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पैरामेडिकल स्टाफ की हड़ताल, जिला अस्पताल में इलाज ठप
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2016 10:20 PM IST
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परेशान हुए मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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फार्मासिस्ट, प्रयोगशाला सहायक व अन्य कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को जिला अस्पताल के मरीजों पर भारी पड़ी। मरीजों को न दवाइयां मिल पाईं और न ही पैथालॉजी में उनकी जांच की गई। गंभीर रूप से बीमार लोग कराहते हुए भटके। दवा वितरण और जांच कार्य पूरी तरह ठप होने से दोपहर बाद कई मरीजों ने नर्सिंग होम की शरण ली। दिन भर जिला अस्पताल में अफरा तफरी की स्थिति रही।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन और संयुक्त राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ के बैनर तले मंगलवार को फार्मेसिस्ट, प्रयोगशाला सहायक तथा अन्य चिकित्साकर्मी हड़ताल पर रहे। इसके चलते जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों का परीक्षण तो किया लेकिन उनके द्वारा लिखी गई दवाइयां मरीजों को नहीं मिल सकीं। दवा वितरण कक्ष में ताला लटका रहा।
पैथालॉजी में रोगियों के रक्त व अन्य अवयव की जांच नहीं हो सकी। इस कारण मरीज और उनके तीमारदार जिला अस्पताल में इधर से उधर भटकने को मजबूर हुए। सबसे अधिक दिक्कत अस्पताल में भर्ती मरीजों को उठानी पड़ी। जिन रोगियों की दवाएं खत्म हो गई थी उन्हें पूरे दिन दवा नहीं मिल सकी।
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अस्पताल में अव्यवस्था और अफरा-तफरी का आलम दिखा। इस कारण दोपहर बाद कई मरीजों को उनके तीमारदार डिस्चार्ज करवा कर निजी अस्पतालों का रुख किया। इनमें बौंडी के उदसियापुर निवासी संगीता समेत दर्जन भर मरीज शामिल रहे। संगीता को बुखार और पीलिया की शिकायत रही। सुबह से दोपहर तक दवा नहीं मिली। जांच की भी व्यवस्था नहीं थी।
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डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन और संयुक्त राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ के बैनर तले मंगलवार को फार्मेसिस्ट, प्रयोगशाला सहायक तथा अन्य चिकित्साकर्मी हड़ताल पर रहे। इसके चलते जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों का परीक्षण तो किया लेकिन उनके द्वारा लिखी गई दवाइयां मरीजों को नहीं मिल सकीं। दवा वितरण कक्ष में ताला लटका रहा।
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पैथालॉजी में रोगियों के रक्त व अन्य अवयव की जांच नहीं हो सकी। इस कारण मरीज और उनके तीमारदार जिला अस्पताल में इधर से उधर भटकने को मजबूर हुए। सबसे अधिक दिक्कत अस्पताल में भर्ती मरीजों को उठानी पड़ी। जिन रोगियों की दवाएं खत्म हो गई थी उन्हें पूरे दिन दवा नहीं मिल सकी।
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अस्पताल में अव्यवस्था और अफरा-तफरी का आलम दिखा। इस कारण दोपहर बाद कई मरीजों को उनके तीमारदार डिस्चार्ज करवा कर निजी अस्पतालों का रुख किया। इनमें बौंडी के उदसियापुर निवासी संगीता समेत दर्जन भर मरीज शामिल रहे। संगीता को बुखार और पीलिया की शिकायत रही। सुबह से दोपहर तक दवा नहीं मिली। जांच की भी व्यवस्था नहीं थी।