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Ballia News: 130 करोड़ से 4049 किमी जर्जर तारों को बदला जाएगा
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बलिया। जिले में रिवैंप योजना के तहत 130 करोड़ से बिजली व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का कार्य जल्द शुरू होगा। इसकी कवायद तेज हो गई है। शासन ने इसके लिए कार्यदायी एजेंसी भी नामित कर दिया है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के कुल 4049 किमी लंबाई में तारों को बदलने का काम होगा। इस कार्य के पूरा होने के बाद जिले की विद्युत आपूर्ति में सुधार होगा।
जनपद के कई ऐसे इलाके हैं जहां विद्युत उपकेंद्र को लंबी दूरी तक बिजली की आपूर्ति करनी पड़ती है। लंबी दूरी होने के कारण छोटे फॉल्ट होने पर भी उसे दुरुस्त करने में अधिक समय लग जाता है। इसके अलावा तारों की लंबाई अधिक होने के कारण लाइन लॉस भी अधिक होता है। कई इलाकों में जर्जर तारों के टूटने के कारण आए दिन बिजली की आपूर्ति बाधित होती है और लोगों को कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। रिवैंप योजना में जिले को शामिल किया गया है।
रिवैंप योजना के प्रथम चरण में जर्जर तारों को बदलने के लिए शासन ने जिले के लिए 130 करोड़ से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है। इस कार्य के लिए शासन ने मोंटी कार्लो को बतौर कार्यदायी एजेंसी नामित किया है। पहले चरण में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के कुल 3291 किमी लंबाई के एबी केबल बदले जाएंगे। इसके अलावा, 33 केवी के 149 किमी और 11 केवी के 609 किमी लंबाई के जर्जर तारों को बदला जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस माह कार्य शुरू कराया जाएगा।
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कुल परियोजना करीब 700 करोड़ की
रिवैंप के तहत पांच वर्षीय योजना वर्ष 2022-26 के लिए कार्ययोजना बनी है। इन पांच वर्षों में योजना में अलग-अलग कार्य किए जाएंगे। कुल परियोजना करीब 700 करोड़ की है। अब पहले चरण की शुरुआत होगी और इसके लिए शासन की ओर से धन भी जारी कर दिया गया है।
विद्युत अधीक्षण अभियंता आरके जैन ने बताया कि रिवैंप योजना में कई तरह के कार्य प्रस्तावित हैं। पहले चरण में जर्जर तारों को बदलने की कार्ययोजना स्वीकृत हुई है। पॉवर कॉरपोरेशन से कार्यदायी संस्था नामित हो चुकी है। जल्द ही कार्य शुरु कराया जाएगा।
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जनपद के कई ऐसे इलाके हैं जहां विद्युत उपकेंद्र को लंबी दूरी तक बिजली की आपूर्ति करनी पड़ती है। लंबी दूरी होने के कारण छोटे फॉल्ट होने पर भी उसे दुरुस्त करने में अधिक समय लग जाता है। इसके अलावा तारों की लंबाई अधिक होने के कारण लाइन लॉस भी अधिक होता है। कई इलाकों में जर्जर तारों के टूटने के कारण आए दिन बिजली की आपूर्ति बाधित होती है और लोगों को कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। रिवैंप योजना में जिले को शामिल किया गया है।
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रिवैंप योजना के प्रथम चरण में जर्जर तारों को बदलने के लिए शासन ने जिले के लिए 130 करोड़ से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है। इस कार्य के लिए शासन ने मोंटी कार्लो को बतौर कार्यदायी एजेंसी नामित किया है। पहले चरण में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के कुल 3291 किमी लंबाई के एबी केबल बदले जाएंगे। इसके अलावा, 33 केवी के 149 किमी और 11 केवी के 609 किमी लंबाई के जर्जर तारों को बदला जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस माह कार्य शुरू कराया जाएगा।
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कुल परियोजना करीब 700 करोड़ की
रिवैंप के तहत पांच वर्षीय योजना वर्ष 2022-26 के लिए कार्ययोजना बनी है। इन पांच वर्षों में योजना में अलग-अलग कार्य किए जाएंगे। कुल परियोजना करीब 700 करोड़ की है। अब पहले चरण की शुरुआत होगी और इसके लिए शासन की ओर से धन भी जारी कर दिया गया है।
विद्युत अधीक्षण अभियंता आरके जैन ने बताया कि रिवैंप योजना में कई तरह के कार्य प्रस्तावित हैं। पहले चरण में जर्जर तारों को बदलने की कार्ययोजना स्वीकृत हुई है। पॉवर कॉरपोरेशन से कार्यदायी संस्था नामित हो चुकी है। जल्द ही कार्य शुरु कराया जाएगा।