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अब घाघरा में अठखेलियां करेगी डॉल्फिन
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 18 Nov 2015 09:47 PM IST
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नानपारा (बहराइच)। गिरधरपुर और आंबा पोखर गांव के पास सरयू मुख्य नहर में अठखेलियां कर रहीं डॉल्फिनों पर मंगलवार को ग्रामीणों की नजर पड़ गई।
डॉल्फिनों को नदी का आसरा देने के लिए ग्रामीणों ने वन विभाग को खबर की। अधिकारियों ने लखनऊ से टर्टल सरवाइवल एलायंस की टीम बुलाई और बुधवार दोपहर नहर में जाल डालकर टीम ने एक डॉल्फिन को पकड़ लिया।
टीएसए और वन विभाग की टीम ने उसे चहलारीघाट पर घाघरा नदी में छोड़ दिया। वहीं, नहर में दूसरी डॉल्फिन को पकड़ने के लिए प्रयास जारी है।
सरयू मुख्य नहर व सहायक नहरें गेरुआ और कौड़ियाला नदी के संगमस्थल पर गिरिजा बैराज से निकलती हैं। इसके चलते अकसर गेरुआ और कौड़ियाला नदियों में अठखेलियां करने वाली डॉल्फिन पानी के साथ बहकर नहर में पहुंच जाती हैं।
ऐसा ही होने पर सरयू मुख्य नहर में दो डॉल्फिन पहुंच गईं। चार दिन से इन्हें देखे जाने की बात नानपारा के गिरधरपुर और आंबा पोखर के ग्रामीण कह रहे थे लेकिन डॉल्फिन की पुष्टि न होने पर किसी ने वन विभाग को खबर नहीं की।
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मंगलवार दोपहर गिरधरपुर के पास कुछ ग्रामीण जमा थे तभी उन्हें कई बार डॉल्फिन उछलकूद करती दिखी। जागरूक ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी।
एसडीओ पीके सिंह और रेंजर नरेंद्र कुमार ने बुधवार सुबह टीम को मौके पर भेजा तो नहर में डॉल्फिन होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई।
बुधवार दोपहर बाद टर्टल सरवाइवल एलायंस लखनऊ के समन्वयक भास्कर दीक्षित व डॉ. शैलेंद्र सिंह की अगुवाई में टीम नानपारा के गिरधरपुर गांव के पास मुख्य नहर पर पहुंची।
यहां एक किलोमीटर के दायरे में दोनों तरफ जाल लगाकर नहर खंगाली गई। इस पर एक डॉल्फिन को सुरक्षित पकड़ने में टीम के अधिकारी सफल रहे। उसे चारपाई पर गीले कपड़े में लपेटकर घाघरा नदी में छोड़ने के लिए चहलारीघाट ले गए।
नमी बनाए रखने के लिए कपड़ों में लपेटा
समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि डॉल्फिन को अगर पानी न मिले तो उसकी समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में चोंच को खुला रखते हुए डॉल्फिन को गीले कपड़े में लपेटकर चारपाई पर रखा गया है।
देर शाम पकड़ी गई डॉल्फिन को घाघरा में छोड़ दिया गया है। दीक्षित ने बताया कि दूसरी डॉल्फिन को भी देर रात तक पकड़ लिया जाएगा। इसके लिए सारी व्यवस्थाएं नहर तट पर मौजूद हैं।
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डॉल्फिनों को नदी का आसरा देने के लिए ग्रामीणों ने वन विभाग को खबर की। अधिकारियों ने लखनऊ से टर्टल सरवाइवल एलायंस की टीम बुलाई और बुधवार दोपहर नहर में जाल डालकर टीम ने एक डॉल्फिन को पकड़ लिया।
टीएसए और वन विभाग की टीम ने उसे चहलारीघाट पर घाघरा नदी में छोड़ दिया। वहीं, नहर में दूसरी डॉल्फिन को पकड़ने के लिए प्रयास जारी है।
सरयू मुख्य नहर व सहायक नहरें गेरुआ और कौड़ियाला नदी के संगमस्थल पर गिरिजा बैराज से निकलती हैं। इसके चलते अकसर गेरुआ और कौड़ियाला नदियों में अठखेलियां करने वाली डॉल्फिन पानी के साथ बहकर नहर में पहुंच जाती हैं।
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ऐसा ही होने पर सरयू मुख्य नहर में दो डॉल्फिन पहुंच गईं। चार दिन से इन्हें देखे जाने की बात नानपारा के गिरधरपुर और आंबा पोखर के ग्रामीण कह रहे थे लेकिन डॉल्फिन की पुष्टि न होने पर किसी ने वन विभाग को खबर नहीं की।
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मंगलवार दोपहर गिरधरपुर के पास कुछ ग्रामीण जमा थे तभी उन्हें कई बार डॉल्फिन उछलकूद करती दिखी। जागरूक ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी।
एसडीओ पीके सिंह और रेंजर नरेंद्र कुमार ने बुधवार सुबह टीम को मौके पर भेजा तो नहर में डॉल्फिन होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई।
बुधवार दोपहर बाद टर्टल सरवाइवल एलायंस लखनऊ के समन्वयक भास्कर दीक्षित व डॉ. शैलेंद्र सिंह की अगुवाई में टीम नानपारा के गिरधरपुर गांव के पास मुख्य नहर पर पहुंची।
यहां एक किलोमीटर के दायरे में दोनों तरफ जाल लगाकर नहर खंगाली गई। इस पर एक डॉल्फिन को सुरक्षित पकड़ने में टीम के अधिकारी सफल रहे। उसे चारपाई पर गीले कपड़े में लपेटकर घाघरा नदी में छोड़ने के लिए चहलारीघाट ले गए।
नमी बनाए रखने के लिए कपड़ों में लपेटा
समन्वयक भास्कर दीक्षित ने बताया कि डॉल्फिन को अगर पानी न मिले तो उसकी समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में चोंच को खुला रखते हुए डॉल्फिन को गीले कपड़े में लपेटकर चारपाई पर रखा गया है।
देर शाम पकड़ी गई डॉल्फिन को घाघरा में छोड़ दिया गया है। दीक्षित ने बताया कि दूसरी डॉल्फिन को भी देर रात तक पकड़ लिया जाएगा। इसके लिए सारी व्यवस्थाएं नहर तट पर मौजूद हैं।