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निमोनिया से दो मासूमों की मौत

Wed, 01 Mar 2017 10:34 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Wed, 01 Mar 2017 10:34 PM IST
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The death of two children from pneumonia
अस्पताल में भर्ती बच्चे - फोटो : अमर उजाला
तराई में बदल रहा मौसम मुसीबत का सबब बना हुआ है। सुबह और रात में हो रही ठंड के चलते निमोनिया का कहर जारी है। बुधवार को निमोनिया से पीड़ित दो मासूमों की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, वहीं 19 रोगी और भर्ती हुए हैं। इनमें डायरिया व निमोनिया से पीड़ित चार रोगियों की हालत नाजुक बताई जा रही है। 
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तराई में मौसम में हो रहा बदलाव बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। रामगांव थाना क्षेत्र के रेहुआ मंसूर गांव निवासी राम नरायन के चार वर्षीय पुत्र सुशील चौबे को मंगलवार की शाम तेज बुखार और उल्टी सांस चलने की शिकायत हुई। इस पर परिवारीजनों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान बुधवार सुबह उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों के मुताबिक सुशील को क्रिटिकल निमोनिया की शिकायत थी। इलाज के दौरान सुशील ने दम तोड़ दिया।
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उधर, विशेश्वरगंज निवासी राजन (2) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसे भी निमोनिया के साथ डायरिया की शिकायत थी। वहीं अस्पताल में 19 रोगी और भर्ती हुए हैं। इनमें हुजूरपुर निवासी पूजा (3), लक्ष्मन (2), कैसरगंज निवासी रामू (1) और तिलक (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि मौसम तेजी से बदल रहा है। रात में बच्चों के सोते समय अभिभावकों की लापरवाही के चलते वह खुले रह जाते हैं, जिससे उन्हें निमोनिया और डायरिया की शिकायत हो रही है। अभिभावकों को इससे सजग रहना होगा। तभी नन्हे-मुन्हें स्वस्थ रह सकेंगे। 

तराई में निमोनिया का कहर किस तरह बरपता है। इसका अनुमान आंकड़ों से लगाया जा सकता है। दो माह में जिले में निमोनिया के प्रकोप से 21 मासूमों की सांसें थम गई हैं। हालांकि जिला अस्पताल में निमोनिया से होने वाली मौतों का ग्राफ सिर्फ छह बच्चों तक ही सिमटा हुआ है। इन मौतों में भी अभिभावकों की लापरवाही बताई जा रही है। 

निमोनिया होने पर तेज बुखार के साथ रोगी की हालत बेसुध जैसी हो जाती है। सांस उल्टी चलने लगती है। पसलियां भी तेजी से चलने का अहसास होता है। कभी-कभी उल्टी-दस्त की भी शिकायत होती है। कोई भी खाद्य-पदार्थ रोगी को हजम नहीं होता।


निमोनिया न हो, इसके लिए बच्चों को गर्म कपड़ों में लपेटकर रखें। रात में सोते समय उन्हें खुला न रहने दें। सरसों का तेल या जैतून तेल की मालिश नियमित करें। निमोनिया होने की दशा में योग्य चिकित्सक से जल्द से जल्द उपचार कराएं।
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