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Bahraich News: गलत व्यवहार हो तो अभिभावकों को बताएं
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बहराइच। 17 से 20 साल की उम्र में समझ नहीं आता कि क्या सही है और क्या गलत। अधिकांश क्रिमनल की हिस्ट्री इसी बीच शुरू होती है। छोटी गलतियों को नजरअंदाज करना अपराध को बढ़ावा देना है। ये बातें गुरु कृपा डिवाइन ग्रेस पब्लिक स्कूल में अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में एसपी प्रशांत वर्मा ने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि तीन बातों का ध्यान रखें तो कभी असुरक्षित नहीं होंगे। सोशल मीडिया पर जांच-पड़ताल के बाद ही लोगों से जुड़ें। वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग करें। एसपी ने कहा कि कोई आपके साथ गलत व्यवहार करें तो नजर अंदाज करने के बजाय अभिभावक व स्कूल के शिक्षक को जरूर बताएं। उन्होंने कहा कि 17 से 20 साल की उम्र काफी नाजुक होती है। इस बीच बच्चों को छोटे क्राइम करने से न रोका जाए तो वही आगे चलकर बड़ी घटनाओं को अंजाम देने लगते हैं। बेटियों ने एसपी से बेहिचक सवाल पूछे। इसके जवाब भी उन्हें मिले।
सवाल - जागरुकता के लिए स्कूल को ही क्यों चुना जाता है?
छात्रा - कुमकुम सिंह
जवाब- यहां पर पढ़ने वाले बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देकर अच्छे समाज की ओर ले जा सकते हैं। मिट्टी पकने के बाद उसके आकार में बदलाव नहीं हो सकता। ठीक इसी तरह स्कूल से निकलने के बाद संस्कार नहीं पैदा किए जा सकते।
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ंह
सवाल - पिंक टॉयलेट का समय निर्धारण क्यों है?
छात्रा - सुभाजंलि अग्रवाल
जवाब- जब हम किसी नए सिस्टम को समाज के बीच लाते हैं तो उसका एक लक्ष्य निर्धारित होता है। पिंक टॉयलेट 24 घंटे खुला रहे और वहां पर सुरक्षा के लिए महिला सिपाहियों की तैनाती की जाए। यह व्यवस्था की जाएगी।
सवाल - महिलाओं की समस्या सुनने के लिए थानों पर क्या व्यस्वस्था है?
छात्रा - सृष्टि चौधरी
जवाब- महिलाओं की समस्या सुनने के लिए महिला थाना है। इसके अलावा हर थाने पर महिला हेल्प डेस्क बना दी गई है। महिलाएं अपनी समस्याएं बेहिचक महिला पुलिसकर्मियों से ही बता सकती हैं। महिला पुलिसकर्मी उन्हें न्याय दिलाएंगी।
सवाल - छेड़छाड़ की घटनाएं कैसे रोकी जाएं?
छात्रा - आस्था शुक्ला
जवाब - अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस सदैव तत्पर है। मात्र 10 मिनट के अंदर डायल 112 पुलिस पहुंच रही है। अगर कोई दिक्कत हो रही है तो तत्काल डायल 112 मिलाएं। 1090 पर भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। समस्या का समाधान होगा।
अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में एसपी के संबोधन ने नई ऊर्जा देने का काम किया है। छात्राओं को समझाने का अंदाज निराला रहा। एसपी की हर बात बहुत बारीकियों से सुनकर छात्राओं ने उस पर अमल करने की ठानी है।
छवि रायतानी, प्रबंधक
महिला सुरक्षा के लिए जागरुकता अति आवश्यक है। महिलाओं को अपने कर्तव्यों व अधिकारों की जानकारी सही आयु में होना जरूरी है। सही उम्र में जानकारी होने से भविष्य में होने वाली समस्याओं को टाला जा सकता है।
हिमाक्षी चोपड़ा रायतानी, उप प्रधानाचार्या
अमर उजाला समय-समय पर बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर कार्यक्रम आयोजित करता है। यह अमर उजाला का सराहनीय पहल है। ऐसे कार्यक्रमों से छात्राएं जागरूक होती हैं और कभी ऐसी घटना सामने आने पर डटकर मुकाबला कर शोहदों को मुंहतोड़ जवाब देती हैं। कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद।
- ज्योति सिंह, शिक्षिका
बेटियों को जिले के एसपी अभिभावक के रूप में उनके अधिकार के बारे में समझाते है तो अच्छा लगता है। यह बेटियों को मजबूत बनाने का बेहतर मौका है। ऐसा मौका अमर उजाला ने दिया है। इसकी जितनी सराहना की जाए वह कम है।
शाबा अंजुम, शिक्षिका
बेटियां जिंदगी में पहली गलती तब करती हैं जब वह गलत व्यवहार पर चुप हो जाती हैं। कोई भी बहन-बेटी खुद को कमजोर न समझे। गलत व्यवहार पर तत्काल मुंहतोड़ जवाब दे। बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस 24 घंटे तत्पर है।
- प्रशांत वर्मा, एसपी
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उन्होंने कहा कि तीन बातों का ध्यान रखें तो कभी असुरक्षित नहीं होंगे। सोशल मीडिया पर जांच-पड़ताल के बाद ही लोगों से जुड़ें। वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग करें। एसपी ने कहा कि कोई आपके साथ गलत व्यवहार करें तो नजर अंदाज करने के बजाय अभिभावक व स्कूल के शिक्षक को जरूर बताएं। उन्होंने कहा कि 17 से 20 साल की उम्र काफी नाजुक होती है। इस बीच बच्चों को छोटे क्राइम करने से न रोका जाए तो वही आगे चलकर बड़ी घटनाओं को अंजाम देने लगते हैं। बेटियों ने एसपी से बेहिचक सवाल पूछे। इसके जवाब भी उन्हें मिले।
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सवाल - जागरुकता के लिए स्कूल को ही क्यों चुना जाता है?
छात्रा - कुमकुम सिंह
जवाब- यहां पर पढ़ने वाले बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देकर अच्छे समाज की ओर ले जा सकते हैं। मिट्टी पकने के बाद उसके आकार में बदलाव नहीं हो सकता। ठीक इसी तरह स्कूल से निकलने के बाद संस्कार नहीं पैदा किए जा सकते।
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ंह
सवाल - पिंक टॉयलेट का समय निर्धारण क्यों है?
छात्रा - सुभाजंलि अग्रवाल
जवाब- जब हम किसी नए सिस्टम को समाज के बीच लाते हैं तो उसका एक लक्ष्य निर्धारित होता है। पिंक टॉयलेट 24 घंटे खुला रहे और वहां पर सुरक्षा के लिए महिला सिपाहियों की तैनाती की जाए। यह व्यवस्था की जाएगी।
सवाल - महिलाओं की समस्या सुनने के लिए थानों पर क्या व्यस्वस्था है?
छात्रा - सृष्टि चौधरी
जवाब- महिलाओं की समस्या सुनने के लिए महिला थाना है। इसके अलावा हर थाने पर महिला हेल्प डेस्क बना दी गई है। महिलाएं अपनी समस्याएं बेहिचक महिला पुलिसकर्मियों से ही बता सकती हैं। महिला पुलिसकर्मी उन्हें न्याय दिलाएंगी।
सवाल - छेड़छाड़ की घटनाएं कैसे रोकी जाएं?
छात्रा - आस्था शुक्ला
जवाब - अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस सदैव तत्पर है। मात्र 10 मिनट के अंदर डायल 112 पुलिस पहुंच रही है। अगर कोई दिक्कत हो रही है तो तत्काल डायल 112 मिलाएं। 1090 पर भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। समस्या का समाधान होगा।
अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में एसपी के संबोधन ने नई ऊर्जा देने का काम किया है। छात्राओं को समझाने का अंदाज निराला रहा। एसपी की हर बात बहुत बारीकियों से सुनकर छात्राओं ने उस पर अमल करने की ठानी है।
छवि रायतानी, प्रबंधक
महिला सुरक्षा के लिए जागरुकता अति आवश्यक है। महिलाओं को अपने कर्तव्यों व अधिकारों की जानकारी सही आयु में होना जरूरी है। सही उम्र में जानकारी होने से भविष्य में होने वाली समस्याओं को टाला जा सकता है।
हिमाक्षी चोपड़ा रायतानी, उप प्रधानाचार्या
अमर उजाला समय-समय पर बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर कार्यक्रम आयोजित करता है। यह अमर उजाला का सराहनीय पहल है। ऐसे कार्यक्रमों से छात्राएं जागरूक होती हैं और कभी ऐसी घटना सामने आने पर डटकर मुकाबला कर शोहदों को मुंहतोड़ जवाब देती हैं। कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद।
- ज्योति सिंह, शिक्षिका
बेटियों को जिले के एसपी अभिभावक के रूप में उनके अधिकार के बारे में समझाते है तो अच्छा लगता है। यह बेटियों को मजबूत बनाने का बेहतर मौका है। ऐसा मौका अमर उजाला ने दिया है। इसकी जितनी सराहना की जाए वह कम है।
शाबा अंजुम, शिक्षिका
बेटियां जिंदगी में पहली गलती तब करती हैं जब वह गलत व्यवहार पर चुप हो जाती हैं। कोई भी बहन-बेटी खुद को कमजोर न समझे। गलत व्यवहार पर तत्काल मुंहतोड़ जवाब दे। बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस 24 घंटे तत्पर है।
- प्रशांत वर्मा, एसपी