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घाघरा की कटान में नौ मकान समाहित

Thu, 29 Sep 2016 12:54 AM IST
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:54 AM IST
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Ghagra trimming of nine houses contained
महसी में कहारनपुरवा के पास तेजी से कटान जारी। - फोटो : अमर उजाला
घाघरा नदी की कटान लोगों के अरमानों को लहरों में समेट रही है। रुक-रुक कर हो रही कटान के चलते कहारनपुरवा और नईबस्ती गांव के नौ मकान रात से अब तक नदी में समाहित हो गए हैं। जबकि 115 बीघा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ी है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किये हैं।
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जिसके चलते ग्रामीण अपनी आंखों के सामने आशियाना और खेत नदी में समाहित होते देखने को मजबूर हैं। मुआवजा का ही सहारा बचा है। घाघरा की लहरें महसी और कैसरगंज क्षेत्र में जुलाई से कहर बरपा रही हैं। कटान थमने का नाम नहीं ले रही है।
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नदी का जलस्तर स्थिर हो जाता है। लेकिन कटान जारी रहती है। रुक-रुक कर हो रही कटान के चलते महसी तहसील के कहारनपुरवा गांव में ग्रामीणों के आशियाने नदी लील रही है। गांव निवासी इंद्रप्रताप, किशोर, पारसनाथ, उदई, रामू, सुरेंद्र, के मकानों को नदी की लहरों ने लील लिया।
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वहीं कैसरगंज के नईबस्ती इलाके में रुक-रुक कर कटान हो रही है। यहां पर तीन मकान नदी में समाहित हुए हैं। मकान के साथ ही ग्रामीणों के खेतों पर भी नदी निशाना साधे हुए है। बौंडी से कहारनपुरवा के मध्य नदी ने कटान करते हुए 115 बीघा खेती योग्य जमीन का अस्तित्व खत्म कर दिया है।

उस पार बसे गांव के आसपास भी कटान चल रही है। सूचना के बावजूद कटान रोकने के उपाय नहीं हो सके हैं। इसके चलते ग्रामीण भी बेबस हैं। जिन लोगों के मकान कट रहे हैं। वह खुले आसमान तले गुजर बसर करने को मजबूर हो गए हैं।

ग्राम प्रधान ओंकार सिंह ने बताया कि रुक-रुक कर कटान हो रही है। सूचना तहसील को दी गई, लेकिन मुआवजे का ही सहारा है। जिन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। उन्हें ग्राम समाज की जमीन पर बसाया जा रहा है। 


इस समय मामूली कटान चल रही है। राजस्व लेखपाल क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। उनके द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी। जिन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने का इंतजाम किया गया है।
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