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Bahraich News: बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है टीकाकरण
Sat, 24 Aug 2024 03:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:51 AM IST
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बहराइच। टीकाकरण बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने का एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित तरीका है। जिले में हर वर्ष 1.25 लाख से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय संस्था गावी ने प्रदेश के 60 जिलों को चिह्नित किया है, जिसमें बहराइच भी शामिल है। जिससे एक वर्ष तक के बच्चों का समय पर टीकाकरण हो सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि टीकाकरण ने लाखों बच्चों की जान बचाई है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और हर बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों को टीकाकरण से संबंधित भ्रांतियों से बचने और सही समय पर बच्चों का टीकाकरण कराने की सलाह दी।
सीएमओ ने बताया कि वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच के लिए वैक्सीन वायल मॉनिटर का उपयोग किया जाता है, जो गुणवत्ता कम होने पर अपना रंग बदल देता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ, यूएनडीपी, यूपी-टीएसयू और यूनिसेफ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी करती हैं।
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12 प्रकार की बीमारियों से होती है सुरक्षा
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि टीकाकरण 12 गंभीर बीमारियों से सुरक्षा देता है। ये टीके बच्चों को पांच साल में सात बार एक निश्चित आयु पर दिए जाते हैं, जिसमें जन्म के समय, डेढ़, ढाई, साढ़े, नौ माह के साथ ही डेढ़ और पांच साल की आयु शामिल है। इसके अलावा, गर्भवती को भी टीडी के टीके दिए जाते हैं, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहें।
टीके के बाद बुखार आना सामान्य
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि टीके के बाद बुखार आना सामान्य है और यह संकेत है कि टीका प्रभावी है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि बच्चे को स्तनपान कराएं और दवाओं का सेवन कराएं। कुछ अभिभावकों की शिकायत होती है कि एक साथ कई टीके क्यों लगाए जाते हैं। इस बारे में डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विपिन लिखोरे ने बताया कि डेढ़ महीने की आयु पर एक साथ तीन इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जो पोलियो, काली खांसी, गलाघोंटू, टिटनेस व हेपेटाइटिस-बी और निमोनिया से बचाते हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि टीकाकरण ने लाखों बच्चों की जान बचाई है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और हर बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों को टीकाकरण से संबंधित भ्रांतियों से बचने और सही समय पर बच्चों का टीकाकरण कराने की सलाह दी।
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सीएमओ ने बताया कि वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच के लिए वैक्सीन वायल मॉनिटर का उपयोग किया जाता है, जो गुणवत्ता कम होने पर अपना रंग बदल देता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ, यूएनडीपी, यूपी-टीएसयू और यूनिसेफ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी करती हैं।
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12 प्रकार की बीमारियों से होती है सुरक्षा
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि टीकाकरण 12 गंभीर बीमारियों से सुरक्षा देता है। ये टीके बच्चों को पांच साल में सात बार एक निश्चित आयु पर दिए जाते हैं, जिसमें जन्म के समय, डेढ़, ढाई, साढ़े, नौ माह के साथ ही डेढ़ और पांच साल की आयु शामिल है। इसके अलावा, गर्भवती को भी टीडी के टीके दिए जाते हैं, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहें।
टीके के बाद बुखार आना सामान्य
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि टीके के बाद बुखार आना सामान्य है और यह संकेत है कि टीका प्रभावी है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि बच्चे को स्तनपान कराएं और दवाओं का सेवन कराएं। कुछ अभिभावकों की शिकायत होती है कि एक साथ कई टीके क्यों लगाए जाते हैं। इस बारे में डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विपिन लिखोरे ने बताया कि डेढ़ महीने की आयु पर एक साथ तीन इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जो पोलियो, काली खांसी, गलाघोंटू, टिटनेस व हेपेटाइटिस-बी और निमोनिया से बचाते हैं।