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Ballia News: आशा-संगिनियों ने मांगा राज्य कर्मचारी का दर्जा
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विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में उपस्थित आशा कार्यकत्रियों को संबोधित करती जिलाध्
बलिया। आशा कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश (सीटू से संबद्ध) की जिला शाखा ने आशा एवं संगिनी कार्यकर्ताओं की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट को पत्रक सौंपा।
जिलाध्यक्ष शशि सिंह और जिला सचिव रिंकू सिंह ने मानदेय बढ़ोतरी की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे स्पष्ट रूप से लागू करने की मांग की। उन्होंने ने कहा कि घोषणा के बावजूद बढ़ा हुआ मानदेय कितना होगा और कब से लागू किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है। पत्र में आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने के साथ सम्मानजनक मानदेय, पेंशन, ग्रेच्युटी और बीमा सुविधा देने की मांग उठाई गई है। यूनियन के अनुसार आशा कार्यकर्ता वर्ष 2006 से स्वास्थ्य सेवाओं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें कार्य के अनुपात में पर्याप्त भुगतान नहीं मिल रहा है।
उन्होंने दावा किया कि कई कार्यों के लिए उन्हें करीब 50 से 125 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होता है। पत्र में किस्तों के बजाय बिना कटौती एकमुश्त मानदेय देने और सभी आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं तथा उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा देने की भी मांग की गई है। जिलाध्यक्ष और जिला सचिव ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। ऐसे में उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मौके पर राजकुमारी गुप्ता, सुमन पांडेय, कलावती देवी, लाली पांडेय, उषा बरनवाल, सुनीता कुशवाहा, गीता देवी, सीमा पांडेय, मीना देवी आदि रही।
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जिलाध्यक्ष शशि सिंह और जिला सचिव रिंकू सिंह ने मानदेय बढ़ोतरी की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे स्पष्ट रूप से लागू करने की मांग की। उन्होंने ने कहा कि घोषणा के बावजूद बढ़ा हुआ मानदेय कितना होगा और कब से लागू किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है। पत्र में आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने के साथ सम्मानजनक मानदेय, पेंशन, ग्रेच्युटी और बीमा सुविधा देने की मांग उठाई गई है। यूनियन के अनुसार आशा कार्यकर्ता वर्ष 2006 से स्वास्थ्य सेवाओं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें कार्य के अनुपात में पर्याप्त भुगतान नहीं मिल रहा है।
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उन्होंने दावा किया कि कई कार्यों के लिए उन्हें करीब 50 से 125 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होता है। पत्र में किस्तों के बजाय बिना कटौती एकमुश्त मानदेय देने और सभी आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं तथा उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा देने की भी मांग की गई है। जिलाध्यक्ष और जिला सचिव ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। ऐसे में उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मौके पर राजकुमारी गुप्ता, सुमन पांडेय, कलावती देवी, लाली पांडेय, उषा बरनवाल, सुनीता कुशवाहा, गीता देवी, सीमा पांडेय, मीना देवी आदि रही।
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