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जेपी के नाम पर बलिया में बहुत कुछ लेकिन व्यवस्था बदहाल

Fri, 07 Oct 2022 11:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 11:06 PM IST
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A lot in Ballia in the name of JP but the system is in bad shape
जयप्रकाश नगर। जिले के पूर्वी छोर पर स्थित जयप्रकाश नगर (सिताबदियारा) से ही समाजवाद की शुद्ध खुशबू जयप्रकाश नारायण के रूप में इसी धरती से निकली और पूरे देश में अपना सुगंध बिखेरने लगी। सिताबदियारा का जयप्रकाशनगर वह स्थान है, जहां संपूर्ण क्रांति के अग्रज और समाजवाद आंदोलन के प्रणेता रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने जन्म लिया और देश को एक नई दिशा देने का कार्य किया। जेपी की 43वीं पुण्यतिथि आज मनाई जाएगी।
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समाजवाद और सर्वोदय शब्द को भी जेपी ने ही परिभाषित किया। आचार्य विनोबा भावे सहित देश के कई महापुरुषों की यादें आज भी इस जयप्रकाश नगर में कैद हैं, लेकिन आज तक इस गांव को पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिला। जेपी के नाम पर तो वहां बहुत कुछ है लेकिन सभी सुविधाएं रोते हाल में हैं।
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लोकनायक जयप्रकाश नारायण के गांव जयप्रकाशनगर, सिताबदियारा के सपूत जयप्रकाश नारायण आजादी की जंग तो लड़े ही, आजाद देश में भी पनपती तानाशाही के विरुद्ध 75 वर्ष की अवस्था में भी उन्होंने मैदान संभाला। उनके सार्थक प्रयोगों का ही नतीजा रहा कि 1977 में सत्ता परिवर्तन भी हुआ था। यह बात अलग है कि उनकी मर्जी की सरकार बनने के बाद भी उनके अनुयायी उसी राह पर चलने लगे जिसके मुखालफत में 1974 में देश भर में आंदोलन चला था। उसी जेपी की विरासत को संजोने में देश में कोई नाम आता है तो वह हैं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर।
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उन्होंने जेपी के गांव सिताबदियारा के जयप्रकाशनगर को तीर्थ मानकर जेपी के पैतृक निवास के बगल में जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान का निर्माण 1986 में कराया। जेपी के गांव जाने के लिए बीएसटी बांध वाली सड़क का निर्माण भी 1982 में पूर्ण कराया। उससे पहले जेपी के गांव में आवागमन के कोई साधन नहीं थे। लोग पैदल ही टोला शिवनराय से गाड़ी पकड़कर बैरिया या बलिया जाते थे या फिर नाव से घाघरा और गंगा को पार कर छपरा और आरा जाते थे। अब सुविधाएं बढ़ चुकी हैं। इस गांव से अब लगभग 150 वाहन बैरिया, छपरा, बकुल्हा और पटना के लिए चलते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद भी जेपी निवास से लेकर स्मारक और परिसर बेहतर हाल में हैं। यहां के सचिव रविशंकर सिंह पप्पू के बदौलत वहां की हरियाली, दुर्लभ प्रजाति के पेड़ों को देख हर किसी का मन यूं ही खींचे चला जाता है। स्मारक के बगल में जेपी नारायण ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित है, जहां विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। पांच हजार से भी ज्यादा पुस्तकों का संग्रह रखने वाला प्रभावती पुस्तकालय भी जयप्रकाशनगर में मौजूद है जहां कई महापुरुषों द्वारा लिखित पुस्तकें मौजूद हैं।
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