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पशु तस्करी: 14 साल बाद जिले में हुई बड़ी कार्रवाई

Sat, 05 Jun 2021 10:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 10:27 PM IST
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Big action on policemen in animal smuggling case after 14 years
सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बसारिखपुर दियारा में पशु तस्करी का अड्डा पकड़े जाने के बाद से एक-एक परत खुलने लगी है। बताया जा रहा है कि जिले में पशु तस्करी कभी बंद नहीं हुई बल्कि पुलिस व तस्करों ने इस गोरखधंधे का तरीका बदल दिया था ताकि लोगों को इसकी भनक नहीं लगे। बिहार से सटे अधिकांश दियारा इलाके में यह खेल चल रहा है। पशु तस्करी मामले में एसपी डॉ. विपिन ताडा की ओर से सिकंदरपुर थाने के एसओ समेत सात पुलिस कर्मियों को लाइनहाजिर किया है। जिले में इतनी बड़ी कार्रवाई 14 वर्ष की गई है।
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सीमावर्ती इलाकों के रास्ते होने वाली तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। अब तस्कर भी हाईटेक तरीके से तस्करी का काम कर रहे हैं और दूर बैठ कर वाहनों पर निगाह रखते हैं। वहीं पुलिसकर्मियों ने भी वसूली का तरीका बदल दिया है। वे खुद के स्थान पर किसी बेगार से काम कराते हैं। खासकर किसी भी तरह की तस्करी का धंधा प्रांतीय सीमावर्ती इलाकों के गंगा व घाघरा के दियरांचल इलाकों से किया जाता है। शासन की सख्ती को देखते हुए जहां तस्करों ने अपना ठिकाना बदलते हुए दियरांचल में ठिकाना जमा लिया है वहीं पुलिस भी पिकेट व सड़कों पर इनके वाहनों को नहीं रोकती बल्कि इसके लिए वह बेगार से काम करवाती है जो पूरा लेखाजोखा रखता है। खासकर पशु तस्करी के दियरांचल इलाका महफूज भी होता है क्योंकि इन इलाकों का रास्त काफी दुर्गम होता है और नदी व सड़क मार्ग दोनों से धंधे को अंजाम दिया जाता है।
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जिले में पशु तस्करी को लेकर समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है। इस बार एसपी ने सिकंदपुर थाने के एसओ समय सात पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया है। 14 साल पहले भी इसी तरह की कार्रवाई तत्कालीन एसपी अमिताभ ठाकुर ने वर्ष 2007 में नरही थाने के पुलिसकर्मियों पर की थी। उस समय नरही थाना के भरौली मेें पशु मेला लगा था। पशु तस्करी के आरोप में पहले दिन मेला ड्यूटी कर रहे तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके अगले दिन भी दो और को निलंबित और चार पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर दिया। इसके बाद भी जब शिकायत नहीं रुकी तो तीसरे दिन तत्कालीन एसपी ने चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था। इसी तरह वर्ष 2010 में तत्कालीन एसपी लालजी शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया और बिना अनुमति पशुओं को बिहार ले जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। आलम यह रहा कि पूरे साल मेला का आयोजन ही नहीं हो सका था।
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किसी भी प्रकार की तस्करी पर लगाम लगाने का निर्देश सभी थानों को दिया गया है। अगर कहीं से शिकायत मिली तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अगर पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।- डॉ. विपिन ताडा, एसपी, बलिया
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