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पंचतत्व में विलीन हुई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:01 AM IST
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रसड़ा। नगर के आजाद कालोनी निवासी स्वतंत्रा संग्राम सेनानी कन्हैया प्रसाद वर्मा (98) की अवस्था में लंबी बीमारी के बाद गुरूवार की रात्रि में 10 बजे मऊ के निजी अस्पताल में अंतिम सांस लिया। उनके निधन के समाचार मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। उनके पार्थिव शरीर का रसड़ा स्थित आवास पर शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ तहसीलदार शिवधराम राम चौरिया, प्रभारी निरीक्षक जगदीश चंद्र यादव, राजस्व निरीक्षक विक्रम सिंह की उपस्थिति में उन्हें गाड आफ आनर दिया गया। क्षेत्र के समाजसेवियों बुद्धिजीविओं राजनैतिक दलों के लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दिया। शव यात्रा में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। बाद में उनके परिजनों द्वारा अंतिम दाह-संस्कार के लिए मणिकणिका घाट वाराणसी में अन्तिम संस्कार किया गया। स्व. वर्मा क चजना जन्म रड़ा कस्बे के एक सामान्य परिवार में वर्ष 1919 में हुआ था। उन्होंने आजादी की लड़ाई में वर्ष 1942 में छेड़े गए भारत छोड़ों आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। जिसके अंतर्गत उन्हें 5 सितम्बर 1942 में गिरफ्तार कर बलिया कारागार भेजा गया जहां न्यायालय ने उन्हें पांच वर्ष का कारावस व 15 वेतों से सजा दी गई। तत्पश्चात उन्हें बलिया कारागार से रायबरेली जेल भेजा गया। जेल यात्रा के अंतर्गत उन्हें 15 वेतों की सजा दी गई थी जिसके निशान उनके शरीर पर अंतिम समय तक बना रहा। स्व. वर्मा आजादी के पश्चात ही राष्ट्र सेवा में लगे रहे जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाधी द्वारा ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया था। वे समाज सेवा में भी सक्रिय रहे। कांग्रेस संगठन में रहते हुए स्थानीय स्वर्णकार संघ के संस्थापक अध्यक्ष रहे। उनके भरे-पूरे परिवार में तीन पुत्र और दो पुत्रियां है। जिसमें एक पुत्र देवेंद्र कुमार वर्मा पूर्वांचल बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।
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