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वेतन न मिलने से शिक्षकों की दिवाली फीकी
Ballia
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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बलिया। जिले के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षणेतर कर्मचारियों का परिवार धनतेरस पर मायूस रहा। आला अफसरों के आश्वासन के बावजूद बकाए वेतन का भुगतान नहीं होने से लोग धनतेरस पर खरीददारी नहीं कर सके। इससे शिक्षक-शिक्षणेतर कर्मचारियों की दीपावली फीकी रहेगी।
जिले के शिक्षक-शिक्षणेतर कर्मचारियों के सरप्लस जांच के नाम गत 14 माह से वेतन बाधित है। दशहरा के साथ ही दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी आंदोलन के बीच ही बीत रहा है। इसे लेकर शिक्षक/ शिक्षणेतर कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले वर्तमान में संघर्षरत हैं। बावजूद उनके वेतन के भुगतान की कोई आशा नहीं दिख रही है। वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों के परिवार में धनतेरस पर मायूसी छायी रही। इसी सदंर्भ में बात करते हुए बच्चूराम हीरालाल उच्च माध्यमिक विद्यालय छाता में शिक्षक के पद में तैनात जितेंद्र राय का कहना है कि शासन व प्रशासन के संवेदना शून्यता के चलते ऐसी नौबत आ गई है कि हिंदू पर्वों पर उल्लास की जगह मायूसी महसूस हो रही है। शिक्षक जगदीश सिंह का कहना है कि शासन स्तर से शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का धैर्य एवं सहिष्णुता की परीक्षा ली जा रही है। कहा कि उन अधिकारियों को सोचना चाहिए कि जो हाल शिक्षकोें का है, यदि वहीं हाल वेतन रोकने वालों का होता तो उनको तथा उनके बच्चों को कैसा महसूस होता?
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जिले के शिक्षक-शिक्षणेतर कर्मचारियों के सरप्लस जांच के नाम गत 14 माह से वेतन बाधित है। दशहरा के साथ ही दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी आंदोलन के बीच ही बीत रहा है। इसे लेकर शिक्षक/ शिक्षणेतर कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले वर्तमान में संघर्षरत हैं। बावजूद उनके वेतन के भुगतान की कोई आशा नहीं दिख रही है। वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों के परिवार में धनतेरस पर मायूसी छायी रही। इसी सदंर्भ में बात करते हुए बच्चूराम हीरालाल उच्च माध्यमिक विद्यालय छाता में शिक्षक के पद में तैनात जितेंद्र राय का कहना है कि शासन व प्रशासन के संवेदना शून्यता के चलते ऐसी नौबत आ गई है कि हिंदू पर्वों पर उल्लास की जगह मायूसी महसूस हो रही है। शिक्षक जगदीश सिंह का कहना है कि शासन स्तर से शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का धैर्य एवं सहिष्णुता की परीक्षा ली जा रही है। कहा कि उन अधिकारियों को सोचना चाहिए कि जो हाल शिक्षकोें का है, यदि वहीं हाल वेतन रोकने वालों का होता तो उनको तथा उनके बच्चों को कैसा महसूस होता?
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