{"_id":"589b61a24f1c1b865237a7c0","slug":"choose-educated-representatives","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षित को चुनें जनप्रतिनिधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षित को चुनें जनप्रतिनिधि
अमर उजाला/बहराइच
Updated Wed, 08 Feb 2017 11:51 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे युवा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक दशक में राजनीति में भ्रष्टाचार कैंसर की तरह अपनी जड़ें फैला चुका है। राजनीति में आने वाले अधिकतर लोग ईमानदार नहीं होते हैं। ऐसे में स्वच्छ छवि, शिक्षित, ईमानदार, स्थानीय समस्याओं को सदन में रखने वाले के साथ वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान की लड़ाई लड़ने वाले को ही सदन में भेजा जाए। यह विचार बुधवार को अमर उजाला के बरगदहा स्थित ग्राम पंचायत भवन में आयोजित वोटर अड्डा में मतदाताओं ने व्यक्त किए।
कार्यक्रम में मतदाताओं ने कहा कि राजनीति में भ्रष्टाचार कैंसर की तरह फैल चुका है। जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की समस्याओं को भूल जाते हैं। यहां तक कि जनता भी उनके चेहरों को भूलने लगती है। श्रावस्ती में समस्याएं ही समस्याएं हैं।
उद्योग धंधे न होने के कारण लोग रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं। प्रोफेशनल स्कूल न होने के कारण अधिकांश बच्चे प्रतिभाशाली होने के बाद भी घर में ही बैठे रहते हैं। आवागमन के लिए संसाधन भी नहीं हैं। भिनगा से इकौना जाने के लिए आधे घंटे के स्थान पर दो घंटे का समय लगता है। इसके बाद भी चुनाव जीतने वाला जनप्रतिनिधि इन समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देता है।
विज्ञापन
अपनी निधि का पैसा रैन बसेरा व गली निर्माण पर खर्च कर देता है। वहीं, सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण समस्या पर उसकी निधि से एक भी पैसा खर्च नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने एक मत से कहा कि जो जिले में उद्योग स्थापित कराएगा, बच्चों के लिए प्रोफेशनल स्कूल खुलवाएगा, उसे ही अपना वोट देंगे।
विज्ञापन
कार्यक्रम में मतदाताओं ने कहा कि राजनीति में भ्रष्टाचार कैंसर की तरह फैल चुका है। जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की समस्याओं को भूल जाते हैं। यहां तक कि जनता भी उनके चेहरों को भूलने लगती है। श्रावस्ती में समस्याएं ही समस्याएं हैं।
विज्ञापन
उद्योग धंधे न होने के कारण लोग रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं। प्रोफेशनल स्कूल न होने के कारण अधिकांश बच्चे प्रतिभाशाली होने के बाद भी घर में ही बैठे रहते हैं। आवागमन के लिए संसाधन भी नहीं हैं। भिनगा से इकौना जाने के लिए आधे घंटे के स्थान पर दो घंटे का समय लगता है। इसके बाद भी चुनाव जीतने वाला जनप्रतिनिधि इन समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देता है।
विज्ञापन
अपनी निधि का पैसा रैन बसेरा व गली निर्माण पर खर्च कर देता है। वहीं, सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण समस्या पर उसकी निधि से एक भी पैसा खर्च नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने एक मत से कहा कि जो जिले में उद्योग स्थापित कराएगा, बच्चों के लिए प्रोफेशनल स्कूल खुलवाएगा, उसे ही अपना वोट देंगे।