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विश्वविद्यालय कैंपस का होगा विस्तार या बदलेगा लोकेशन

Sat, 13 Mar 2021 10:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Mar 2021 10:28 PM IST
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ballia university convocational programme
बलिया में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह के दौरान दीप प्रज्ज्वलित ? - फोटो : BALLIA
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कैंपस को लेकर अब बहस छिड़ गई है। बहस यह कि विश्वविद्यालय के कैंपस का विस्तार होगा या इसे कहीं और स्थानांतरित किया जाएगा। यह बहस तब छिड़ी जब विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने संबोधन के बाद यहां की दुश्वारियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह डूब क्षेत्र में स्थित है, यहां छह माह तक ही शिक्षण कार्य हो पाता है, ऐसे में इसे कहीं और स्थापित करने की जरूरत है। इसके लिए कुलपति जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर लें और कहीं और जमीन देखें। कुलाधिपति तो इतनी उत्साहित थीं कि वह यहां तक बोल गईं कि मैं चाहती हूं कि जब अगले दीक्षांत समारोह में शामिल होने आऊं तो वह कार्यक्रम नए कैंपस में आयोजित हो।
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राज्यपाल ने कहा कि अभी हम और शर्मा जी (उप मुख्यमंत्री प्रो. दिनेश शर्मा) बैठे थे तो ये सुझाव आया है कि कहीं और जगह ढूंढ़ लेनी चाहिए। छह माह तो बंद रहती है यूनिवर्सिटी क्या करें? ऐसे में यहां जो अब तक जो इंफ्रास्टकचर उसका उपयोग हम कर सकते हैं। यहां छह माह का कोर्स कर सकते हैं। बच्चों के लिए, युवाओं के लिए, मत्स्य के लिए, कृषि के लिए, सोलर पावर आदि के लिए इस कैंपस का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में अब आपको नए भवनों के निर्माण के लिए शासन ने धनराशि आवंटित की है, उसे खर्च न करें। अब उसका उपयोग दूसरे स्थान पर नए कैंपस में बनने वाले भवनों के निर्माण के लिए करें। आपने जो सूचना दी है मंडलायुक्त और अन्य अधिकारियों को उसकी सूचना शासन को भेज दीजिए और यदि स्वीकृति मिल जाती है तो वहीं यूनिवर्सिटी का विकास करें।
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प्रदेश के स्कूलों में गीता पढ़ाने पर जोर
बलिया। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य लोकायुक्त न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए बताया कि जब वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में थे तो एक केस आया। केस यह था कि मध्य प्रदेश सरकार ने गीता को स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया था, जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई थी गीता एक धार्मिक पुस्तक है, इसलिए उसे स्कूलों में पढ़ाने को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। तब डबल बेंच ने फैसला दिया था गीता एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, यह भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करती है। यह फिलासपी है, इसके बाद गीता को पढ़ाने का फैसला सही माना गया। उन्होंने यह इच्छा जताई कि यहीं शिक्षा मंत्री मौजूद हैं, मेरी अपील है कि उसे उत्तर प्रदेश में भी कक्षाओं में पढ़ाने की व्यवस्था की जाए। कुलाधिपति ने कहा कि हमारे देश की शिक्षा नीति सही नहीं होने के कारण देश का सही इतिहास बच्चों को पढ़ाया ही नहीं गया, अब केंद्र सरकार ने इस पर पहल की है। इसमें सबसे जरूरी जो चीज है व एकरूपता की है। अब नई शिक्षा नीति के अनुसार, पूरे देश में 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम वह होगा जो शिक्षा विभाग केंद्र सरकार तय करेगा। 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा राज्यों पर छोड़ दिया गया, क्या सीखाना है, क्यों सीखाना है यह राज्य पर छोड़ दिया गया है। उच्च शिक्षा में यह विश्वविद्यालयों अध्यापकों की है, कुलपतियों की है। आपके आसपास जो स्थिति है, उसके बारे में भी बच्चों को सीखा सकते हैं। शंभूनाथ जी ने जो बताया कि भगवत गीता हमें पढ़ाना चाहिए, हम सोच सकते हैं कि पहली कक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक भगवत गीता में क्या सीखाना चाहिए, उसे इसमें डाल सकते हैं, इसमें कोई निषेध नहीं है। हम कर सकते हैं। बच्चों में चरित्र निर्माण, देशप्रेम हो, गुस्सा न हो, शांति हो इसका प्रयास करें।
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