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दहाड़ रहा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 11 Feb 2017 10:09 PM IST
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फाइल फोटो
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दौलतपुर गांव के पास दिख रहा वन्यजीव बाघ नहीं, बल्कि तेंदुआ है। इसकी पुष्टि वन विभाग की टीम ने कांबिंग के दौरान मिले उसके पदचिन्हों को देखकर की है। रात में भी तेंदुए की दहाड़ गांव के लोगों ने सुनी। इस दौरान एक कुत्ते को भी उसने निवाला बनाया। वहीं तेंदुए की निगरानी के लिए वन विभाग ने दो टीमें गठित की हैं। लोकेशन मिलने के बाद उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। वहीं गांव के लोग दहशत में हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत दौलतपुर गांव जंगल से सटा है। जंगल और गांव के बीच लगभग डेढ़ किलोमीटर का फासला है। जंगल से भटक कर एक तेंदुआ गांव के निकट पहुंच गया है। वह बीते चार दिन से गांव के लोगों को दिख रहा था। शुक्रवार को एक ग्रामीण के सामने आ गया। उसे ग्रामीणों ने बाघ समझा। सूचना रेंज कार्यालय पर दी। इसके बाद वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम ने दो टीमें गठित की हैं।
यह टीमें वन दरोगा रामवृक्ष और रमाशंकर की अगुवाई में गठित हुई हैं, जिसमें वन्यजीव रक्षक मुकुटमणि पांडेय, पैकरमादीन व चार पीआरडी के जवान शामिल हैं। चार सदस्यीय एक टीम रात में व दूसरी टीम दिन में क्षेत्र में कांबिंग कर रही है।
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वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि कांबिंग के दौरान पदचिन्हों से वन्यजीव की पहचान हुई है। वह बाघ नहीं, बल्कि तेंदुआ है। उन्होंने कहा कि बाघ की तरह तेंदुआ भी हमलावर होता है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए टीमें निरंतर गश्त कर रही हैं। तेंदुए की लोकेशन ली जा रही है। उसका मूवमेंट जिस दिशा में अधिक मिलेगा, उस तरफ पिंजरा लगाकर उसे पकड़ा जाएगा।
उधर, तेंदुए की दहाड़ शुक्रवार की रात में भी दौलतपुर गांव के लोगों ने सुनी। सुबह गांव के एक पालतू कुत्ते का अस्थिपंजर मिला। आसपास जो पदचिन्ह मिले, उससे तेंदुए द्वारा कुत्ते को निवाला बनाए जाने की पुष्टि हुई है।
गांव के लोग काफी दहशत में हैं। वहीं वन क्षेत्राधिकारी निरंतर गश्त की बात कह रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों को समूह में घर से निकलने के निर्देश दिए गए हैं। क्योंकि तेंदुआ समूह में होने पर हमला नहीं करेगा।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत दौलतपुर गांव जंगल से सटा है। जंगल और गांव के बीच लगभग डेढ़ किलोमीटर का फासला है। जंगल से भटक कर एक तेंदुआ गांव के निकट पहुंच गया है। वह बीते चार दिन से गांव के लोगों को दिख रहा था। शुक्रवार को एक ग्रामीण के सामने आ गया। उसे ग्रामीणों ने बाघ समझा। सूचना रेंज कार्यालय पर दी। इसके बाद वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम ने दो टीमें गठित की हैं।
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यह टीमें वन दरोगा रामवृक्ष और रमाशंकर की अगुवाई में गठित हुई हैं, जिसमें वन्यजीव रक्षक मुकुटमणि पांडेय, पैकरमादीन व चार पीआरडी के जवान शामिल हैं। चार सदस्यीय एक टीम रात में व दूसरी टीम दिन में क्षेत्र में कांबिंग कर रही है।
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वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि कांबिंग के दौरान पदचिन्हों से वन्यजीव की पहचान हुई है। वह बाघ नहीं, बल्कि तेंदुआ है। उन्होंने कहा कि बाघ की तरह तेंदुआ भी हमलावर होता है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए टीमें निरंतर गश्त कर रही हैं। तेंदुए की लोकेशन ली जा रही है। उसका मूवमेंट जिस दिशा में अधिक मिलेगा, उस तरफ पिंजरा लगाकर उसे पकड़ा जाएगा।
उधर, तेंदुए की दहाड़ शुक्रवार की रात में भी दौलतपुर गांव के लोगों ने सुनी। सुबह गांव के एक पालतू कुत्ते का अस्थिपंजर मिला। आसपास जो पदचिन्ह मिले, उससे तेंदुए द्वारा कुत्ते को निवाला बनाए जाने की पुष्टि हुई है।
गांव के लोग काफी दहशत में हैं। वहीं वन क्षेत्राधिकारी निरंतर गश्त की बात कह रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों को समूह में घर से निकलने के निर्देश दिए गए हैं। क्योंकि तेंदुआ समूह में होने पर हमला नहीं करेगा।