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Bahraich News: विकास कार्यों में धांधली पर सात सचिव व एक एडीओ को नोटिस
Fri, 15 Sep 2023 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 15 Sep 2023 11:18 PM IST
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विकास कार्यों में धांधली की शिकायत पर डीएम ने करवाई थी जांच, जांच में निकला लाखों का घोटाला
नोटिस के बाद सभी के खिलाफ हो सकती है निलंबन की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच/विशेश्वरगंज। विशेश्वरगंज विकासखंड में ग्रामीण विकास की योजनाओं में लाखों रुपये का घोटाला कर जिम्मेदारों ने बंदरबांट कर लिया था। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने डीएम समेत आला अधिकारियों से की थी। जिसके बाद जांच के लिए कमेटी गठित हुई थी। लेकिन कमेटी ने भी जांच को चार वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा। जिसके बाद ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई।
जनहित याचिका दायर होने के बाद हरकत में आए जांच कमेटी ने आननफानन जांच कर सात सचिवों व एक एडीओ के खिलाफ कार्यवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट सौंपी है। जिसके बाद सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। साथ ही प्रकरण में सभी पर निलंबन की तलवार भी लटक गई है।
विशेश्वरगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत जलालपुर में तैनात सचिवों ने ग्राम प्रधानों के साथ मिलीभगत कर विकास कार्यों में लाखों का खेल किया था। जिस पर ग्रामीण उदय प्रताप व पिंटू दूबे आदि ने 06 फरवरी 2020 को तत्कालीन डीएम को शिकायती पत्र देकर जांच व कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर डीएम ने उपकृषि निदेशक टीपी शाही, सहायक अभियंता मनोज के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन करते हुए जांच का आदेश दिया था। जिसके बाद जांच कमेटी के सदस्य गांव पहुंचे पर संबंधित जिम्मेदारों की ओर से अभिलेख उपलब्ध न करवाए जाने से जांच लंबित हो गई थी। अभिलेखों के चक्कर में जांच लगातार लंबित होती रही।
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वहीं इस दौरान लगातार जारी शिकायतों के चलते 06 सितंबर 2023 को फिर से जांच टीम गांव पहुंची और मामले की जांच की। जिसमें सात सचिवों द्वारा लाखों की अनियमितता व एक एडीओ पंचायत द्वारा पर्यवेक्षण में लापरवाही सामने आई। जिस पर जांच टीम ने सभी आठों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा है। डीएम के अवकाश पर होने के कारण दोषी मिले अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
जांच में सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर धन निकालने का हुआ खुलासा
उपकृषि निदेशक टीपी शाही व सहायक अभियंता की जांच में ग्रामीण पेशकार के घर से अलखराम के घर तक खड़ंजा मरम्मत में घोटाला मिला। ग्रामीण बद्री गोस्वामी के घर से रामदयाल के घर तक नाली निर्माण के नाम पर 1,61,729 रुपये का भुगतान मिला, जबकि मौके पर कोई नाली निर्माण नहीं मिला। वहीं इसी तरह बद्री गोस्वामी के घर से शिवकुमार के घर नाली निर्माण के नाम पर 69,670 रुपये का घोटाला पाया गया। यही नहीं तालाब खुदवाने के नाम पर भी लाखों रुपये का बंदरबांट मिला।
शिकायत पर ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज करवाने का आरोप
प्रकरण को लेकर शिकायतकर्ता उदय प्रताप से बात की गई तो उन्होंने जांच टीम पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कार्यों की जानकारी के लिए जनसूचना मांगी थी। जिस पर 870 पेज की जांच रिपोर्ट के लिए 1740 रुपये लिए गए और जनसूचना नहीं दी गई। जिसके बाद जन सूचना आयोग लखनऊ से इसकी शिकायत की। जिस पर तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी भूपेंद्र कुमार तिवारी ने 870 पेज की जगह मात्र 140 पेज उपलब्ध कराया। कार्रवाई न होने पर एक दर्जन से अधिक लोगों ने शपथ पत्र देकर कार्यों के सत्यापन की मांग की। जिसके बाद एडीओ ने बिना सत्यापन के ही रिपोर्ट लगाकर सब को सही ठहरा दिया। जांच को लेकर जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो शपथी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करवा दिए। जिसके बाद बिना हौसला खोए ग्रामीणों के साथ डीएम से फिर शिकायत की।
जांच अधिकारियों ने लंबित की जांच, जनहित याचिका के बाद जागे
शिकायतकर्ता उदय प्रताप ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों ने भी जांच को गंभीरता से नहीं लिया। जांच टीम गांव तक आई और इसके बाद अभिलेख न मिलने का हवाला देकर चली गई। जांच टीम ने चार सालों तक इसे लंबित रखा। जबकि जांच टीम को अभिलेख न देना भी अपराध है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर जारी लापरवाही देख 29 अगस्त 2023 को न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली और जनहित याचिका दायर की। जनहित याचिका में तत्कालीन जिलाधिकारी समेत 13 विभागीय अधिकारियों को शामिल किया गया। उन्हाेंने आरोप लगाया कि जनहित याचिका की भनक लगते ही जांच अधिकारी हरकत में आ गए और चार वर्षों से दबी पड़ी जांच पूरी हो गई।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में सात वीडीओ व एक एडीओ पंचायत के खिलाफ सरकारी धन का गबन सामने आया है। सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। -राघवेन्द्र द्विवेदी, डीपीआरओ
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नोटिस के बाद सभी के खिलाफ हो सकती है निलंबन की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच/विशेश्वरगंज। विशेश्वरगंज विकासखंड में ग्रामीण विकास की योजनाओं में लाखों रुपये का घोटाला कर जिम्मेदारों ने बंदरबांट कर लिया था। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने डीएम समेत आला अधिकारियों से की थी। जिसके बाद जांच के लिए कमेटी गठित हुई थी। लेकिन कमेटी ने भी जांच को चार वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा। जिसके बाद ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई।
जनहित याचिका दायर होने के बाद हरकत में आए जांच कमेटी ने आननफानन जांच कर सात सचिवों व एक एडीओ के खिलाफ कार्यवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट सौंपी है। जिसके बाद सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। साथ ही प्रकरण में सभी पर निलंबन की तलवार भी लटक गई है।
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विशेश्वरगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत जलालपुर में तैनात सचिवों ने ग्राम प्रधानों के साथ मिलीभगत कर विकास कार्यों में लाखों का खेल किया था। जिस पर ग्रामीण उदय प्रताप व पिंटू दूबे आदि ने 06 फरवरी 2020 को तत्कालीन डीएम को शिकायती पत्र देकर जांच व कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर डीएम ने उपकृषि निदेशक टीपी शाही, सहायक अभियंता मनोज के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन करते हुए जांच का आदेश दिया था। जिसके बाद जांच कमेटी के सदस्य गांव पहुंचे पर संबंधित जिम्मेदारों की ओर से अभिलेख उपलब्ध न करवाए जाने से जांच लंबित हो गई थी। अभिलेखों के चक्कर में जांच लगातार लंबित होती रही।
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वहीं इस दौरान लगातार जारी शिकायतों के चलते 06 सितंबर 2023 को फिर से जांच टीम गांव पहुंची और मामले की जांच की। जिसमें सात सचिवों द्वारा लाखों की अनियमितता व एक एडीओ पंचायत द्वारा पर्यवेक्षण में लापरवाही सामने आई। जिस पर जांच टीम ने सभी आठों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा है। डीएम के अवकाश पर होने के कारण दोषी मिले अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
जांच में सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर धन निकालने का हुआ खुलासा
उपकृषि निदेशक टीपी शाही व सहायक अभियंता की जांच में ग्रामीण पेशकार के घर से अलखराम के घर तक खड़ंजा मरम्मत में घोटाला मिला। ग्रामीण बद्री गोस्वामी के घर से रामदयाल के घर तक नाली निर्माण के नाम पर 1,61,729 रुपये का भुगतान मिला, जबकि मौके पर कोई नाली निर्माण नहीं मिला। वहीं इसी तरह बद्री गोस्वामी के घर से शिवकुमार के घर नाली निर्माण के नाम पर 69,670 रुपये का घोटाला पाया गया। यही नहीं तालाब खुदवाने के नाम पर भी लाखों रुपये का बंदरबांट मिला।
शिकायत पर ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज करवाने का आरोप
प्रकरण को लेकर शिकायतकर्ता उदय प्रताप से बात की गई तो उन्होंने जांच टीम पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कार्यों की जानकारी के लिए जनसूचना मांगी थी। जिस पर 870 पेज की जांच रिपोर्ट के लिए 1740 रुपये लिए गए और जनसूचना नहीं दी गई। जिसके बाद जन सूचना आयोग लखनऊ से इसकी शिकायत की। जिस पर तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी भूपेंद्र कुमार तिवारी ने 870 पेज की जगह मात्र 140 पेज उपलब्ध कराया। कार्रवाई न होने पर एक दर्जन से अधिक लोगों ने शपथ पत्र देकर कार्यों के सत्यापन की मांग की। जिसके बाद एडीओ ने बिना सत्यापन के ही रिपोर्ट लगाकर सब को सही ठहरा दिया। जांच को लेकर जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो शपथी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करवा दिए। जिसके बाद बिना हौसला खोए ग्रामीणों के साथ डीएम से फिर शिकायत की।
जांच अधिकारियों ने लंबित की जांच, जनहित याचिका के बाद जागे
शिकायतकर्ता उदय प्रताप ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों ने भी जांच को गंभीरता से नहीं लिया। जांच टीम गांव तक आई और इसके बाद अभिलेख न मिलने का हवाला देकर चली गई। जांच टीम ने चार सालों तक इसे लंबित रखा। जबकि जांच टीम को अभिलेख न देना भी अपराध है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर जारी लापरवाही देख 29 अगस्त 2023 को न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली और जनहित याचिका दायर की। जनहित याचिका में तत्कालीन जिलाधिकारी समेत 13 विभागीय अधिकारियों को शामिल किया गया। उन्हाेंने आरोप लगाया कि जनहित याचिका की भनक लगते ही जांच अधिकारी हरकत में आ गए और चार वर्षों से दबी पड़ी जांच पूरी हो गई।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में सात वीडीओ व एक एडीओ पंचायत के खिलाफ सरकारी धन का गबन सामने आया है। सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। -राघवेन्द्र द्विवेदी, डीपीआरओ