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154 पंचायत भवनों में संसाधन अधूरे, रोके गए सभी तरह के भुगतान
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बहराइच। ग्राम पंचायतों में निवासरत ग्रामीणों को उनकी पंचायत में ही सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैय्या करवाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनाने का निर्देश दिया गया था। पंचायत भवन के संचालन के लिए पंचायत सहायक की नियुक्ति कर सभी प्रधानों को पंचायत भवन में कार्यालय संबंधी आवश्यक सामान लगवाने को कहा गया था। जिसमें कुर्सी, मेज, पंखा, इनवर्टर, अलमारी, कंप्यूटर आदि शामिल है। वहीं सभी पंचायतों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का आदेश भी शासन की ओर से जारी कर दिया गया है।
बावजूद इसके जिले की 154 ग्राम पंचायतों में अभी तक पंचायत भवन व जरूरी सामान नहीं लगवाए गए हैं। जिसे देखते इन ग्राम पंचायतों का भुगतान शासन के निर्देश पर रोक दिया गया है और जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर के माध्यम से ही भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही अधूरे पंचायत भवन वाली ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव अगर साइबर कैफै या सीएससी के माध्यम से भुगतान करते हैं, तो वित्तीय अनियमितता के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सभी ग्राम पंचायतों को स्मार्ट बनाने की बात कही गई है और इसे पूरा करने के लिए गांव-गांव में पंचायत भवन बनाकर इसे हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा जो जोड़ने को कहा गया है। ताकि ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए ब्लॉक व जिले की दौड़ न लगानी पड़े और उन्हें उनकी पंचायत में ही सारी सुविधाएं मिल जाएं। शासन की ओर से पंचायत भवन में ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी व इसका लाभ देने, आय, जाति, निवास आदि के लिए पंचायत सहायक की नियुक्ति की गई है और इन्हें प्रति माह 600 हजार रुपये का पारिश्रमिक भी दिया जा रहा है। लेकिन शासन के इतने प्रयासों के बाद भी शासन की ग्रामीण कल्याण की यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिसको देखते हुए शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है और अधूरे पंचायत भवन वाली ग्राम पंचायतों के सभी वित्तीय अधिकारी छीन लिए हैं।
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अधूरे पंचायत भवन वाले ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव अब ग्राम पंचायत के किसी भी कार्य के लिए भुगतान नहीं कर सकते हैं। गौरतलब हो कि पंचायती राज विभाग की ओर से बुधवार से सभी तरह के भुगतान केवल पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर से अनिवार्य कर दिया है। साथ ही पंचायत भवन के अतिरिक्त साइबर कैफै या सीएचसी के माध्यम से भुगतान होने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
1045 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 891 में लगे कंप्यूटर
जिले में 1045 ग्राम पंचायतें है, इन सभी में पंचायत भवन बनना था। लेकिन शासन की सख्ती के बाद भी अभी तक मात्र 898 ग्राम पंचायतों में ही पंचायत भवन का निर्माण हो पाया है। वहीं इनमें से सिर्फ 891 ग्राम पंचायतें ही ऐसी हैं जहां पंचायत भवन में सभी जरुरी सामान मेज, कुर्सी, कंप्यूटर, इंटरनेट, इन्वर्टर, पंखा आदि की व्यवस्था की गई है। जिले की 147 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां अभी या तो पंचायत भवन बना ही नहीं या फिर निर्माण कार्य जारी है। जबकि संसाधन विहीन ग्राम पंचायतों की संख्या 154 है। संसाधन विहीन सभी 154 ग्राम पंचायतों में जब तक पंचायत भवन व सभी संसाधन उपलब्ध नहीं हो जाते हैं, इनमें भुगतान नहीं हो पाएगा। वहीं अगर पंचायत सहायकों के तैनाती की बात की जाए, तो जिले की 1013 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक तैनात हैं। जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक पंचायत भवन नहीं बने हैं, वहीं पंचायत सहायक प्रधान आदि के घर से कार्य संपादन कर रहे हैं।
पंचायत भवन के अतिरिक्त किसी माध्यम से भुगतान पर कार्रवाई होगी: डीपीआरओ
जिला पंचायती राज अधिकारी उमाकांत पांडेय ने बताया कि शासन की से एक जून पंचायत भवन से भुगतान करने का आदेश दिया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को पत्र द्वारा इसकी जानकारी दी जा चुकी है। एक जून के बाद अगर जिले की किसी भी ग्राम पंचायत द्वारा पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर के आईपी एड्रेस के अलावा लैपटॉप, साइबर कैफे, सीएचसी आदि के माध्यम से भुगतान किया जाता है, तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा और ऐसा करने वाली ग्राम पंचायत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बावजूद इसके जिले की 154 ग्राम पंचायतों में अभी तक पंचायत भवन व जरूरी सामान नहीं लगवाए गए हैं। जिसे देखते इन ग्राम पंचायतों का भुगतान शासन के निर्देश पर रोक दिया गया है और जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर के माध्यम से ही भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही अधूरे पंचायत भवन वाली ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव अगर साइबर कैफै या सीएससी के माध्यम से भुगतान करते हैं, तो वित्तीय अनियमितता के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सभी ग्राम पंचायतों को स्मार्ट बनाने की बात कही गई है और इसे पूरा करने के लिए गांव-गांव में पंचायत भवन बनाकर इसे हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा जो जोड़ने को कहा गया है। ताकि ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए ब्लॉक व जिले की दौड़ न लगानी पड़े और उन्हें उनकी पंचायत में ही सारी सुविधाएं मिल जाएं। शासन की ओर से पंचायत भवन में ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी व इसका लाभ देने, आय, जाति, निवास आदि के लिए पंचायत सहायक की नियुक्ति की गई है और इन्हें प्रति माह 600 हजार रुपये का पारिश्रमिक भी दिया जा रहा है। लेकिन शासन के इतने प्रयासों के बाद भी शासन की ग्रामीण कल्याण की यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिसको देखते हुए शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है और अधूरे पंचायत भवन वाली ग्राम पंचायतों के सभी वित्तीय अधिकारी छीन लिए हैं।
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अधूरे पंचायत भवन वाले ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव अब ग्राम पंचायत के किसी भी कार्य के लिए भुगतान नहीं कर सकते हैं। गौरतलब हो कि पंचायती राज विभाग की ओर से बुधवार से सभी तरह के भुगतान केवल पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर से अनिवार्य कर दिया है। साथ ही पंचायत भवन के अतिरिक्त साइबर कैफै या सीएचसी के माध्यम से भुगतान होने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
1045 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 891 में लगे कंप्यूटर
जिले में 1045 ग्राम पंचायतें है, इन सभी में पंचायत भवन बनना था। लेकिन शासन की सख्ती के बाद भी अभी तक मात्र 898 ग्राम पंचायतों में ही पंचायत भवन का निर्माण हो पाया है। वहीं इनमें से सिर्फ 891 ग्राम पंचायतें ही ऐसी हैं जहां पंचायत भवन में सभी जरुरी सामान मेज, कुर्सी, कंप्यूटर, इंटरनेट, इन्वर्टर, पंखा आदि की व्यवस्था की गई है। जिले की 147 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां अभी या तो पंचायत भवन बना ही नहीं या फिर निर्माण कार्य जारी है। जबकि संसाधन विहीन ग्राम पंचायतों की संख्या 154 है। संसाधन विहीन सभी 154 ग्राम पंचायतों में जब तक पंचायत भवन व सभी संसाधन उपलब्ध नहीं हो जाते हैं, इनमें भुगतान नहीं हो पाएगा। वहीं अगर पंचायत सहायकों के तैनाती की बात की जाए, तो जिले की 1013 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक तैनात हैं। जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक पंचायत भवन नहीं बने हैं, वहीं पंचायत सहायक प्रधान आदि के घर से कार्य संपादन कर रहे हैं।
पंचायत भवन के अतिरिक्त किसी माध्यम से भुगतान पर कार्रवाई होगी: डीपीआरओ
जिला पंचायती राज अधिकारी उमाकांत पांडेय ने बताया कि शासन की से एक जून पंचायत भवन से भुगतान करने का आदेश दिया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को पत्र द्वारा इसकी जानकारी दी जा चुकी है। एक जून के बाद अगर जिले की किसी भी ग्राम पंचायत द्वारा पंचायत भवन में लगे कंप्यूटर के आईपी एड्रेस के अलावा लैपटॉप, साइबर कैफे, सीएचसी आदि के माध्यम से भुगतान किया जाता है, तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा और ऐसा करने वाली ग्राम पंचायत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।