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निजी स्कूलों की मनमानी पर गुस्सा
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 01 Apr 2015 11:55 PM IST
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नया सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली शुरू हो गई है। इस संदर्भ में अधिवक्ताओं का एक दल जिलाधिकारी मुरली मनोहर लाल से मिला और इस पर नकेल कसने की मांग की।
पत्रक सौंपकर विभिन्न मदों में बेमतलब फीस वसूली का आरोप लगाया। साथ ही मांग किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जिले के निजी स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों का प्रवेश लिया जाए।
ज्ञापन में बताया है कि निजी विद्यालयों की ओर से प्रत्येक वर्ष पुन: प्रवेश, टर्मिनल, वार्षिक, डेवलपमेंट के नाम पर अवैध रूप से मनमानी फीस ली जा रही है, जो कि गैर कानूनी है। उन्होंने सभी स्कूलों से फीस का ढांचा मंगाकर गैरजरूरी वसूली को समाप्त कराने की मांग की।
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साथ ही बस में मानक के विपरीत बच्चों को बैठाए जाने का भी आरोप लगाया। यहां तक कि बच्चों को बस में खड़ा कर दिया जाता है। जबकि बस फीस मनमाने ढंग से वसूली जाती है। इसे तत्काल बंद किया जाए। इसके अलावा निजी विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्र्रम बदलकर स्कूल में ही कापी, किताब बेचकर मोटी कमाई जाती है।
इससे कमाई के साथ-साथ उनके द्वारा टैक्स की चोरी भी की जाती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीट पर गरीब बच्चों को अनिवार्य और मुक्त शिक्षा दी जानी है, इसका सख्ती से पालन करवाया जाए। निजी विद्यालयों द्वारा शासनादेश के अनुसार बच्चों का फ्री मेडिकल चेकअप करवाया गया।
साथ ही आरओ युक्त पानी तथा विद्युत कटौती जेनरेटर की व्यवस्था की जाए। शासनादेश के अनुसार निजी विद्यालयों में तैनात शिक्षक और शिक्षिकाओं को सरकारी अध्यापकों की भांति सुविधाएं दी जाएं। साथ ही सरकारी विद्यालयों में अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और जनप्रतिनिधियों के बच्चों का पढ़ाना अनिवार्य किया जाए।
अन्यथा की स्थिति में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मनोज कुमार हंस, अजीत कुमार सिंह, बृज किशोर श्रीवास्तव, मनोज कुमार श्रीवास्तव, विजय शंकर, संजीव कुमार सिंह, राकेश मिश्रा, शिवाकांत यादव, राजेश सिंह, अजय कुमार सिंह, सुभाष चंद्र राय, अश्वनी कुमार दूबे, अनिल राय, नीरज मौर्या, गोरख नाथ वर्मा आदि मौजूद थे।
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पत्रक सौंपकर विभिन्न मदों में बेमतलब फीस वसूली का आरोप लगाया। साथ ही मांग किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जिले के निजी स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों का प्रवेश लिया जाए।
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ज्ञापन में बताया है कि निजी विद्यालयों की ओर से प्रत्येक वर्ष पुन: प्रवेश, टर्मिनल, वार्षिक, डेवलपमेंट के नाम पर अवैध रूप से मनमानी फीस ली जा रही है, जो कि गैर कानूनी है। उन्होंने सभी स्कूलों से फीस का ढांचा मंगाकर गैरजरूरी वसूली को समाप्त कराने की मांग की।
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साथ ही बस में मानक के विपरीत बच्चों को बैठाए जाने का भी आरोप लगाया। यहां तक कि बच्चों को बस में खड़ा कर दिया जाता है। जबकि बस फीस मनमाने ढंग से वसूली जाती है। इसे तत्काल बंद किया जाए। इसके अलावा निजी विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्र्रम बदलकर स्कूल में ही कापी, किताब बेचकर मोटी कमाई जाती है।
इससे कमाई के साथ-साथ उनके द्वारा टैक्स की चोरी भी की जाती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीट पर गरीब बच्चों को अनिवार्य और मुक्त शिक्षा दी जानी है, इसका सख्ती से पालन करवाया जाए। निजी विद्यालयों द्वारा शासनादेश के अनुसार बच्चों का फ्री मेडिकल चेकअप करवाया गया।
साथ ही आरओ युक्त पानी तथा विद्युत कटौती जेनरेटर की व्यवस्था की जाए। शासनादेश के अनुसार निजी विद्यालयों में तैनात शिक्षक और शिक्षिकाओं को सरकारी अध्यापकों की भांति सुविधाएं दी जाएं। साथ ही सरकारी विद्यालयों में अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और जनप्रतिनिधियों के बच्चों का पढ़ाना अनिवार्य किया जाए।
अन्यथा की स्थिति में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मनोज कुमार हंस, अजीत कुमार सिंह, बृज किशोर श्रीवास्तव, मनोज कुमार श्रीवास्तव, विजय शंकर, संजीव कुमार सिंह, राकेश मिश्रा, शिवाकांत यादव, राजेश सिंह, अजय कुमार सिंह, सुभाष चंद्र राय, अश्वनी कुमार दूबे, अनिल राय, नीरज मौर्या, गोरख नाथ वर्मा आदि मौजूद थे।