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भीतरघात व कार्यकर्ताओं के असंतोष ने बिगाड़ा परिणाम!
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:02 AM IST
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बलिया। निकाय चुनाव में कमोवेश सभी पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा है। इसे कार्यकर्ताओं में असंतोष कहें या फिर भीतरघात। हालांकि विधानसभा चुनावों के आधार पर देखें तो सात के सापेक्ष बसपा व सपा एक सीट मिली थी तो निकाय चुनाव में 10 के सापेक्ष एक-एक सीट मिली है। हालांकि नुकसान की बात करें तो इस आधार पर भाजपा को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। यहां तक कि राज्य मंत्री के विस क्षेत्र के चितलबड़ागांव नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट भी बसपा की झोली में डालकर पूर्व मंत्री ने अपनी हार का कसक मिटा लिया।
बताया जाता है कि निकाय चुनाव में भाग्य आजमाइश करने के लिए सभी दलों से टिकट पाने के लिए एक से अधिक दावेदार थे। लेकिन नामांकन के कुछ दिनों पहले पार्टियों की ओर से टिकट फाइनल किया। आलम यह रहा कि इसके बाद कुछ ने बागी तेवर अपनाए तो कुछ ने भीतरघात करने का मन बना लिया। इसके अलावा टिकट बंटवारें को लेकर कई निकायों में पार्टी कार्यकर्ताओं में रोष रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जीते कई निर्दलीय प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो किसी न किसी दल से टिकट मांग चुके थे।
कयास लगाए जा रहे हैं जहां पार्टी पदाधिकारियों व नेताओं ने कार्यकताओं की मंशा के विपरीत प्रत्याशी उतारा वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। कयास यह भी लगाए जाते हैं कि पार्टियों से टिकट नहीं पाने वाले दावेदारों ने एकजुट होकर पार्टी को सबक सिखाने का काम किया।इससे अलग यह भी सच है कि कई दलों का निकाय चुनाव में सूपड़ा ही साफ हो गया है। हालांकि कई दल चुनाव में सभी निकायों में प्रत्याशी भी नहीं उतार सके थे।
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बताया जाता है कि निकाय चुनाव में भाग्य आजमाइश करने के लिए सभी दलों से टिकट पाने के लिए एक से अधिक दावेदार थे। लेकिन नामांकन के कुछ दिनों पहले पार्टियों की ओर से टिकट फाइनल किया। आलम यह रहा कि इसके बाद कुछ ने बागी तेवर अपनाए तो कुछ ने भीतरघात करने का मन बना लिया। इसके अलावा टिकट बंटवारें को लेकर कई निकायों में पार्टी कार्यकर्ताओं में रोष रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जीते कई निर्दलीय प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो किसी न किसी दल से टिकट मांग चुके थे।
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कयास लगाए जा रहे हैं जहां पार्टी पदाधिकारियों व नेताओं ने कार्यकताओं की मंशा के विपरीत प्रत्याशी उतारा वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। कयास यह भी लगाए जाते हैं कि पार्टियों से टिकट नहीं पाने वाले दावेदारों ने एकजुट होकर पार्टी को सबक सिखाने का काम किया।इससे अलग यह भी सच है कि कई दलों का निकाय चुनाव में सूपड़ा ही साफ हो गया है। हालांकि कई दल चुनाव में सभी निकायों में प्रत्याशी भी नहीं उतार सके थे।
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