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सुरक्षा के मामले में असुरक्षित है बालिका संरक्षण गृह
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:52 PM IST
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बलिया। मुजफ्फरपुर और देवरिया में बालिका संरक्षण गृह पर हुए कांड ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद से बालिका संरक्षण गृह की सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट तथा महिला आयोग द्वारा ऐसे संरक्षण गृह की सुरक्षा प्रणाली तथा हर बिंदू पर राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की गई है। ऐसे में जनपद के निधरिया स्थित एक मात्र राजकीय बालिका संरक्षण गृह की रिपोर्ट तैयार करना जिला प्रशासन ने शुरू कर दिया है।
निधरिया स्थित राजकीय बालिका संरक्षण गृह की ग्राउंड रिपोर्ट की बात करें तो मौजूदा समय में 64 बालिकाएं यहां मौजूद हैं। जबकि मानक 50 बालिकाओं की ही है। ऐसे में 14 लड़कियां यहां अधिक है। सुरक्षा की दृष्टिकोण से यहां 12 होमगार्ड जिसमें छह पुरूष तथा छह महिला तैनात हैं। हालांकि यह प्रबंध पहले से ही था। लेकिन देवरिया और मुजफ्फरपुर कांड के बाद से यहां हर दूसरे-तीसरे दिन पर अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके साथ ही पुलिस की भी रूटीन ड्यूटी लगाई गई है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि मानक से 14 बालिकाएं भले ही अधिक हों। लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं है, चिंता की बात यहां की सुरक्षा को लेकर है। क्योंकि यह जगह काफी वीरान है। आसपास खेती का क्षेत्र होने के कारण यहां डर बना रहता है। इसके साथ ही कुछ अराजक तत्वों का अक्सर बगल के गोदाम के दीवार पर बैठना भी डर का सबब है। लिहाजा यहां बराबर पुलिस की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। इसके साथ ही संरक्षण गृह तक जाने के लिए कोई समुचित मार्ग नहीं है तथा लाइट की भी असुविधा है। तमाम खामियों के बाबत उच्चाधिकारियों केे पत्र भेजा गया है।
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निधरिया स्थित राजकीय बालिका संरक्षण गृह की ग्राउंड रिपोर्ट की बात करें तो मौजूदा समय में 64 बालिकाएं यहां मौजूद हैं। जबकि मानक 50 बालिकाओं की ही है। ऐसे में 14 लड़कियां यहां अधिक है। सुरक्षा की दृष्टिकोण से यहां 12 होमगार्ड जिसमें छह पुरूष तथा छह महिला तैनात हैं। हालांकि यह प्रबंध पहले से ही था। लेकिन देवरिया और मुजफ्फरपुर कांड के बाद से यहां हर दूसरे-तीसरे दिन पर अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके साथ ही पुलिस की भी रूटीन ड्यूटी लगाई गई है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि मानक से 14 बालिकाएं भले ही अधिक हों। लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं है, चिंता की बात यहां की सुरक्षा को लेकर है। क्योंकि यह जगह काफी वीरान है। आसपास खेती का क्षेत्र होने के कारण यहां डर बना रहता है। इसके साथ ही कुछ अराजक तत्वों का अक्सर बगल के गोदाम के दीवार पर बैठना भी डर का सबब है। लिहाजा यहां बराबर पुलिस की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। इसके साथ ही संरक्षण गृह तक जाने के लिए कोई समुचित मार्ग नहीं है तथा लाइट की भी असुविधा है। तमाम खामियों के बाबत उच्चाधिकारियों केे पत्र भेजा गया है।
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