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कतर्नियाघाट में 3-जी का लुत्फ उठाएंगे पर्यटक

Sun, 16 Apr 2017 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Sun, 16 Apr 2017 11:00 PM IST
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Tourists will enjoy 3-G's in Katnaniaghat
कतर्नियाघाट - फोटो : अमर उजाला
कतर्नियाघाट के जंगलों में अभी तक संचार सेवाओं का टोटा था। जंगल के कुछ हिस्सों में ही निजी कंपनियों व बीएसएनएल का मामूली नेटवर्क मिलता था। जिसे देखते हुए जंगल में चार स्थानों पर बीएसएनएल ने नए बीटीएस स्थापित किए हैं। ये बीटीएस 2-जी और 3-जी सेवा भी ग्राहकों को उपलब्ध कराएंगे। कतर्नियाघाट की सैर करने आने वाले पर्यटक अब तेज स्पीड के नेट का आनंद भी ले सकेंगे।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग का जंगली इलाका लगभग 550 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है। केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार कतर्निया के जंगल में आने वाले पर्यटकों के लिए इको टूरिज्म के तहत प्रतिदिन सुविधाओं का विस्तार करने में जुटी है। इसी दिशा में संचार सेवाएं मजबूत करने के लिए बीएसएनएल ने भी दो कदम आगे बढ़ाए हैं।
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कतर्नियाघाट के घने जंगल में बसे थारू बाहुल्य आंबा व बर्दिया में टूजी सेवा देने के लिए एक बीटीएस की स्थापना की गई है। वहीं, गिरिजापुरी बैराज की सैर करने वाले पर्यटकों को अभी तक 2-जी सेवा का लाभ मिल रहा था। इसके लिए नए बीटीएस की स्थापना करके 3-जी सेवा को शुरू किया गया है।
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भारत-नेपाल सीमा से सटे और कतर्नियाघाट के जंगली गांव पिपरा भगड़िया में भी एक नया बीटीएस स्थापित किया गया है। इसी तरह भारत-नेपाल सीमा से सटे बलई गांव में भी बीटीएस की स्थापना की गई है। टीडीएम एलआर सोनी का कहना है कि बीएसएनएल सेवाओं को जंगली इलाकों में मजबूत बनाने की दिशा में ये बेहतर कदम होगा।

टीडीएम ने बताया कि विकासखंड मिहींपुरवा में कतर्नियाघाट जंगल के पास बसे मटेही कला गांव को सांसद आदर्श ग्राम घोषित किया गया था। इस गांव में संचार सेवाएं मजबूत बनाने के लिए एक बीटीएस की स्थापना की गई है।


टीडीएम ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे पिपरा भगड़िया गांव में स्थापित किए गए बीटीएस से एसएसबी की चितलहवा बीओपी को भी जोड़ा गया है। यहां स्थापित बीटीएस की मदद से सुरक्षा एजेंसियाें को तस्करी की सूचनाएं तेजी से मिल सकेंगी। जबकि बलई गांव बार्डर से सटा है। यहां भी बीटीएस से संचार सेवाएं मजबूत होंगी।
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