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नहीं खरीदा जा रहा धान, नमी बता किसानों को लौटा रहे
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बहराइच। जिले में 15 अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई है। शासन ने जिले में 1.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है। इसके लिए 103 क्रय केंद्र संचालित किए गए हैं, लेकिन क्रय केंद्रों पर धान खरीदने की रफ्तार नहीं बढ़ रही है। सुस्त रफ्तार के चलते 20 दिनों में महज 3816 मीट्रिक टन ही धान की खरीद हो सकी है। नमी व अन्य कारणों से किसानों का धान क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है। इससे किसान बिचौलियों के हाथ नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल धान बेचने को विवश हैं। जिले में अभी तक करीब तीन फीसदी भी धान खरीद नहीं हुई है।
जिले में धान खरीद केंद्रों का संचालन 15 अक्तूबर से शुरू हुआ था। उसी दिन से क्रय केंद्रों पर धान खरीद शुरू हुई। शासन ने जिले में 1.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है। इसके लिए सात क्रय एजेंसियों के माध्यम से 103 क्रय केंद्र संचालित किए गए हैं, लेकिन क्रय केंद्रों पर धान खरीद की रफ्तार काफी धीमी है। 20 दिनों में महज 3816 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। इसका मुख्य कारण धान क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए नियम हैं। किसान क्रय केंद्र पर धान लेकर जाते हैं, लेकिन नमी का बहाना बनाकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। वहीं कुछ किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। इससे धान बिक्री करने में समस्या हो रही है।
क्रय केंद्र प्रभारी धान में नमी व रजिस्ट्रेशन न होने की बात कहकर धान की खरीद किसानों से नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ रही हैं। परेशान किसान घर का खर्च चलाने और आगे की फसल की बोआई के लिए 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल धान बिचौलियों के हाथ बेचने को मजबूर हैं, जिससे इन किसानों को सरकारी रेट से नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसानों की गाढ़ी कमाई का लाभ बिचौलिये उठा रहे हैं, लेकिन मजबूरी में बिचौलियों के हाथ किसान धान बिक्री करने को मजबूर हैं।
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सचिव व कर्मचारी कर रहे लापरवाही
जरवल विकास खंड कस्बा निवासी प्रगतिशील किसान गुलाम मोहम्मद का कहना है कि जरवल साधन सहकारी समिति केंद्र का संचालन अभी तक नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के किसानों की धान खरीद नहीं हो पा रही है। धनसरी निवासी धर्मचंद महेश का कहना है कि क्रय केंद्र पर पहुंचने पर कर्मचारी धान में नमी अधिक बता देते हैं। इसके बाद खरीद नहीं करते हैं, जिससे किसानों को समस्या होती है। मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत नौबना के रंगीलालपुरवा गांव निवासी रामायन का कहना है कि 30 किलोमीटर की दूरी तय कर धान बिक्री के लिए जाते हैं, लेकिन सचिव की ओर से इतने नियम बता दिए जाते हैं कि किसान धान की बिक्री ही नहीं कर पाते हैं। उर्रा बाजार निवासी किसान मुखलाल निषाद का कहना है कि किसानों को सरकार धान बिक्री करने में सहूलियत दे रही है, लेकिन सचिव व अन्य कर्मचारियों की शिथिलता के चलते किसान क्रय केंद्र पर धान बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। कहीं नमी तो कहीं रजिस्ट्रेशन न होने के चलते किसानों को लौटाया जा रहा है।
लघु व सीमांत किसान को प्राथमिकता
धान खरीद शासन के मानकों के अनुरूप की जा रही है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वह धान को साफ करने के बाद सुखाकर ही केंद्र लाएं, जिससे उनको इंतजार न करना पड़े। खरीद में लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
- संजीव सिंह, डिप्टी आरएमओ, बहराइच
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जिले में धान खरीद केंद्रों का संचालन 15 अक्तूबर से शुरू हुआ था। उसी दिन से क्रय केंद्रों पर धान खरीद शुरू हुई। शासन ने जिले में 1.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है। इसके लिए सात क्रय एजेंसियों के माध्यम से 103 क्रय केंद्र संचालित किए गए हैं, लेकिन क्रय केंद्रों पर धान खरीद की रफ्तार काफी धीमी है। 20 दिनों में महज 3816 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। इसका मुख्य कारण धान क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए नियम हैं। किसान क्रय केंद्र पर धान लेकर जाते हैं, लेकिन नमी का बहाना बनाकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। वहीं कुछ किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। इससे धान बिक्री करने में समस्या हो रही है।
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क्रय केंद्र प्रभारी धान में नमी व रजिस्ट्रेशन न होने की बात कहकर धान की खरीद किसानों से नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ रही हैं। परेशान किसान घर का खर्च चलाने और आगे की फसल की बोआई के लिए 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल धान बिचौलियों के हाथ बेचने को मजबूर हैं, जिससे इन किसानों को सरकारी रेट से नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसानों की गाढ़ी कमाई का लाभ बिचौलिये उठा रहे हैं, लेकिन मजबूरी में बिचौलियों के हाथ किसान धान बिक्री करने को मजबूर हैं।
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सचिव व कर्मचारी कर रहे लापरवाही
जरवल विकास खंड कस्बा निवासी प्रगतिशील किसान गुलाम मोहम्मद का कहना है कि जरवल साधन सहकारी समिति केंद्र का संचालन अभी तक नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के किसानों की धान खरीद नहीं हो पा रही है। धनसरी निवासी धर्मचंद महेश का कहना है कि क्रय केंद्र पर पहुंचने पर कर्मचारी धान में नमी अधिक बता देते हैं। इसके बाद खरीद नहीं करते हैं, जिससे किसानों को समस्या होती है। मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत नौबना के रंगीलालपुरवा गांव निवासी रामायन का कहना है कि 30 किलोमीटर की दूरी तय कर धान बिक्री के लिए जाते हैं, लेकिन सचिव की ओर से इतने नियम बता दिए जाते हैं कि किसान धान की बिक्री ही नहीं कर पाते हैं। उर्रा बाजार निवासी किसान मुखलाल निषाद का कहना है कि किसानों को सरकार धान बिक्री करने में सहूलियत दे रही है, लेकिन सचिव व अन्य कर्मचारियों की शिथिलता के चलते किसान क्रय केंद्र पर धान बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। कहीं नमी तो कहीं रजिस्ट्रेशन न होने के चलते किसानों को लौटाया जा रहा है।
लघु व सीमांत किसान को प्राथमिकता
धान खरीद शासन के मानकों के अनुरूप की जा रही है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वह धान को साफ करने के बाद सुखाकर ही केंद्र लाएं, जिससे उनको इंतजार न करना पड़े। खरीद में लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
- संजीव सिंह, डिप्टी आरएमओ, बहराइच