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पीएमएफएमई के तहत जिले में स्थापित होंगे 144 लघु उद्योग
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बलिया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) अब जिले में भी संचालित होगी। शासन की ओर से जिले में कुल 144 उद्योग स्थापित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए उद्यान विभाग को नोडल बनाया गया है।
एक जनपद एक उत्पाद के तहत मसूर से संबंधित लघु उद्योग को वरीयता दी जाएगी और नवीन उद्योग स्थापित करने व उच्चीकरण के लिए क्षेत्र तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, अन्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी स्थापित करने को बढ़ावा दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण के दौरान लॉक डाउन की वजह से लोगों को बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ा और इसका असर उद्योगों पर भी पड़ा। कई उद्योगों के प्रभावित होने के कारण राजस्व की भी कमी हुई। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की शुरुआत की। योजना को शुरू करने का मुख्य उदेश्य यह है कि बेरोजगारों को रोजगार का अवसर मिल सके। हालांकि यह योजना दो वर्ष पहले लागू हुई थी लेकिन अब जिले में इस योजना का संचालन किया जाएगा। छोटे और लघु व्यवसाय करने वाले उद्यमियों को अपने व्यवसाय और राजस्व को आगे बढ़ाने के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा।
विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा अनुदान
मसूर से संबंधित लघु उद्योग को वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा, दुग्ध प्रसंस्करण, जैम, जेली, अचार, बेकरी, तेल का कोल्हू, आटा चक्की, मेंथा आसवान इकाई के उच्चीकरण और नए उद्योग का अनुदान मिलेगा। लाभार्थी को उद्योग स्थापित करने के लिए बतौर अंश पूंजी 10 फीसदी देना होगा। शेष धनराशि बैंक ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना में लाभार्थी को परियोजना लागत का 35 फीसदी और अधिकतम 10 लाख तक अनुदान देने का प्रावधान है।
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यह होगी पात्रता
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत आवेदन के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। एक परिवार का केवल एक व्यक्ति वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु पात्र होगा।
पीएमएफएमई के तहत जिले में लघु उद्योग स्थापित करने के लिए शासन की ओर से लक्ष्य प्राप्त हो गया है। इसे लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है। आवेदकों को अनुदान भी दिया जाएगा। - शीतला प्रसाद वर्मा, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी, बलिया
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एक जनपद एक उत्पाद के तहत मसूर से संबंधित लघु उद्योग को वरीयता दी जाएगी और नवीन उद्योग स्थापित करने व उच्चीकरण के लिए क्षेत्र तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, अन्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी स्थापित करने को बढ़ावा दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण के दौरान लॉक डाउन की वजह से लोगों को बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ा और इसका असर उद्योगों पर भी पड़ा। कई उद्योगों के प्रभावित होने के कारण राजस्व की भी कमी हुई। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की शुरुआत की। योजना को शुरू करने का मुख्य उदेश्य यह है कि बेरोजगारों को रोजगार का अवसर मिल सके। हालांकि यह योजना दो वर्ष पहले लागू हुई थी लेकिन अब जिले में इस योजना का संचालन किया जाएगा। छोटे और लघु व्यवसाय करने वाले उद्यमियों को अपने व्यवसाय और राजस्व को आगे बढ़ाने के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा अनुदान
मसूर से संबंधित लघु उद्योग को वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा, दुग्ध प्रसंस्करण, जैम, जेली, अचार, बेकरी, तेल का कोल्हू, आटा चक्की, मेंथा आसवान इकाई के उच्चीकरण और नए उद्योग का अनुदान मिलेगा। लाभार्थी को उद्योग स्थापित करने के लिए बतौर अंश पूंजी 10 फीसदी देना होगा। शेष धनराशि बैंक ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना में लाभार्थी को परियोजना लागत का 35 फीसदी और अधिकतम 10 लाख तक अनुदान देने का प्रावधान है।
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यह होगी पात्रता
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत आवेदन के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। एक परिवार का केवल एक व्यक्ति वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु पात्र होगा।
पीएमएफएमई के तहत जिले में लघु उद्योग स्थापित करने के लिए शासन की ओर से लक्ष्य प्राप्त हो गया है। इसे लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है। आवेदकों को अनुदान भी दिया जाएगा। - शीतला प्रसाद वर्मा, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी, बलिया