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‘नेताजी’ का स्वागत स्थल बना माडल रेलवे स्टेशन
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बलिया। रेलवे कानून को ताख पर रखकर, आम आदमी को परेशानी में डालकर नेताजी को स्वागत करने के लिए लोग ढोल नगाड़े के साथ जुलूस की शक्ल में सीधे रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर जाकर धमाचौकड़ी करते हैं। यही नजारा शनिवार की सुबह रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर सुबह के लगभग नौ बजे देखने को मिला।
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर शनिवार को सुबह दर्जनों लोग ढोल, नगाड़े आदि के साथ पहुंच गए और एक नेताजी के स्वागत पर ढोल पीटते रहे। इससे यात्रियों की परेशानी भी साफ नजर आ रही थी। ढोल नगाड़े की आवाज को सुनकर यात्री कान में अंगुली डालने को विवश थे। वहीं प्लेटफार्म पर यात्रियों को आने-जाने में भी दिक्कतें हुई। यही नहीं तेज आवाज के कारण प्लेटफार्म पर ट्रेनों का जो एनाउंस होता है, वह भी सुनाई नहीं दे रहा था। कार्यकर्ताओं की धमाचौकड़ी ऐसी थी कि मानो बलिया रेलवे स्टेशन उन्हीं के लिए बनाया गया है, जबकि उस वक्त प्लेटफार्म पर जीआरपीएफ जवान भी थे लेकिन इसे रोकने की कवायद नहीं की गई। सवाल यह भी है कि प्लेटफार्म पर जितनी की संख्या में कार्यकर्ता प्रवेश किए थे, क्या उनके पास प्लेटफार्म टिकट था। इस संबंध में जीआरपी प्रभारी आरके मिश्र ने बताया कि रेलवे एक्ट का पालन कराने की जिम्मेदारी आरपीएफ की होती है। इस बाबत आरपीएफ प्रभारी विजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि कानूनन तो जुर्म है, लेकिन कभी-कभार शांति व्यवस्था को कायम रखने के लिए कुछ चीजों की अनदेखी करनी पड़ती है।
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर शनिवार को सुबह दर्जनों लोग ढोल, नगाड़े आदि के साथ पहुंच गए और एक नेताजी के स्वागत पर ढोल पीटते रहे। इससे यात्रियों की परेशानी भी साफ नजर आ रही थी। ढोल नगाड़े की आवाज को सुनकर यात्री कान में अंगुली डालने को विवश थे। वहीं प्लेटफार्म पर यात्रियों को आने-जाने में भी दिक्कतें हुई। यही नहीं तेज आवाज के कारण प्लेटफार्म पर ट्रेनों का जो एनाउंस होता है, वह भी सुनाई नहीं दे रहा था। कार्यकर्ताओं की धमाचौकड़ी ऐसी थी कि मानो बलिया रेलवे स्टेशन उन्हीं के लिए बनाया गया है, जबकि उस वक्त प्लेटफार्म पर जीआरपीएफ जवान भी थे लेकिन इसे रोकने की कवायद नहीं की गई। सवाल यह भी है कि प्लेटफार्म पर जितनी की संख्या में कार्यकर्ता प्रवेश किए थे, क्या उनके पास प्लेटफार्म टिकट था। इस संबंध में जीआरपी प्रभारी आरके मिश्र ने बताया कि रेलवे एक्ट का पालन कराने की जिम्मेदारी आरपीएफ की होती है। इस बाबत आरपीएफ प्रभारी विजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि कानूनन तो जुर्म है, लेकिन कभी-कभार शांति व्यवस्था को कायम रखने के लिए कुछ चीजों की अनदेखी करनी पड़ती है।
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