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नदी का जलस्तर गिरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:04 PM IST
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घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। दूसरी तरफ कटान भी निरंतर बढ़ रही है। महसी का गोलांगज और कैसरगंज का नई आबादी गोड़हिया गांव नदी के निशाने पर हैं। गुरुवार रात से कटान के चलते चार और मकान नदी में समा गए। 110 बीघा खेत भी कटान की भेंट चढ़ गए। लेकिन अब तक न कटान रोकने के कोई उपाय हुए और न ही राहत सहायता मुहैया कराई गई है।
घाघरा नदी के जलस्तर में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है। जलस्तर में गिरावट के चलते नदी महसी क्षेत्र के कायमपुर और गोलागंज गांव के निकट तेज कटान कर रही हैं। इन दोनों गांवों के निकट गुरुवार रात से कैलाश, राधेश्याम, बाबू, महादेव, मुलुक, कृपाराम आदि के 80 बीघा खेत नदी में समा गए।
उधर कैसरगंज के गोडहिया नंबर तीन मजरा नई आबादी में भी कटान जारी है। कटान में गुरुवार रात से सुरेश, संतराम, मुन्नी देवी, बदलू आदि के मकान घाघरा की लहरों में विलीन हो गए। 30 बीघ खेत भी जलमग्न हो गए। हालात यह हैं कि लोग अपने आशियाने उजाड़ने को मजबूर है।
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कटान को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत है। एसडीएम मनोज ने राजस्व टीम के साथ दौरा किया और कटान पीड़ितों को तिरपाल दिए। प्रभावित क्षेत्र में लेखपाल को कैंप करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधान राजरानी वर्मा की ओर से कटान पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था करायी गयी है।
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घाघरा नदी के जलस्तर में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है। जलस्तर में गिरावट के चलते नदी महसी क्षेत्र के कायमपुर और गोलागंज गांव के निकट तेज कटान कर रही हैं। इन दोनों गांवों के निकट गुरुवार रात से कैलाश, राधेश्याम, बाबू, महादेव, मुलुक, कृपाराम आदि के 80 बीघा खेत नदी में समा गए।
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उधर कैसरगंज के गोडहिया नंबर तीन मजरा नई आबादी में भी कटान जारी है। कटान में गुरुवार रात से सुरेश, संतराम, मुन्नी देवी, बदलू आदि के मकान घाघरा की लहरों में विलीन हो गए। 30 बीघ खेत भी जलमग्न हो गए। हालात यह हैं कि लोग अपने आशियाने उजाड़ने को मजबूर है।
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कटान को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत है। एसडीएम मनोज ने राजस्व टीम के साथ दौरा किया और कटान पीड़ितों को तिरपाल दिए। प्रभावित क्षेत्र में लेखपाल को कैंप करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधान राजरानी वर्मा की ओर से कटान पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था करायी गयी है।