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जिला अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों ने काटा बवाल

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Ballia
Ballia Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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बलिया। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बुधवार को सायंकाल शौचालय जाम होने की वजह से मरीजों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान तीमारदारों ने नये अस्पताल परिसर में जमकर बवाल काटा। हंगामे की खबर मिलने के बाद मौके पर पहुंचीं नर्स और वार्ड ब्वाय ने उन्हें समझा-बुझाकर किसी तरह शांत कराया और सीएमएस को इसकी लिखित सूचना दी। लेकिन देर रात तक शौचालय की सफाई नहीं की गई थी।
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बुधवार को सायंकाल करीब चार बजे अचानक बच्चा वार्ड का शौचालय जाम हो गया। ऐसे में मरीज व उनके साथ मौजूद महिला तीमारदार आक्रोशित हो उठे। इस बीच पीड़ितों ने इसकी शिकायत चिकित्सकों से की, लेकिन उनकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इस पर तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर बवाल काटा। इस दौरान काफी देर तक हो-हल्ला मचा रहा। मरीज और उनके तीमारदारों के गुस्से को देख नर्स व वार्ड ब्वाय ने शौचालय जाम की लिखित शिकायत सीएमएस को दी। सीएमएस द्वारा शौचालय दुरुस्त कराने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। अस्पताल में शौचालय जाम होना कोई नयी बात नहीं थी। यहां आए दिन एक नयी समस्या जन्म लेती है। कुछ दिन पहले अस्पताल में जलापूर्ति का मेन पाइप फट गया था और चार दिनों तक मरीजों को पानी तक नहीं मिला था। इतना ही नहीं करीब दो महीने तक एक्स-रे प्लेट का टोटा रहा और मरीजों का शोषण होता रहा। अस्पताल में दवाएं तक मरीजों को नहीं मिल रही थी। एक समस्या को महकमा दूर करता है, तबतक दूसरी सामने आकर खड़ी हो जाती है।जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में कुल 20 मरीज भर्ती हैं। वार्ड में साफ-सफाई दुरुस्त न होने से वहां गंदगी पसरी हुई है। अस्पताल के अंदर और वार्ड में जहां-तहां कचरा पड़ा हुआ है। शौचालय व बाथरूम में सफाई न होने से दुर्गंध आ रही है। अस्पताल के अंदर पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। मरीजों को पानी के लिए दो और तीन मंजिले से नीचे आना पड़ता है। पुराने अस्पताल और महिला अस्पताल में लगा आरओ भी खराब है। ऐसे में मरीजों को शुद्ध पानी पीने के लिए बोतल खरीदना पड़ रहा है। इस संबंध में दुबहर निवासी प्रभावती देवी, जमालपुर निवासी भोला यादव, शशिकांत, मुकेश तिवारी, गोपाल साहनी आदि ने बताया कि यहां मरीजों की दुर्गति हो रही है और जिले के आला अफसर से लेकर नेता तक खामोश हैं।
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