह बातें हेमवती नंदन गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लल्लन जी सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहीं।
इस दौरान उन्होंने कहा कि वास्तव में जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित राष्ट्र भारत है। भारत का हिमाच्छादित चोटियों से बर्फ का 70 फीसदी अंश कम होने से आशंका बढ़ती जा रही है।
प्रो. सिंह चंद्रशेखर नगर स्थित शक्तिस्थल स्कूल में जलवायु पर पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि इसी परिवर्तन को देखते हुए वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम का मानना है कि यदि हम इस परिवर्तन से सबक नहीं लिए तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषण पैदा करने वाला देश चीन और अमेरिका है। अधिक प्रदूषण के चलते गेहूं 13 फीसदी और धान का उत्पादन 15 फीसदी गिर जाएगा।
यदि इसी तरह से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन से दुनिया का तापमान बढ़ता रहा तो अगले 50 वर्षों में मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, केरल आदि समुद्र में समा जाएंगे।
इस मौके पर शक्तिस्थल के प्रबंधक दुर्गादत्त त्रिपाठी ने भी हो रहे जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताई। कहा कि जलवायु परिवर्तन से पूरा विश्व पर्यावरण ने सबसे ज्यादा जलवायु ही मानव जीवन को प्रभावित किया है।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि वास्तव में जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित राष्ट्र भारत है। भारत का हिमाच्छादित चोटियों से बर्फ का 70 फीसदी अंश कम होने से आशंका बढ़ती जा रही है।
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प्रो. सिंह चंद्रशेखर नगर स्थित शक्तिस्थल स्कूल में जलवायु पर पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि इसी परिवर्तन को देखते हुए वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम का मानना है कि यदि हम इस परिवर्तन से सबक नहीं लिए तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषण पैदा करने वाला देश चीन और अमेरिका है। अधिक प्रदूषण के चलते गेहूं 13 फीसदी और धान का उत्पादन 15 फीसदी गिर जाएगा।
यदि इसी तरह से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन से दुनिया का तापमान बढ़ता रहा तो अगले 50 वर्षों में मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, केरल आदि समुद्र में समा जाएंगे।
इस मौके पर शक्तिस्थल के प्रबंधक दुर्गादत्त त्रिपाठी ने भी हो रहे जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताई। कहा कि जलवायु परिवर्तन से पूरा विश्व पर्यावरण ने सबसे ज्यादा जलवायु ही मानव जीवन को प्रभावित किया है।