{"_id":"5ae611fd4f1c1b9e098b73cd","slug":"61525027325-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच टीम को भवन निर्माण में मिली कई खामियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच टीम को भवन निर्माण में मिली कई खामियां
Updated Mon, 30 Apr 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया (बैरिया)। राजकीय बालिका इंटर कालेज के भवन निर्माण की गुणवत्ता की जांच में शनिवार को पहुंची तीन सदस्यीय टीम को कई खामियां मिली। टीम की माने तो प्रथम दृष्टया काम में कमी पायी गयी है। वहीं वर्क मेंट्री कंट्रोल नहीं किया गया है। जांच टीम ने ईंट व मसाले के नमूने को जांच के लिए भेज दिया।
प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा अपर सचिव संजय अग्रवाल द्वारा चार माह पूर्व बैरिया स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज के भवन निर्माण की गुणवत्ता के जांच का आदेश जिलाधिकारी को दिया गया था। जांच में बिलंब के कारण शासन ने निर्माणाधीन विद्यालय के विकास कार्य का 63 लाख रुपया रोक दिया। धन के अभाव मेेें 35 से 40 फीसदी विकास कार्य अधर में लटका हुआ है। हालांकि जैसे-तैसे जिला प्रशासन ने दो अक्टूबर 2017 को विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य शुरू करा दिया। निर्माणाधीन राजकीय बालिका इंटर कालेज में कुल दो करोड़ 24 लाख 57 हजार रुपये में निर्माण कार्य के सापेक्ष एक करोड़ 61 लाख नौ हजार रुपया खर्च किया जा चुका है। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव ने गुणवत्ता के जांच के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिया था। जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एमपी चौरसिया व एसबी कनौजिया के अलावे आरईएस के अधिशासी अभियंता बीरपाल राजपूत सहित तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर गुणवत्ता की जांच का आदेश दिया था। लेकिन जांच पूर्ण नहीं की गई। जांच नहीं किये जाने पर इंटक अध्यक्ष विनोद सिंह के पत्रक पर जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने 14 अप्रैल को पहले से बनी जांच टीम को एक सप्ताह के अंदर गुणवत्ता जांच कर रिपोर्ट मांगा है। जिसके बाद जांच टीम ने लगातार दो दिनों तक जीजीआईसी के निर्माणाधीन भवन के गुणवत्ता की जांच किया।
अधिशासी अभियंता पीडब्लूडी एमपी चौरसिया ने कहा कि राजकीय बालिका इंटर कालेज की जांच तीन सदस्यीय टीम द्वारा किया गया है, जांच में प्रथम दृष्टया वर्क में कमी पाई गई है। वर्क मेंट्री कंट्रोल नहीं किया गया है। गुणवत्ता में भी कई कमी पाई गई है। ईट व मसाले को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। हम अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौप देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा अपर सचिव संजय अग्रवाल द्वारा चार माह पूर्व बैरिया स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज के भवन निर्माण की गुणवत्ता के जांच का आदेश जिलाधिकारी को दिया गया था। जांच में बिलंब के कारण शासन ने निर्माणाधीन विद्यालय के विकास कार्य का 63 लाख रुपया रोक दिया। धन के अभाव मेेें 35 से 40 फीसदी विकास कार्य अधर में लटका हुआ है। हालांकि जैसे-तैसे जिला प्रशासन ने दो अक्टूबर 2017 को विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य शुरू करा दिया। निर्माणाधीन राजकीय बालिका इंटर कालेज में कुल दो करोड़ 24 लाख 57 हजार रुपये में निर्माण कार्य के सापेक्ष एक करोड़ 61 लाख नौ हजार रुपया खर्च किया जा चुका है। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव ने गुणवत्ता के जांच के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिया था। जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एमपी चौरसिया व एसबी कनौजिया के अलावे आरईएस के अधिशासी अभियंता बीरपाल राजपूत सहित तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर गुणवत्ता की जांच का आदेश दिया था। लेकिन जांच पूर्ण नहीं की गई। जांच नहीं किये जाने पर इंटक अध्यक्ष विनोद सिंह के पत्रक पर जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने 14 अप्रैल को पहले से बनी जांच टीम को एक सप्ताह के अंदर गुणवत्ता जांच कर रिपोर्ट मांगा है। जिसके बाद जांच टीम ने लगातार दो दिनों तक जीजीआईसी के निर्माणाधीन भवन के गुणवत्ता की जांच किया।
विज्ञापन
अधिशासी अभियंता पीडब्लूडी एमपी चौरसिया ने कहा कि राजकीय बालिका इंटर कालेज की जांच तीन सदस्यीय टीम द्वारा किया गया है, जांच में प्रथम दृष्टया वर्क में कमी पाई गई है। वर्क मेंट्री कंट्रोल नहीं किया गया है। गुणवत्ता में भी कई कमी पाई गई है। ईट व मसाले को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। हम अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौप देंगे।
विज्ञापन