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दस्तावेज गायब करने के आरोप में सचिवों पर हो सकता है केस दर्ज
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बैरिया। वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 की अवधि में कार्य कर चुके ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ दस्तावेज गायब करने के आरोप में एफआईआर की तलवार लटक गई है। बैरिया ब्लाक के 30 ग्राम पंचायतों के साथ ही अन्य ब्लाकों के तत्कालीन सचिवों पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश परियोजना निदेशक द्वारा दिया गया है। इस दायरे में कई मृत व सेवानिवृत्त सचिव भी आ रहे हैं, जिसको लेकर विभाग पशोपेश में हैं।
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरों को काम के बदले अनाज देने के मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही जांच का जिन्न एक बार फिर बाहर निकला है। सितंबर 2012 में ईओडब्ल्यू ने तहसील क्षेत्र के 28 सरकारी राशन दुकानदारों के खिलाफ अनाज घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी। तब निलंबित सरकारी राशन दुकानदार उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल हो गए थे। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया, इसके बाद ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 तक मजदूरों को काम के बदले प्रति मजदूर पांच किलो अनाज व 23 रुपये नगदी देकर विकास कार्य कराने संबंधित मस्टर रोल, बाऊचर व प्राक्कलन की मांग संबंधित विभागों से लगातार करती रही। बार-बार संबंधित दस्तावेजों की मांग करने के बावजूद जब ईओडब्ल्यू को दस्तावेज नहीं मिले तो उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद पीडी ने इस मामले में संबंधित ब्लॉकों के खण्ड विकास अधिकारियों निर्देश दिया कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने वाले सचिवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अवगत कराएं। बैरिया विकास खंड के तत्कालीन 30 सचिवों पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी हो रही है। हालांकि इस दायरे में कई मृत व सेवानिवृत्त सचिव भी आ रहे हैं, जिसको लेकर विभाग पशोपेश में है।
इनसेट...
- संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना अंतर्गत वर्ष 2002-03 से 2005-06 में हुए खाद्यान्न घोटाला की जांच की जा रही है। मामले में पत्रावली मांगी गई है, लेकिन पत्रावली नहीं मिल रही है, जिससे जिलाधिकारी के आदेश पर खंड विकास अधिकारी संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ पत्रावली गायब करने का एफआईआर दर्ज कराएंगे।
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-कृष्ण मुरारी मिश्र, इंस्पेक्टर ईओडब्ल्यू, वाराणसी
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संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरों को काम के बदले अनाज देने के मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही जांच का जिन्न एक बार फिर बाहर निकला है। सितंबर 2012 में ईओडब्ल्यू ने तहसील क्षेत्र के 28 सरकारी राशन दुकानदारों के खिलाफ अनाज घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी। तब निलंबित सरकारी राशन दुकानदार उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल हो गए थे। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया, इसके बाद ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 तक मजदूरों को काम के बदले प्रति मजदूर पांच किलो अनाज व 23 रुपये नगदी देकर विकास कार्य कराने संबंधित मस्टर रोल, बाऊचर व प्राक्कलन की मांग संबंधित विभागों से लगातार करती रही। बार-बार संबंधित दस्तावेजों की मांग करने के बावजूद जब ईओडब्ल्यू को दस्तावेज नहीं मिले तो उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद पीडी ने इस मामले में संबंधित ब्लॉकों के खण्ड विकास अधिकारियों निर्देश दिया कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने वाले सचिवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अवगत कराएं। बैरिया विकास खंड के तत्कालीन 30 सचिवों पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी हो रही है। हालांकि इस दायरे में कई मृत व सेवानिवृत्त सचिव भी आ रहे हैं, जिसको लेकर विभाग पशोपेश में है।
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इनसेट...
- संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना अंतर्गत वर्ष 2002-03 से 2005-06 में हुए खाद्यान्न घोटाला की जांच की जा रही है। मामले में पत्रावली मांगी गई है, लेकिन पत्रावली नहीं मिल रही है, जिससे जिलाधिकारी के आदेश पर खंड विकास अधिकारी संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ पत्रावली गायब करने का एफआईआर दर्ज कराएंगे।
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-कृष्ण मुरारी मिश्र, इंस्पेक्टर ईओडब्ल्यू, वाराणसी