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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट!
Updated Thu, 04 Jan 2018 11:01 PM IST
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बलिया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।। इंटरव्यू के दो माह बाद भी चयन सूची जारी नहीं हो सकी है। जिसकी वजह से इन्हें बैंकों को नहीं भेजा जा सका। सूत्रों की माने तो आवेदनकर्ताओं से सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर पत्रावलियों को लटकाया जाना आम बात है।
बेरोजगारों को रोजगार देने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के क्रियान्वयन को लेकर अफसर गंभीर नहीं हैं। अक्तूबर महीने में खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से योजना के तहत आवेदन मांगे गए थे। इसके लिए कुल 332 बेरोजगारों ने विभिन्न विभागों के माध्यम से आवेदन जमा किए। इसके बाद विभाग की ओर से छठ पूजा के दौरान ही इंटरव्यू कराया गया। हालांकि यह भी महज औपचारिता ही रही। आलम यह रहा कि कमेटी के कई सदस्य तक उपस्थित नहीं हो सके थे और 50 फीसदी ही आवेदनकर्ता भी उपस्थित हुए। इसका खुलासा भी अमर उजाला ने 26 अक्तूबर को किया था। लेकिन इसके बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे रहे। लेकिन साक्षात्कार के दो माह बाद भी संबंधित विभाग की ओर से चयन सूची जारी नहीं की गई है। लाभार्थियों मनियर के सिंटू तिवारी, सोहांव की जागृति राय, नवानगर की सिंधु आदि की मानें तो खादी ग्रामोद्योग विभाग में बाबू से लेकर साहब तक पत्रावलियों को बैंक में भेजने के लिए सुविधा शुल्क की मांग कर रहे हैं। इसके चलते ही विभागीय अधिकारी की ओर से पत्रावलियों को लटकाया जा रहा।
कोट
इंटरव्यू के बाद अन्य कागजी कार्रवाई के लिए आवेदनकर्ताओं को बुलाया जाता है। इस तरह का आरोप गलत है। पत्रावलियों को बैंक में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
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एस कुमार, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी
कोट
खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से चयन सूची जारी करने की सूचना दी गई है। इस मामले में पुन: रिपोर्ट मांगी जाएगी। सुविधा शुल्क मांगने की शिकायत किसी आवेदनकर्ता की ओर से नहीं मिली है, अगर मिली तो जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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बेरोजगारों को रोजगार देने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के क्रियान्वयन को लेकर अफसर गंभीर नहीं हैं। अक्तूबर महीने में खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से योजना के तहत आवेदन मांगे गए थे। इसके लिए कुल 332 बेरोजगारों ने विभिन्न विभागों के माध्यम से आवेदन जमा किए। इसके बाद विभाग की ओर से छठ पूजा के दौरान ही इंटरव्यू कराया गया। हालांकि यह भी महज औपचारिता ही रही। आलम यह रहा कि कमेटी के कई सदस्य तक उपस्थित नहीं हो सके थे और 50 फीसदी ही आवेदनकर्ता भी उपस्थित हुए। इसका खुलासा भी अमर उजाला ने 26 अक्तूबर को किया था। लेकिन इसके बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे रहे। लेकिन साक्षात्कार के दो माह बाद भी संबंधित विभाग की ओर से चयन सूची जारी नहीं की गई है। लाभार्थियों मनियर के सिंटू तिवारी, सोहांव की जागृति राय, नवानगर की सिंधु आदि की मानें तो खादी ग्रामोद्योग विभाग में बाबू से लेकर साहब तक पत्रावलियों को बैंक में भेजने के लिए सुविधा शुल्क की मांग कर रहे हैं। इसके चलते ही विभागीय अधिकारी की ओर से पत्रावलियों को लटकाया जा रहा।
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इंटरव्यू के बाद अन्य कागजी कार्रवाई के लिए आवेदनकर्ताओं को बुलाया जाता है। इस तरह का आरोप गलत है। पत्रावलियों को बैंक में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
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एस कुमार, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी
कोट
खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से चयन सूची जारी करने की सूचना दी गई है। इस मामले में पुन: रिपोर्ट मांगी जाएगी। सुविधा शुल्क मांगने की शिकायत किसी आवेदनकर्ता की ओर से नहीं मिली है, अगर मिली तो जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी