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बघेल तालाब पर कब्जे को लेकर एनजीटी सख्त
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बहराइच के पयागपुर तहसील में स्थित बघेल तालाब।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। पयागपुर इलाके में स्थित बघेल तालाब को पर्यटन के क्षेत्र में प्रमुख रूप से देखा जाता रहा है। बघेल तालाब के आसपास काफी अतिक्रमण हो गया था। इसके पास हो रहे अतिक्रमण को लेकर एनजीटी से शिकायत की गई थी। इस पर एनजीटी ने मामले की जांच शुरू कराते हुए गूगल मैपिंग के माध्यम से पूरे तालाब की पैमाइश कराकर रिपोर्ट तलब की है। एडीएम व सीडीओ की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से अतिक्रमण की जांच शुरू कर दी गई है।
बहराइच वन प्रभाग के सुहेलवा वन्यजीव प्रभाग क्षेत्र के पयागपुर तहसील क्षेत्र में बघेल तालाब स्थित है। बघेल तालाब 1431 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। बघेल तालाब को प्रदेश के सबसे बड़े वेटलैंड के रूप में पहचान मिली हुई है। बघेल तालाब का मत्स्य आखेट का ठेका भी लाखों रुपये में प्रतिवर्ष मत्स्य पालन विभाग की ओर से कराया जाता है।
इस तालाब में 121 हेक्टेयर में पानी भरा हुआ है। जबकि 441 हेक्टेयर का तालाब है। इसके आसपास नाला और पुनर्वास के साथ ही नवीन परती भूमि पड़ी हुई है। प्राइवेट फारेस्ट भी करीब 23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। बघेल तालाब पर अतिक्रमण की शिकायत गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति राधेमोहन मिश्रा की ओर से एनजीटी को पत्र भेजकर की गई थी।
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एनजीटी के आदेश पर पूर्वी नदी और जल संरक्षण निरीक्षण समिति लखनऊ के सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह द्वारा पत्र भेजकर सीडीओ और एडीएम की अध्यक्षता में जांच कराए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। इसी के तहत बघेल तालाब को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के लिए सीडीओ व एडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें सीआरओ को भी शामिल किया गया है।
कमेटी की ओर से तालाब बघेल के आसपास की गूगल मैपिंग के माध्यम से जांच भी शुरू की जा चुकी है। सीडीओ अरविंद चौहान ने बताया कि एसडीएम पयागपुर के स्तर से अतिक्रमण की पैमाइश करायी जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाएगी।
लाखो का होता है कारोबार
बघेल तालाब में जलीय उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसमें मछलियों के साथ ही प्रमुख रूप से कमल गट्टे और सिंघाड़े पैदा किए जाते हैं। इनका चोरी छिपे बड़े पैमाने पर कारोबार भी किया जाता है। वन विभाग की ओर से इसे रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते हैं।
नहीं हो सका सौंदर्यीकरण
बघेल तालाब को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने प्रस्ताव सरकार को दिया। लेकिन बघेल तालाब की दशा को सुधारने के लिए शासन स्तर से कोई प्रयास नहीं किए गए। तीन दशक पूर्व जिले में तैनात एक जिलाधिकारी ने ही यहां पर पर्यटन को विकसित करने के लिए कुछ प्रयास किए थे। उसके बाद से यह वेटलैंड उपेक्षित पड़ा हुआ है।
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बहराइच वन प्रभाग के सुहेलवा वन्यजीव प्रभाग क्षेत्र के पयागपुर तहसील क्षेत्र में बघेल तालाब स्थित है। बघेल तालाब 1431 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। बघेल तालाब को प्रदेश के सबसे बड़े वेटलैंड के रूप में पहचान मिली हुई है। बघेल तालाब का मत्स्य आखेट का ठेका भी लाखों रुपये में प्रतिवर्ष मत्स्य पालन विभाग की ओर से कराया जाता है।
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इस तालाब में 121 हेक्टेयर में पानी भरा हुआ है। जबकि 441 हेक्टेयर का तालाब है। इसके आसपास नाला और पुनर्वास के साथ ही नवीन परती भूमि पड़ी हुई है। प्राइवेट फारेस्ट भी करीब 23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। बघेल तालाब पर अतिक्रमण की शिकायत गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति राधेमोहन मिश्रा की ओर से एनजीटी को पत्र भेजकर की गई थी।
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एनजीटी के आदेश पर पूर्वी नदी और जल संरक्षण निरीक्षण समिति लखनऊ के सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह द्वारा पत्र भेजकर सीडीओ और एडीएम की अध्यक्षता में जांच कराए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। इसी के तहत बघेल तालाब को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के लिए सीडीओ व एडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें सीआरओ को भी शामिल किया गया है।
कमेटी की ओर से तालाब बघेल के आसपास की गूगल मैपिंग के माध्यम से जांच भी शुरू की जा चुकी है। सीडीओ अरविंद चौहान ने बताया कि एसडीएम पयागपुर के स्तर से अतिक्रमण की पैमाइश करायी जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाएगी।
लाखो का होता है कारोबार
बघेल तालाब में जलीय उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसमें मछलियों के साथ ही प्रमुख रूप से कमल गट्टे और सिंघाड़े पैदा किए जाते हैं। इनका चोरी छिपे बड़े पैमाने पर कारोबार भी किया जाता है। वन विभाग की ओर से इसे रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते हैं।
नहीं हो सका सौंदर्यीकरण
बघेल तालाब को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने प्रस्ताव सरकार को दिया। लेकिन बघेल तालाब की दशा को सुधारने के लिए शासन स्तर से कोई प्रयास नहीं किए गए। तीन दशक पूर्व जिले में तैनात एक जिलाधिकारी ने ही यहां पर पर्यटन को विकसित करने के लिए कुछ प्रयास किए थे। उसके बाद से यह वेटलैंड उपेक्षित पड़ा हुआ है।