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Bahraich News: मनरेगा में 13.22 लाख का फर्जी भुगतान, होगी वसूली

Sat, 13 Dec 2025 01:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Sat, 13 Dec 2025 01:06 AM IST
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Fake payment of Rs 13.22 lakh in MNREGA, recovery will be done
तेजवापुर क्षेत्र में कार्यों की जांच करते लोकपाल मनरेगा। -संवाद
बहराइच। ग्राम पंचायत हेमरिया में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में 13 कार्यों में फर्जी भुगतान की पुष्टि हुई है। लोकपाल मनरेगा ने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक पर सामूहिक रूप से 13 लाख 22 हजार 977 रुपये के दुरुपयोग का आरोप सिद्ध करते हुए धनराशि की वसूली और अन्य कार्रवाई की संस्तुति की है।
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लोकपाल मनरेगा उमेश कुमार तिवारी ने बताया कि ग्राम पंचायत निवासी कुलदीप यादव ने 8 सितंबर को मनरेगा के 13 कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर खंड विकास अधिकारी एवं कार्यक्रम अधिकारी तेजवापुर को सात दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। निर्धारित समय में आख्या उपलब्ध न होने पर लोकपाल ने स्वयं 18 नवंबर को ग्राम पंचायत हेमरिया का निरीक्षण किया।
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शिकायतकर्ता, ग्राम प्रधान, एपीओ और तकनीकी सहायक की मौजूदगी में हुई जांच में नाले के दो जीर्णोद्धार कार्यों पर 3 लाख 18 हजार 457 रुपये का भुगतान पाया गया, जबकि मौके पर खोदाई के निशान तक नहीं मिले।
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अमेरिका के खेत से धाना भगत के घर तक बांध निर्माण पर 11 लाख 29 हजार 265 रुपये का भुगतान दर्शाया गया था, लेकिन स्थलीय निरीक्षण में केवल 140 मीटर चकमार्ग मिला और शेष बांध नहीं मिला। पुराने बांध में केवल कुछ स्थानों पर रेनकट की मरम्मत पाई गई।


काली के खेत से मायाराम के खेत तक चकरोड उच्चीकरण के नाम पर दो वित्तीय वर्षों में दो बार में 2 लाख 73 हजार 912 रुपये का भुगतान पाया गया, जबकि मार्ग एक ही है। पराग डेयरी के बगल से अमृत सरोवर तक चकरोड का कार्य भी मानक के अनुसार नहीं मिला।

कई नालों, तालाबों और चकरोडों पर किए गए भुगतान पूरी तरह काल्पनिक पाए गए। निरीक्षण के दौरान किसी भी कार्य पर सीआई बोर्ड नहीं पाया गया, जिससे कार्यों की पहचान छुपाने का प्रयास स्पष्ट हुआ।




धनराशि वसूली का आदेश
लोकपाल मनरेगा उमेश कुमार तिवारी ने बताया कि बांध निर्माण में आंशिक कार्य मिलने के कारण 11.29 लाख रुपये में से केवल 3 लाख रुपये की वसूली उचित मानी गई, जबकि अन्य सभी कार्यों में संपूर्ण भुगतान फर्जी पाया गया। इसी आधार पर ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक को जिम्मेदार मानते हुए मनरेगा एसओपी के अनुसार 13 लाख 22 हजार 977 रुपये की समानुपातिक वसूली का आदेश दिया गया है। इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है।
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