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कई महीनों से रतसर रजवहा से पानी हुआ गायब
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:47 PM IST
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बलिया। सरकार का दावा कि हर खेत की सिंचाई के लिए मुफ्त में पानी दिया जाएगा, लेकिन सरकारी अफसरों के कारण उनका यह दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। जुलाई का महीना शुरू हो गया है, अद्रा नक्षत्र भी पूर्ण होने जा रहा है। इसी नक्षत्र में किसानों के धान की रोपाई शुरू हो जाती है।
रतसर रजवाहा से निकलने वाली बसवरिया माइनर में विगत कई महीनों से पानी का दर्शन नहीं हो रहा है, जिसके कारण किसान जैसे-तैसे धान की नर्सरी तो तैयार कर लिए हैं। लेकिन अभी तक धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। इस नहर से करीब-करीब दर्जनों गांव जैसे करम्मर, बहेरिया, मठ करम्मर, जिगनी, नान्हागंज, बसवरिया आदि गांव के किसान अपनी सिंचाई करते हैं। किसानों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण किसान निराश बैठकर मोदी व योगी को कोस रहे हैं। पिछली सरकार से भी ये सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं है। किसान रामप्रवेश सिंह ने कहा कि यदि नहर में पानी नहीं आता है तो हम लोगों की खेती बड़ी मुश्किल हो जाएगी और यही रवैया रहा तो किसान धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। किसान दीवान यादव ने कहा कि इस सरकार में किसानों का सुनने वाला कोई नहीं है। हम लोग किसी तरह से अपनी धान की नर्सरी तो तैयार कर लिए हैं, लेकिन रोपाई के लिए हम लोग अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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रतसर रजवाहा से निकलने वाली बसवरिया माइनर में विगत कई महीनों से पानी का दर्शन नहीं हो रहा है, जिसके कारण किसान जैसे-तैसे धान की नर्सरी तो तैयार कर लिए हैं। लेकिन अभी तक धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। इस नहर से करीब-करीब दर्जनों गांव जैसे करम्मर, बहेरिया, मठ करम्मर, जिगनी, नान्हागंज, बसवरिया आदि गांव के किसान अपनी सिंचाई करते हैं। किसानों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण किसान निराश बैठकर मोदी व योगी को कोस रहे हैं। पिछली सरकार से भी ये सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं है। किसान रामप्रवेश सिंह ने कहा कि यदि नहर में पानी नहीं आता है तो हम लोगों की खेती बड़ी मुश्किल हो जाएगी और यही रवैया रहा तो किसान धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। किसान दीवान यादव ने कहा कि इस सरकार में किसानों का सुनने वाला कोई नहीं है। हम लोग किसी तरह से अपनी धान की नर्सरी तो तैयार कर लिए हैं, लेकिन रोपाई के लिए हम लोग अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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