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ज्ञान, वैराग्य और सत्कर्म से ही सु:खी जीवन संभव

Sat, 03 Jun 2017 11:03 PM IST
Updated Sat, 03 Jun 2017 11:03 PM IST
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ज्ञान, वैराग्य और सत्कर्म से ही सु:खी जीवन संभव
बलिया। क्षेत्र के बंधुचक गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में चौथे दिन शुक्रवार की देरशाम पंडित आरएन पांडेय ने भागवत महात्म पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। जिससे क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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कथा के दौरान श्री पांडेय ने कहा कि दैविक व भौतिक तीनों तापों का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को जो निष्काम भाव से जपता है या कथा का श्रवण करता है, वह अनित्य भव सागररूपी संसार से पार हो जाता है। जैसे अजामिल प्रहलाद गिद्ध गड़ीका, सबरी आदि मुक्त हो गए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को सु:खी बनाने के लिए मनुष्य के अंदर ज्ञान, वैराग्य, सत्कर्म और भक्ति का होना जरूरी है। उन्होंने श्रीमद् भागवत महापुराण को समाज के लिए संजीवनी बताया। कहा कि भागवत की कथा सभी को सहारा देकर उपर उठा लेती है। पवित्र कर देती है। दुर्जन को भी सज्जन और नास्तिक को भी आस्तिक बना देती है। कथा के दौरान भारतीय गायकों ने ‘भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती..’ सुनाकर क्षेत्र व गांवों की कल्याण की कामना की। यज्ञ के यजमान विद्यासागर उपाध्याय, पूर्व प्रधान शिव कुमार पांडेय, पारस चौरसिया, पूर्व प्रधान यदुनाथ पांडेय, रमाकांत यादव, रंजीत गिरी, जगन्नाथ पांडेय, विजयशंकर यादव आदि मौजूद रहे।
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