{"_id":"5741ff014f1c1b4648690a79","slug":"during-the-mission-the-rainbow-will-not-open-the-lock-of-substation","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिशन इंद्रधनुष के दौरान भी नहीं खुला उपकेंद्र का ताला ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिशन इंद्रधनुष के दौरान भी नहीं खुला उपकेंद्र का ताला
अमर उजाला / बहराइच
Updated Mon, 23 May 2016 12:18 AM IST
विज्ञापन
परेवपुर में लाखों की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र (
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रावस्ती। गर्भधात्री महिलाओं व नवजात शिशुओं को गांव में ही टीकाकरण आदि की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गांव में उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया गया है। वहीं विभागीय लापरवाही के कारण गिलौला के परेवपुर गांव में लाखों रुपये की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र बदहाल है।
ऐसे में जहां लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं जरूरत पड़ने पर लोगों को गिलौला का चक्कर लगाना पड़ता है। गिलौला विकास क्षेत्र के ग्राम पंचायत परेवपुर में कुछ वर्ष पूर्व लाखों रुपये खर्च कर उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था।
जिसमें आज भी ताला लटक रहा है। पूर्व में जिलाधिकारी द्वारा चलाए गए जीवन कैंप व वर्तमान में शासन द्वारा चलाए जा रहे मिशन इंद्रधनुष के दौरान भी इस केंद्र का ताला न खुलने से वहां झाड़ियां उग आई हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण ओमप्रकाश बताते हैं कि निर्माण के बाद से अब तक कभी उपकेंद्र का ताला नहीं खुला और न ही यहां कभी गर्भधात्री अथवा नवजात शिशुओं को टीका ही लगाया गया। एएनएम गांव कब आतीं हैं कब जातीं हैं इसकी किसी को जानकारी नहीं है।
ग्रामीण पांचू व तीरथ बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग जब भी कोई अभियान चलाता है तो एएनएम आशा व आंगनबाड़ी गांव आकर किसी न किसी ग्रामीण के घर के सामने बैठ कर अपना कर्तव्य निर्वहन कर लौट जातीं हैं।
संते व बबलू कहते हैं कि गांव से गिलौला की दूरी पंद्रह किलोमीटर है। प्रसव के लिए महिलाओं को वहीं ले जाता पड़ता है। जबकि गांव में बने स्वास्थ्य उपकेंद्र का उपयोग न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीएचसी गिलौला के अधीक्षक डॉ. सिद्धेश वर्मा ने बताया कि परेवपुर में एएनएम उमारानी की तैनाती है। उपकेंद्र न खुलने की हमें कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
ऐसे में जहां लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं जरूरत पड़ने पर लोगों को गिलौला का चक्कर लगाना पड़ता है। गिलौला विकास क्षेत्र के ग्राम पंचायत परेवपुर में कुछ वर्ष पूर्व लाखों रुपये खर्च कर उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था।
विज्ञापन
जिसमें आज भी ताला लटक रहा है। पूर्व में जिलाधिकारी द्वारा चलाए गए जीवन कैंप व वर्तमान में शासन द्वारा चलाए जा रहे मिशन इंद्रधनुष के दौरान भी इस केंद्र का ताला न खुलने से वहां झाड़ियां उग आई हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण ओमप्रकाश बताते हैं कि निर्माण के बाद से अब तक कभी उपकेंद्र का ताला नहीं खुला और न ही यहां कभी गर्भधात्री अथवा नवजात शिशुओं को टीका ही लगाया गया। एएनएम गांव कब आतीं हैं कब जातीं हैं इसकी किसी को जानकारी नहीं है।
ग्रामीण पांचू व तीरथ बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग जब भी कोई अभियान चलाता है तो एएनएम आशा व आंगनबाड़ी गांव आकर किसी न किसी ग्रामीण के घर के सामने बैठ कर अपना कर्तव्य निर्वहन कर लौट जातीं हैं।
संते व बबलू कहते हैं कि गांव से गिलौला की दूरी पंद्रह किलोमीटर है। प्रसव के लिए महिलाओं को वहीं ले जाता पड़ता है। जबकि गांव में बने स्वास्थ्य उपकेंद्र का उपयोग न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीएचसी गिलौला के अधीक्षक डॉ. सिद्धेश वर्मा ने बताया कि परेवपुर में एएनएम उमारानी की तैनाती है। उपकेंद्र न खुलने की हमें कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।