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15 नवंबर तक बंद रहे भारत-नेपाल का आवागमन
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भारत-नेपाल सीमा पर रुपईडीहा में बंद बार्डर पर खड़े लोग।
- फोटो : BAHRAICH
रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए बंदी को और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। सोमवार देर शाम हुई कैबिनेट बैठक के बाद भारत-नेपाल समेत अन्य देशों के साथ 15 नवंबर तक आवागमन पर रोक लगाने पर सहमति बनी। हालांकि बंदी के दौरान मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूर्व की भांति जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक यह निर्णय भारत व नेपाल के अधिकारियों ने मिलकर लिया है।
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मार्च से नेपाल व भारत के बीच आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। दोनों देशों के बीच इस दौरान महज मालवाहक वाहन ही आवागमन कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद नेपाल व भारत में कोरोना का संक्रमण रुक नहीं रहा है। इसको देखते हुए सोमवार देर शाम नेपाल सरकार के कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच आवागमन को 15 नवंबर तक बंद रखने की सहमति बनी। नेपाल सरकार के मुताबिक बंदी को भारतीय अधिकारियों ने भी सहमति दी है। वहीं पगडंडियों के सहारे आज भी दोनों देशों के लोग आवागमन कर रहे हैं।
मालूम हो कि इससे पहले अगस्त के दूसरे सप्ताह में नेपाल सरकार ने केवल दस निर्दिष्ट सीमा बिंदुओं से लोगों की सीमा पार आवाजाही की अनुमति देने का निर्णय लिया था, जिसमें 20 सीमा बिंदुओं को खोलने के अपने पहले निर्णय की समीक्षा की गई थी। यह निर्णय भारत के साथ सीमावर्ती जिलों में हाल के दिनों में कोविड-19 मामलों में तेज वृद्धि के मद्देनजर आया है। वहीं सरकार ने मालवाहक वाहनों की सीमा पार से आवाजाही के लिए अब तक खोले गए सीमा बिंदु और कुछ जरूरी उद्देश्य के लिए घर लौटने की अनुमति दी है। इनमें झापा में काकरभिट्टा, मोरंग में रानी, सिरहा में मदार और रौतहट जिले में गौर, परसा के बेलगंज बेलहिया के लोग आ-जा सकते हैं। इसी तरह कपिलवस्तु में कृष्णानगर, बांके में जमुनहा, कैलाई में गौरीफंटा और कंचनपुर में गद्दाचौकी के लोग भी आ-जा सकते हैं।
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दशहरा नहीं मना पाएंगे नेपाली कामगार
नेपाल में नेपालियों का सबसे बड़ा त्योहार दशहरा होता है। दशहरा सिर्फ दो सप्ताह दूर है। दशहरा मनाने के लिए नेपाली कामगार बड़ी उत्सुकता से भारत के विभिन्न प्रदेशों से अपने घर वापस आते हैं। लेकिन आवागमन बंद होने से लोग दशहरा का पर्व मनाने नहीं जा सकते हैं।
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कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मार्च से नेपाल व भारत के बीच आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। दोनों देशों के बीच इस दौरान महज मालवाहक वाहन ही आवागमन कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद नेपाल व भारत में कोरोना का संक्रमण रुक नहीं रहा है। इसको देखते हुए सोमवार देर शाम नेपाल सरकार के कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच आवागमन को 15 नवंबर तक बंद रखने की सहमति बनी। नेपाल सरकार के मुताबिक बंदी को भारतीय अधिकारियों ने भी सहमति दी है। वहीं पगडंडियों के सहारे आज भी दोनों देशों के लोग आवागमन कर रहे हैं।
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मालूम हो कि इससे पहले अगस्त के दूसरे सप्ताह में नेपाल सरकार ने केवल दस निर्दिष्ट सीमा बिंदुओं से लोगों की सीमा पार आवाजाही की अनुमति देने का निर्णय लिया था, जिसमें 20 सीमा बिंदुओं को खोलने के अपने पहले निर्णय की समीक्षा की गई थी। यह निर्णय भारत के साथ सीमावर्ती जिलों में हाल के दिनों में कोविड-19 मामलों में तेज वृद्धि के मद्देनजर आया है। वहीं सरकार ने मालवाहक वाहनों की सीमा पार से आवाजाही के लिए अब तक खोले गए सीमा बिंदु और कुछ जरूरी उद्देश्य के लिए घर लौटने की अनुमति दी है। इनमें झापा में काकरभिट्टा, मोरंग में रानी, सिरहा में मदार और रौतहट जिले में गौर, परसा के बेलगंज बेलहिया के लोग आ-जा सकते हैं। इसी तरह कपिलवस्तु में कृष्णानगर, बांके में जमुनहा, कैलाई में गौरीफंटा और कंचनपुर में गद्दाचौकी के लोग भी आ-जा सकते हैं।
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