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20 दिन में सवा करोड़ की दारू गटक गए शराबी
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 26 Apr 2016 06:46 PM IST
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वाइन, ड्राइ डे
- फोटो : फाइल फोटो
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बिहार में शराब पर प्रतिबंध लगने के बाद यूपी के सीमावर्ती इलाके में इसकी खपत करीब 4 गुना बढ़ गई है। भरौली गोलंबर की एक दूकान से महज 20 दिन में ही सवा करोड़ की शराब बिकी है। यहां से शराब खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है।
जबकि पहले हालत ये थी कि बिहार की सस्ती शराब यूपी में लाकर बेची जाती थी और सीमावर्ती दूकानदार घाटे में रहते थे। बार्डर पर चलने वाली शराब की दूकानें अब जिले में एक अलग स्थान बनाती जा रही हैं।
एक अप्रैल से देशी और छह अप्रैल से अंग्रेजी शराब बंद होने के बाद बिहार सीमा से सटे भरौली और कोटवां नारायणपुर स्थित देशी-अंग्रेजी और बियर की दूकानों की बिक्री इतनी बढ़ गई है कि महज 20 दिनों में सवा करोड़ की दारू शराबी गटक चुके हैं।
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जबकि पिछले दो दशक की बिक्री पर नजर डालें तो इन दूकानों पर महीने में 35000 हजार से अधिक की कभी बिक्री नहीं हुई थी। ऐसे में बिक्री में पूरा योगदान बिहार का है। इन दिनों लगन ने इस धंधे में और जान फूंक दी है। बिहार से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर शराबी भरौली पहुंच रहे हैं। ऐसे में ऑटो-रिक्शेवालों की कमाई भी बढ़ गई है।
उजियार व कोटवां नारायणपुर के शराब की दूकानों में बिक्री में आठ गुना वृद्धि बताई जा रही है। बिहार में पूर्ण शराब बंदी की सख्ती का ही नतीजा है कि भरौली में शराब की भारी खपत हो रही है।
31 मार्च के आस-पास गांवों के शराबी भरौली के बजाय बक्सर में शराब पीने जाते थे। क्योंकि यूपी की अपेक्षा बिहार में शराब सस्ती मिलती थी। लेकिन बिहार में शराब बंदी के बाद दारूबाजों के लिए यह इलाका लुभा रहा है। 31 मार्च तक बिहार से यूपी में आने वाली शराब अब यूपी से बिहार में जानी शुरू हो गई है। बिहार से सटे इलाकों में शराब तस्करी नाव आदि से शुरू हो गई है।
वीर कुंवर सिंह सेतु से शराब की तस्करी न हो इसलिए पुल के पास ही पुलिस कैंप कर वाहनों की सघन चेकिंग कर रही है। पहले देशी शराब की बिक्री तीन हजार से चार हजार की थी। यह अब सात हजार से 80 हजार पहुंच गया है। बीयर की पहले दस से 15 हजार की बिक्री होती थी, जो अब एक लाख से ऊपर है। अंग्रेजी शराब की बिक्री दस से 12 हजार थी। वह अब साढ़े तीन से चार लाख पहुंच गया है। अब तो शराब के ठेकेदारों द्वारा भरौली में दूकानों को बड़े रूप देने के कार्य में जुट गए हैं। लेकिन अब भी आबकारी विभाग 25 प्रतिशत ही बिक्री में वृद्धि बता रहा है।
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जबकि पहले हालत ये थी कि बिहार की सस्ती शराब यूपी में लाकर बेची जाती थी और सीमावर्ती दूकानदार घाटे में रहते थे। बार्डर पर चलने वाली शराब की दूकानें अब जिले में एक अलग स्थान बनाती जा रही हैं।
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एक अप्रैल से देशी और छह अप्रैल से अंग्रेजी शराब बंद होने के बाद बिहार सीमा से सटे भरौली और कोटवां नारायणपुर स्थित देशी-अंग्रेजी और बियर की दूकानों की बिक्री इतनी बढ़ गई है कि महज 20 दिनों में सवा करोड़ की दारू शराबी गटक चुके हैं।
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जबकि पिछले दो दशक की बिक्री पर नजर डालें तो इन दूकानों पर महीने में 35000 हजार से अधिक की कभी बिक्री नहीं हुई थी। ऐसे में बिक्री में पूरा योगदान बिहार का है। इन दिनों लगन ने इस धंधे में और जान फूंक दी है। बिहार से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर शराबी भरौली पहुंच रहे हैं। ऐसे में ऑटो-रिक्शेवालों की कमाई भी बढ़ गई है।
उजियार व कोटवां नारायणपुर के शराब की दूकानों में बिक्री में आठ गुना वृद्धि बताई जा रही है। बिहार में पूर्ण शराब बंदी की सख्ती का ही नतीजा है कि भरौली में शराब की भारी खपत हो रही है।
31 मार्च के आस-पास गांवों के शराबी भरौली के बजाय बक्सर में शराब पीने जाते थे। क्योंकि यूपी की अपेक्षा बिहार में शराब सस्ती मिलती थी। लेकिन बिहार में शराब बंदी के बाद दारूबाजों के लिए यह इलाका लुभा रहा है। 31 मार्च तक बिहार से यूपी में आने वाली शराब अब यूपी से बिहार में जानी शुरू हो गई है। बिहार से सटे इलाकों में शराब तस्करी नाव आदि से शुरू हो गई है।
वीर कुंवर सिंह सेतु से शराब की तस्करी न हो इसलिए पुल के पास ही पुलिस कैंप कर वाहनों की सघन चेकिंग कर रही है। पहले देशी शराब की बिक्री तीन हजार से चार हजार की थी। यह अब सात हजार से 80 हजार पहुंच गया है। बीयर की पहले दस से 15 हजार की बिक्री होती थी, जो अब एक लाख से ऊपर है। अंग्रेजी शराब की बिक्री दस से 12 हजार थी। वह अब साढ़े तीन से चार लाख पहुंच गया है। अब तो शराब के ठेकेदारों द्वारा भरौली में दूकानों को बड़े रूप देने के कार्य में जुट गए हैं। लेकिन अब भी आबकारी विभाग 25 प्रतिशत ही बिक्री में वृद्धि बता रहा है।