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कुर्सी बचाने के लिए घटना को दबाते रहे खैरीघाट थानाध्यक्ष
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बहराइच। संकल्पा मतदान केंद्र पर फर्जी वोट डालने को लेकर हुए विवाद के बाद खैरीघाट पुलिस लगातार मामले को दबाती रही। पथराव का वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस बस कुछ लोगों द्वारा पत्थर फेंके जाने की बात कहती रही और सूचना पर पहुंचते ही लोगों के भाग खड़े होने की बात बताई, लेकिन 18 घंटे बाद दर्ज हुई एफआईआर में पुलिस ने तत्काल 10 लोगों को पकड़ने का जिक्र कर दिया।
मामले को पुलिस लगातार छोटी घटना बताते हुए छुपाती रही। इसी मामले में शुक्रवार सुबह मुकदमा दर्ज कर 10 लोगों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाने लगी। अब सवाल उठता है कि पुलिस आखिर क्यों मामले को छुपाती रही। 18 घंटे बाद क्यों मुकदमा दर्ज हुआ जबकि दावा किया गया है कि पुलिस ने घटना स्थल से ही 10 लोगों को हिरासत में ले लिया था। चर्चा है कि कुर्सी को बचाने के लिए थानाध्यक्ष मामले को दबाने में लगे रहे।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान बृहस्पतिवार को खैरीघाट थाना क्षेत्र के संकल्पा मतदान केंद्र पर लगभग 12 बजे फर्जी वोट डालने का आरोप लगाते हुए दो प्रधान प्रत्याशी व उनके समर्थक आपस में भिड़ गए थे। जिसके बाद जमकर पथराव हुआ था। खैरीघाट थानाध्यक्ष विमलेश सिंह ने बृहस्पतिवार को 1.16 बजे जानकारी लेने के दौरान बताया कि कुछ लोगों ने मतदान केंद्र के बाहर लाइन में आगे खड़े होने को लेकर विवाद कर लिया था।
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उसी में कुछ लोगों ने पत्थर चला दिया था, लेकिन एफआईआर में जिक्र किया गया कि 12.50 पर 10 नामजद लोगों को हिरासत में ले लिया गया था जबकि मुकदमा शुक्रवार सुबह छह बजकर 58 मिनट पर दर्ज किया गया। आखिर 18 घंटे किस बात का इंतजार किया जा रहा था। मीडियाकर्मियों से एसओ क्यों झूठ बोलते रहे। चर्चा है कि एसपी सुजाता सिंह के सख्त रवैये को देखते हुए कुर्सी बचाने के लिए थानाध्यक्ष लगातार घटना को दबाते रहे।
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मामले को पुलिस लगातार छोटी घटना बताते हुए छुपाती रही। इसी मामले में शुक्रवार सुबह मुकदमा दर्ज कर 10 लोगों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाने लगी। अब सवाल उठता है कि पुलिस आखिर क्यों मामले को छुपाती रही। 18 घंटे बाद क्यों मुकदमा दर्ज हुआ जबकि दावा किया गया है कि पुलिस ने घटना स्थल से ही 10 लोगों को हिरासत में ले लिया था। चर्चा है कि कुर्सी को बचाने के लिए थानाध्यक्ष मामले को दबाने में लगे रहे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान बृहस्पतिवार को खैरीघाट थाना क्षेत्र के संकल्पा मतदान केंद्र पर लगभग 12 बजे फर्जी वोट डालने का आरोप लगाते हुए दो प्रधान प्रत्याशी व उनके समर्थक आपस में भिड़ गए थे। जिसके बाद जमकर पथराव हुआ था। खैरीघाट थानाध्यक्ष विमलेश सिंह ने बृहस्पतिवार को 1.16 बजे जानकारी लेने के दौरान बताया कि कुछ लोगों ने मतदान केंद्र के बाहर लाइन में आगे खड़े होने को लेकर विवाद कर लिया था।
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उसी में कुछ लोगों ने पत्थर चला दिया था, लेकिन एफआईआर में जिक्र किया गया कि 12.50 पर 10 नामजद लोगों को हिरासत में ले लिया गया था जबकि मुकदमा शुक्रवार सुबह छह बजकर 58 मिनट पर दर्ज किया गया। आखिर 18 घंटे किस बात का इंतजार किया जा रहा था। मीडियाकर्मियों से एसओ क्यों झूठ बोलते रहे। चर्चा है कि एसपी सुजाता सिंह के सख्त रवैये को देखते हुए कुर्सी बचाने के लिए थानाध्यक्ष लगातार घटना को दबाते रहे।