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यूपी के हिस्से का नहीं बन सका बांध, सिताबदियारा वासियों को झेलना पड़ेगा बाढ़ व कटान
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जयप्रकाशनगर। सरकार के लाख प्रयास व करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद जेपी के सिताबदियारा वासियों को गंगा व सरयू नदी के बाढ़ व कटान से इस वर्ष भी निजात नहीं मिल पएगा। यूपी सिंचाई विभाग की लापरवाही से इस साल भी यूपी-बिहार की संयुक्त परियोजना वाले नए रिंग बांध का कार्य अधूरा ही रह गया।
सरयू नदी एक दशक पूर्व से सिताबदियारा पर अपना कहर बरपा रही है। इस क्षेत्र को कटान से बचाने के लिए कई बार में करोड़ों खर्च भी हुए लेकिन कटान से मुक्ति नहीं मिल पाई। अंतत: यूपी-बिहार दोनों सीमा के गांवों को बचाने के लिए संयुक्त रिंग बांध की परियोजना बनी। इसमें बिहार ने तो अपना कार्य पूरा कर दिया है लेकिन यूपी की सीमा में यह कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है। अब बरसात के बीच यह कार्य शायद पूरा भी न हो पाए।
यूपी-बिहार दोनों सीमा में जेपी का गांव सिताबदियारा का क्षेत्र है। इसको गंगा व घाघरा नदी की कटान व बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए कुल 125 करोड़ की लागत से सुरक्षा बांध के निर्माण की स्वीकृति 2017 में मिली। उत्तर प्रदेश की सीमा में गंगा नदी के सामने 2300 मी. का सुरक्षा बांध तो वहीं सरयू नदी के सामने 1175 मी. बांध निर्माण होना है। वहीं, बिहार की सीमा में कुल चार किमी बांध निर्माण होना था जिसे बिहार सरकार बीते दो वर्ष पूर्व ही पूरा करा चुकी है। जबकि यूपी की सरकार वर्ष 2018 में करीब दो करोड़ की लागत से गंगा किनारे रिंग बांध के निर्माण कार्य का प्रारंभ कर बंद कर दिया। इसके बाद इस वर्ष फरवरी माह में इस रिंग बांध का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ लेकिन लॉकडाउन और अब बरसात के चलते यह बांध यूपी में फिर अधूरे अंदाज में ही रह गया। यूपी की इस लापरवाही के चलते एक बार फिर यूपी-बिहार दोनों सीमा की लगभग 50 हजार की आबादी बाढ़ की विभीषिका का शिकार होगी।
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सुरक्षा बांध का कार्य पूरा होने पर कई गांव बाढ़ व कटान से सुरक्षित हो जाएंगे। इसमें विकास खंड मुरली छपरा के इब्राहिमाबाद नौबरार पंचायत के रामेश्वर टोला, सुफल टोला, घूरी टोला, नवका टोला का कुछ हिस्सा, बड़का सुफल टोला, शिवनारायण टोला, दलेल टोला व कोड़हरा नौबरार पंचायत के भवन टोला, सठिया हैं। वहीं बिहार सीमा के सिताबदियारा पंचायत के आलेख टोला, गरीबा टोला, रामनगर, रावल टोला, चैन छपरा, छोटका बैजू टोला, शोभा छपरा, लाला टोला, रामेश्वर टोला, प्रभुनाथनगर पंचायत के दक्षिणवारी चक्की, उत्तरवारी चक्की आदि गांव बाढ़ से सुरक्षित होंगे।
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सरयू नदी एक दशक पूर्व से सिताबदियारा पर अपना कहर बरपा रही है। इस क्षेत्र को कटान से बचाने के लिए कई बार में करोड़ों खर्च भी हुए लेकिन कटान से मुक्ति नहीं मिल पाई। अंतत: यूपी-बिहार दोनों सीमा के गांवों को बचाने के लिए संयुक्त रिंग बांध की परियोजना बनी। इसमें बिहार ने तो अपना कार्य पूरा कर दिया है लेकिन यूपी की सीमा में यह कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है। अब बरसात के बीच यह कार्य शायद पूरा भी न हो पाए।
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यूपी-बिहार दोनों सीमा में जेपी का गांव सिताबदियारा का क्षेत्र है। इसको गंगा व घाघरा नदी की कटान व बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए कुल 125 करोड़ की लागत से सुरक्षा बांध के निर्माण की स्वीकृति 2017 में मिली। उत्तर प्रदेश की सीमा में गंगा नदी के सामने 2300 मी. का सुरक्षा बांध तो वहीं सरयू नदी के सामने 1175 मी. बांध निर्माण होना है। वहीं, बिहार की सीमा में कुल चार किमी बांध निर्माण होना था जिसे बिहार सरकार बीते दो वर्ष पूर्व ही पूरा करा चुकी है। जबकि यूपी की सरकार वर्ष 2018 में करीब दो करोड़ की लागत से गंगा किनारे रिंग बांध के निर्माण कार्य का प्रारंभ कर बंद कर दिया। इसके बाद इस वर्ष फरवरी माह में इस रिंग बांध का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ लेकिन लॉकडाउन और अब बरसात के चलते यह बांध यूपी में फिर अधूरे अंदाज में ही रह गया। यूपी की इस लापरवाही के चलते एक बार फिर यूपी-बिहार दोनों सीमा की लगभग 50 हजार की आबादी बाढ़ की विभीषिका का शिकार होगी।
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सुरक्षा बांध का कार्य पूरा होने पर कई गांव बाढ़ व कटान से सुरक्षित हो जाएंगे। इसमें विकास खंड मुरली छपरा के इब्राहिमाबाद नौबरार पंचायत के रामेश्वर टोला, सुफल टोला, घूरी टोला, नवका टोला का कुछ हिस्सा, बड़का सुफल टोला, शिवनारायण टोला, दलेल टोला व कोड़हरा नौबरार पंचायत के भवन टोला, सठिया हैं। वहीं बिहार सीमा के सिताबदियारा पंचायत के आलेख टोला, गरीबा टोला, रामनगर, रावल टोला, चैन छपरा, छोटका बैजू टोला, शोभा छपरा, लाला टोला, रामेश्वर टोला, प्रभुनाथनगर पंचायत के दक्षिणवारी चक्की, उत्तरवारी चक्की आदि गांव बाढ़ से सुरक्षित होंगे।