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चार गांवों के लोगों को जल्द मिलेगा शुद्ध पेयजल

Thu, 21 Apr 2016 09:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 21 Apr 2016 09:35 PM IST
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drinking water facility will improve in four villages
मिहींपुरवा विकासखंड के पैरुआ कंचनपुर में पानी टंकी का निर्माण करने में जुटे मजदूर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
उर्रा (बहराइच)। जंगल से सटे गांव के लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। अब तक 30 गांव के लगभग 48 हजार लोग जहरीले आर्सेनिक युक्त पानी का प्रयोग करने से त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं।
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कई ग्रामीणों की सूरत बदल गई है। ऐसे में त्वचा का रंग व अन्य रोगों की आशंका के चलते तमाम लोग घरों से निकलने से भी परहेज करते हैं। इस समस्या को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने स्वच्छ पेयजल परियोजना को हरी झंडी दी है।
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इस परियोजना से जंगल से प्रभावित गांव आच्छादित होंगे। प्रथम चरण में पानी टंकी का निर्माण कर चार गांवों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग चरणों में अन्य गांवों के लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
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तराई की 90 फीसदी आबादी पानी की समस्या से परेशान है। किसी को गैस तो किसी को पेट की अन्य बीमारियां हैं। सबसे अधिक दिक्कत आर्सेनिक प्रभावित इलाकों में है। जहां पानी के निरंतर प्रयोग से लोगों को त्वचा, किडनी, लिवर तथा हड्डी संबंधी रोगों का सामना करना पड़ रहा है।

जिले के तेजवापुर, हुजूरपुर, मिहींपुरवा, महसी, कैसरगंज, रिसिया, नवाबगंज का इलाका आर्सेनिक से अत्यधिक प्रभावित है। मिहींपुरवा में घाघरा के कछार परिक्षेत्र में जंगल से सटे इलाकों में बीते डेढ़ साल में भूगर्भ जल में आर्सेनिक की मात्रा में बड़े पैमाने पर बढ़ी है। जिसके चलते इस क्षेत्र के लोग बीमारियों की चपेट में हैं।

‘अमर उजाला’ के पांच फरवरी के अंक में प्रमुखता से इसका खुलासा किया था। इसके बाद जिला प्रशासन अलर्ट हुआ। आनन-फानन में आर्सेनिक प्रभावित जंगल से सटे गांवों के लिए पेयजल योजना तैयार करने के लिए बैठक बुलाई गई।

फरवरी में ही डीएम अभय ने जल निगम को परियोजना का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उसके तहत एक चरण में चार गांवों को आच्छादित करने की योजना बनी। जिसे शासन से हरी झंडी भी मिल गई है।

प्रथम चरण में दो करोड़ रुपये बजट आवंटित हुआ है। इससे जंगल से सटे जालिमनगर, लौकाही, गौरा पिपरा, पैरुआ गांव के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सकेगा। इन चार गांवों के बीच एक पानी की टंकी का निर्माण होगा, जिसमें आर्सेनिक रिमूवल प्लांट लगाया जाएगा।

उसी के माध्यम से गांवों को पेयजल आपूर्ति होगी। प्रत्येक ग्रामीण को कनेक्शन का आवंटन होगा। प्रोजेक्ट के प्रथम चक्र को अमलीजामा पहनाने के लिए जल निगम ने कार्य शुरू कर दिया है।

कनेक्शन का जमा होगा शुल्क

जल निगम के सहायक अभियंता इकबाल हुसैन ने बताया कि आर्सेनिक की समस्या को देखते हुए पेयजल परियोजना को हरी झंडी दी गई है। प्रथम चक्र की परियोजना के लिए काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जुलाई तक पानी टंकी का निर्माण पूरा कर चारों गांवों में पाइप लाइन बिछा दी गई।

सामान्य वर्ग के लोगों को कनेक्शन लेने के लिए 450 रुपये व पिछड़े वर्ग तथा अनुसूचित जाति के लोगों को 225 रुपये शुल्क अदा करना होगा। ये शुल्क सिर्फ एक बार लिया जाएगा, उसके बाद नि:शुल्क पेयजल की आपूर्ति होगी।

आर्सेनिक से बीमार महिला की जा चुकी जान

आर्सेनिक युक्त पानी के प्रयोग से जंगल से सटे कल्लू गौढ़ी गांव की माया देवी (60) को त्वचा की बीमारियां हो गईं थीं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने माया को चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान सोमवार को माया की मौत हो गई।

मालूम हो कि, चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के डॉक्टरों ने माया के शरीर में आर्सेनिक युक्त पानी के प्रयोग के चलते रोग प्रतिरोधक क्षमता ख्तम होने तथा खून न बनने की बीमारी बताई थी।


द्वितीय चक्र में ये गांव होंगे आच्छादित

सहायक अभियंता ने बताया कि द्वितीय चक्र में जंगल से सटे उर्रा, झाला, नौबना, मझरा व मधवापुर गांव में पानी टंकी का निर्माण कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल योजना से आच्छादित किया जाएगा। इसका भी प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शीघ्र ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

 
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