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जन्म के साथ ही बालक के सिर में एक किलो का ट्यूमर
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 10 Feb 2016 09:45 PM IST
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राजीचौराहा (बहराइच)। खुटेहना निवासी एक महिला ने 2 फरवरी को बेटे को जन्म दिया लेकिन नवजात के सिर में एक किलो का ट्यूमर है, चेहरा भी प्रभावित है। इसके चलते परिवार के लोग परेशान हैं।
अभी तक बालक का इलाज नहीं शुरू हुआ है। बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो यह काफी गंभीर बीमारी है। ऑपरेशन से ही बीमारी दूर की जा सकती है लेकिन ऑपरेशन भी काफी जटिल होगा।
खुटेहना निवासी सीमा देवी को प्रसव के पूर्व उसके पति महेश ने मायका शेखदहीर हरदी पहुंचा दिया था। वहां 2 फरवरी को भोर में सीमा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिवारीजनों ने सिकंदरपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
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जहां डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव करवाया लेकिन प्रसव के साथ ही बच्चे के सिर में ट्यूमर देखकर सभी सकते में आ गए। लगभग एक किलो का ट्यूमर सिर में था जो निरंतर बढ़ रहा है।
महिला की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इलाज करा सके। इसके चलते प्रसव के आठ दिन बाद भी वह अभी तक ट्यूमर से ग्रसित नवजात बेटे को डॉक्टर के पास नहीं ले जा सकी है।
इस मामले में जिले के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर अग्रवाल का कहना है कि बच्चे के सिर में जिस तरह से ट्यूमर है, यह कंजेनाइटिल डिजीज की श्रेणी में आता है।
यह स्थिति तब बनती है, जब महिला 30 वर्ष की उम्र से अधिक होने पर मां बनती है। लेट प्रेगनेंसी में भ्रूण का विकास प्रभावित होता है। ऐसे में ट्यूमर, अंगों का समुचित विकास न होने की स्थितियां बनती हैं।
न्यूरो सर्जन ही कर सकते ऑपरेशन
डॉ. शिशिर ने बताया कि जिस तरह से नवजात के सिर में ट्यूमर है, उससे लग रहा है कि दिमाग का कुछ हिस्सा भी ट्यूमर की चपेट में है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन भी काफी मुश्किल होगा। बच्चे की जिंदगी भी दांव पर लग सकती है।
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अभी तक बालक का इलाज नहीं शुरू हुआ है। बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो यह काफी गंभीर बीमारी है। ऑपरेशन से ही बीमारी दूर की जा सकती है लेकिन ऑपरेशन भी काफी जटिल होगा।
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खुटेहना निवासी सीमा देवी को प्रसव के पूर्व उसके पति महेश ने मायका शेखदहीर हरदी पहुंचा दिया था। वहां 2 फरवरी को भोर में सीमा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिवारीजनों ने सिकंदरपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
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जहां डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव करवाया लेकिन प्रसव के साथ ही बच्चे के सिर में ट्यूमर देखकर सभी सकते में आ गए। लगभग एक किलो का ट्यूमर सिर में था जो निरंतर बढ़ रहा है।
महिला की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इलाज करा सके। इसके चलते प्रसव के आठ दिन बाद भी वह अभी तक ट्यूमर से ग्रसित नवजात बेटे को डॉक्टर के पास नहीं ले जा सकी है।
इस मामले में जिले के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर अग्रवाल का कहना है कि बच्चे के सिर में जिस तरह से ट्यूमर है, यह कंजेनाइटिल डिजीज की श्रेणी में आता है।
यह स्थिति तब बनती है, जब महिला 30 वर्ष की उम्र से अधिक होने पर मां बनती है। लेट प्रेगनेंसी में भ्रूण का विकास प्रभावित होता है। ऐसे में ट्यूमर, अंगों का समुचित विकास न होने की स्थितियां बनती हैं।
न्यूरो सर्जन ही कर सकते ऑपरेशन
डॉ. शिशिर ने बताया कि जिस तरह से नवजात के सिर में ट्यूमर है, उससे लग रहा है कि दिमाग का कुछ हिस्सा भी ट्यूमर की चपेट में है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन भी काफी मुश्किल होगा। बच्चे की जिंदगी भी दांव पर लग सकती है।