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घाघरा में बढ़ा घड़ियालों का कुनबा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 17 Feb 2016 09:46 PM IST
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जरवलरोड (बहराइच)। घाघरा में घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने के लिए बुधवार दोपहर लखनऊ के कुकरैल से लाए गए घड़ियाल के 35 बच्चों को नदी में छोड़ा गया।
इससे पहले घड़ियाल के बच्चों की पूंछ पर रेडियो टैग भी लगाए गए। टैग के जरिए नदी में प्रवास के दौरान घड़ियालों की निगरानी की जाएगी। उनके व्यवहार का भी अध्ययन किया जाएगा।
घाघरा नदी में इस समय 163 घड़ियाल प्रवास कर रहे हैं। कतर्नियाघाट के गिरिजापुरी से फैजाबाद जिले की सीमा के बीच इनका प्रवास है।
बीते वर्ष टर्टल सरवाइवल एलायंस और वन विभाग ने 65 बच्चों को छोड़ा था। घाघरा में इनकी स्थिति काफी बेहतर मिली, जिसके चलते इस बार फिर घड़ियाल के बच्चों को नदी में छोड़ने की योजना बनाई गई।
टर्टल सरवाइवल एलायंस के समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि घाघरा का पानी घड़ियालों के कुनबा वृद्धि के लिए काफी अनुकूल मिला है।
उसी के चलते कुकरैल से घड़ियालों के 35 बच्चे बुधवार को जरवलरोड के ग्रामसभा तपेसिपाह के झूरीपुरवा के पास लाए गए। यहां टीएसए के निदेशक डॉ. शैलेंद्र सिंह, विशेषज्ञ अरुणिमा सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह तथा वन क्षेत्राधिकारी कैसरगंज की मौजूदगी में घड़ियाल के बच्चों को नदी में छोड़ दिया गया।
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उन्होंने बताया कि सभी घड़ियाल के बच्चों की पूंछ पर एक रेडियो टैग लगाया गया है, जिससे नदी में उनकी स्थिति, रहन-सहन का समुचित तरीके से अध्ययन किया जा सकेगा।
एक मीटर लंबे हैं बच्चे
टीएसए समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि घाघरा नदी में जो बच्चे छोड़े गए हैं, उनकी लंबाई लगभग एक मीटर के आसपास है, जबकि वजन छह से आठ किलोग्राम के बीच है। नदी में रहन-सहन के दौरान इन सभी घड़ियालों के वजन का भी अध्ययन किया जाएगा।
पहले छोड़े गए सभी घड़ियाल हैं सुरक्षित
भास्कर ने बताया कि घाघरा में वर्ष 2014 में 63 व वर्ष 2015 में 65 घड़ियाल के बच्चे अलग-अलग चक्रों में छोड़े गए थे। वह सभी सुरक्षित हैं। उनकी पूंछ पर लगे रेडियो टैग से निरंतर उनकी निगरानी की जा रही है।
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इससे पहले घड़ियाल के बच्चों की पूंछ पर रेडियो टैग भी लगाए गए। टैग के जरिए नदी में प्रवास के दौरान घड़ियालों की निगरानी की जाएगी। उनके व्यवहार का भी अध्ययन किया जाएगा।
घाघरा नदी में इस समय 163 घड़ियाल प्रवास कर रहे हैं। कतर्नियाघाट के गिरिजापुरी से फैजाबाद जिले की सीमा के बीच इनका प्रवास है।
बीते वर्ष टर्टल सरवाइवल एलायंस और वन विभाग ने 65 बच्चों को छोड़ा था। घाघरा में इनकी स्थिति काफी बेहतर मिली, जिसके चलते इस बार फिर घड़ियाल के बच्चों को नदी में छोड़ने की योजना बनाई गई।
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टर्टल सरवाइवल एलायंस के समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि घाघरा का पानी घड़ियालों के कुनबा वृद्धि के लिए काफी अनुकूल मिला है।
उसी के चलते कुकरैल से घड़ियालों के 35 बच्चे बुधवार को जरवलरोड के ग्रामसभा तपेसिपाह के झूरीपुरवा के पास लाए गए। यहां टीएसए के निदेशक डॉ. शैलेंद्र सिंह, विशेषज्ञ अरुणिमा सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह तथा वन क्षेत्राधिकारी कैसरगंज की मौजूदगी में घड़ियाल के बच्चों को नदी में छोड़ दिया गया।
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उन्होंने बताया कि सभी घड़ियाल के बच्चों की पूंछ पर एक रेडियो टैग लगाया गया है, जिससे नदी में उनकी स्थिति, रहन-सहन का समुचित तरीके से अध्ययन किया जा सकेगा।
एक मीटर लंबे हैं बच्चे
टीएसए समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि घाघरा नदी में जो बच्चे छोड़े गए हैं, उनकी लंबाई लगभग एक मीटर के आसपास है, जबकि वजन छह से आठ किलोग्राम के बीच है। नदी में रहन-सहन के दौरान इन सभी घड़ियालों के वजन का भी अध्ययन किया जाएगा।
पहले छोड़े गए सभी घड़ियाल हैं सुरक्षित
भास्कर ने बताया कि घाघरा में वर्ष 2014 में 63 व वर्ष 2015 में 65 घड़ियाल के बच्चे अलग-अलग चक्रों में छोड़े गए थे। वह सभी सुरक्षित हैं। उनकी पूंछ पर लगे रेडियो टैग से निरंतर उनकी निगरानी की जा रही है।